तीन दिन शेष: 21 अक्टूबर को मौन साधना से बाहर आकर श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे अंतर्मना गुरुदेव
पुष्पगिरी तीर्थ में होगा मौन साधना का उद्घाटन, पारणा एवं मंगल प्रवचन; गुरुदेव के प्रेरणादायी उद्बोधन और दिव्य दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में उत्साह
औरंगाबाद/सोनकच्छ।
परम पूज्य व्रत चक्रवर्ती पट्टविभूषण अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज की दीर्घ अवधि की एकांतवास एवं मौन साधना के बाद अब श्रद्धालुओं को उनके दिव्य दर्शन और आशीर्वाद प्राप्त करने का मंगल अवसर मिलने जा रहा है। आगामी 21 अक्टूबर, बुधवार को पुष्पगिरी तीर्थ में अंतर्मना गुरुदेव अपनी गुफा से बाहर आकर श्रद्धालुओं के समक्ष उपस्थित होंगे। इस विशेष अवसर को लेकर जैन समाज और गुरुभक्तों में उत्साह का वातावरण है। कार्यक्रम में मौन साधना का उद्घाटन, पारणा एवं मंगल प्रवचन सहित विभिन्न धार्मिक आयोजन होंगे
मौन से आत्मा तक की आध्यात्मिक यात्रा
अंतर्मना गुरुदेव की मौन साधना और एकांतवास साधना, आत्मचिंतन एवं आत्मानुभूति की प्रेरणा देने वाला आध्यात्मिक प्रसंग है। लंबे समय तक मौन और एकांत में साधनारत रहने के बाद गुरुदेव का श्रद्धालुओं के बीच आगमन भक्तों के लिए विशेष आध्यात्मिक अनुभव होगा। इस अवसर पर गुरुदेव का प्रेरणादायी उद्बोधन भी होगा, जिसमें श्रद्धालुओं को उनके आध्यात्मिक विचारों और जीवन को सही दिशा देने वाली सीख का लाभ मिलेगा।
पुष्पगिरी में गूंजेगा गुरुभक्ति का स्वर
गुरुदेव के आगमन को लेकर भक्तों के बीच विशेष उत्सुकता है। इसी भाव को अभिव्यक्त करती पंक्तियां हैं—
“कई देवता इस दुनिया में हैं, सबके रूप सुहाने हैं।
पुष्पगिरी में जो तप कर रहे हैं, हम उनके दीवाने हैं..!”
इन पंक्तियों में गुरुदेव की तपस्या, त्याग और साधना के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था झलकती है।
21 अक्टूबर को होंगे विशेष आयोजन
बुधवार, 21 अक्टूबर को पुष्पगिरी तीर्थ क्षेत्र में मौन साधना के उद्घाटन एवं पारणा का कार्यक्रम आयोजित होगा। इस पावन अवसर पर श्रद्धालुओं को अंतर्मना गुरुदेव के दिव्य दर्शन, मंगल प्रवचन और आशीर्वाद प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। गुरुदेव का प्रेरक संदेश साधना, संयम, आत्मकल्याण और आध्यात्मिक जीवन की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देगा। ऐसी जानकारी प्रचार प्रसार संयोजक रोमिल पाटणी सोनकच्छ नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद ने दी है
अंतर्मना की आवाज, आत्मा के पास।
विशेष सूचना: मौन साधना का उद्घाटन एवं पारणा — 21 अक्टूबर, बुधवार, पुष्पगिरी तीर्थ क्षेत्र।
