भगवान के कल्याणक अंतिम होते हैं अर्थात वह दोबारा जन्म नहीं लेते हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आचार्य श्री सहित 3 साधुओं ने किये कैशलोचन

धर्म

भगवान के कल्याणक अंतिम होते हैं अर्थात वह दोबारा जन्म नहीं लेते हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आचार्य श्री सहित 3 साधुओं ने किये कैशलोचन

सीकर

 

राजकीय अतिथि वात्सल्य वारिधि 108 आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज सीकर दंग की नसिया में विराजित है। 18 अक्टूम्बर रविवार को अनेक अनुकरणीय धार्मिक कार्यक्रम हुए जिसमें समाज ने सहभागिता कर अनुमोदना की। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी आर्यिका श्री देशना मति एवं आर्यिका श्री दर्शना मति ने केशलोच किये इस अवसर पर काफी श्रद्धालु उपस्थित रहे।कोलकाता की 47 वर्षीय 7 प्रतिमा धारी बी ए शिक्षित आपने विगत वर्ष टोंक में आचार्य श्री से 7 व्रत प्रतिमा के नियम लिए थे ,श्रीमती अनीता संजय पाटनी ने आचार्य श्री वर्धमान सागर जी को जैनेश्वरी दीक्षा हेतु श्रीफल अर्पित कर दीक्षा की याचना कर समस्त संघ से आशीर्वाद लिया । एक अन्य कार्यक्रम में 10 प्रतिमा धारी ब्रह्मचारी राजेश भैय्या इंदौर ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी एवं संघ के दर्शन कर आशीर्वाद लिया आपकी दीक्षा किशनगढ़ में 21 अक्टूबर को आचार्य श्री विहर्ष सागर से होगी।

 

 

आशीष जयपूरिया एवं महेश बड़जात्या अनुसार राजेश भैय्या की सीकर समाज द्वारा तिलक माला श्रीफल पगड़ी से सम्मान कर आचार्य संघ समकक्ष छोल गोद श्रीफल, फल, सूखे मेवे से भरकर दीक्षा के भावों की अनुमोदना की। इस अवसर पर आचार्य श्री ने प्रवचन में बताया कि आप सभी को केवल ज्ञान रूपी लक्ष्मी से युक्त जैन धर्म प्राप्त हुआ है वितरागी ,सर्वज्ञ और हितोपदेशी भगवान द्वारा प्रतिपादित जिनवाणी से वर्तमान आचार्य साधु परमेष्ठी आपको रत्नत्रय धर्म धारण करने की शिक्षा और प्रेरणा देते हैं।

 

 

 

आप भगवान की पूजा विभिन्न द्रव्यों से करते हैं साधु परमेष्ठी की भी आहार दान ,औषधी दान आदि चार दान एवं नवधा भक्ति पूर्वक आहार एवं पूजन करना चाहिए। डॉ राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि सिद्धालय विराजित भगवान के कल्याणक अंतिम होते हैं वह दोबारा संसार में जन्म नहीं लेते हैं। स्वयं के जीवन का मूल्यांकन करने से ही संयम धारण करने की प्रेरणा मिलती है। आज दो दीक्षार्थी आपके समक्ष उपस्थित हैं संसार के दुखों से सभी भयभीत है ,संयम धारण करने पर ही दुख दूर होते हैं।भगवान, पंच परमेष्ठी के प्रति भक्ति समर्पण कर करने से जीवन धन्य होकर मनुष्य जीवन सार्थक होता है ।आचार्य श्री ने सभी को खान-पान और वेशभूषा शुद्ध रखने की बात कही।

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी

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