नवरात्रि के मंगल पर्व पर पुष्पगिरी तीर्थ में होगा श्री गजलक्ष्मी माता का दिव्य मंगल आगमन
जयपुर से आएंगी विश्व की प्रथम 5 फीट की श्री गजलक्ष्मी माता एवं श्री मनोवेगा देवी; 18 अक्टूबर को सुबह 11:47 बजे अभिजीत-अमृत मुहूर्त में होगा भव्य स्वागत
औरंगाबाद/सोनकच्छ (जिला देवास)। नवरात्रि के पावन पर्व पर मां लक्ष्मी का आगमन शुभ संकेत एवं मंगलमय संयोग माना जाता है। इसी धार्मिक उल्लास के बीच मध्यप्रदेश के प्रसिद्ध एवं विश्व वंदनीय पुष्पगिरी तीर्थ पर रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को एक ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन होने जा रहा है। परम पूज्य धर्मगुरु गणाचार्य श्री पुष्पदंतसागरजी गुरुदेव के असीम आशीर्वाद एवं मंगल प्रेरणा से जयपुर से विश्व की प्रथम 5 फीट की दिव्य श्री गजलक्ष्मी माता तथा पुष्पगिरी तीर्थ के आराध्य श्री पद्मप्रभ भगवानजी की यक्षिणी श्री मनोवेगा देवी का भव्य मंगल आगमन होगा।
इस पावन अवसर पर पुष्पगिरी तीर्थ के प्रणेता गणाचार्य श्री पुष्पदंतसागरजी गुरुदेव एवं व्रत चक्रवर्ती पट्टविभूषण अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्नसागरजी महाराज ससंघ का पावन सान्निध्य प्राप्त होगा। दोनों दिव्य प्रतिमाओं के आगमन को लेकर श्री पुष्पदंतसागर दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति न्यास ट्रस्ट मंडल परिवार एवं सोनकच्छ जैन समाज परिवार द्वारा भव्य स्वागत की तैयारियां की जा रही हैं।
18 अक्टूबर को सुबह 11:47 बजे होगा मंगल आगमन
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रविवार, 18 अक्टूबर 2026 को अभिजीत-अमृत मुहूर्त में प्रातः 11 बजकर 47 मिनट पर दोनों दिव्य प्रतिमाओं का पुष्पगिरी तीर्थ की पावन धरा पर मंगल आगमन होगा। इस ऐतिहासिक अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा भव्य अगवानी की जाएगी। नवरात्रि के शुभ पर्व पर आयोजित यह धार्मिक कार्यक्रम भक्तों के लिए आस्था, श्रद्धा एवं भक्ति का विशेष अवसर बनेगा।
छत्रपति संभाजीनगर के लोहाड़े परिवार को मिला सौभाग्य
इस आयोजन का विशेष आकर्षण विश्व की प्रथम 5 फीट की दिव्य श्री गजलक्ष्मी माता की प्रतिमा है। प्रतिमा के दान एवं विराजमान कराने का परम सौभाग्य छत्रपति संभाजीनगर के सौभाग्यवती राखी एवं डॉ. तुषारजी-कोमलजी लोहाड़े परिवार को प्राप्त हुआ है। इस पुण्य कार्य को लेकर जैन समाज में विशेष उत्साह का वातावरण है।
जैन परंपरा में गजलक्ष्मी स्वरूप का विशेष महत्व
जैन परंपरा में तीर्थंकर भगवान के जन्म से पूर्व उनकी माता को दिखाई देने वाले 16 स्वप्नों का विशेष धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व माना जाता है। इन शुभ स्वप्नों में गजलक्ष्मी का स्वरूप भी वर्णित है। ऐसे में श्री गजलक्ष्मी माता की दिव्य प्रतिमा का पुष्पगिरी तीर्थ पर मंगल आगमन श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था, भक्ति एवं पुण्यार्जन का अवसर होगा।
इसके साथ ही पुष्पगिरी तीर्थ के आराध्य श्री पद्मप्रभ भगवानजी की यक्षिणी श्री मनोवेगा देवी का भी मंगल आगमन होगा। दोनों दिव्य प्रतिमाओं के आगमन से तीर्थ परिसर में धार्मिक उल्लास, भक्तिभाव एवं मंगलमय वातावरण का संचार होगा।
सपरिवार पधारकर पुण्यार्जन करें
श्री पुष्पदंतसागर दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति न्यास ट्रस्ट मंडल परिवार एवं सोनकच्छ जैन समाज परिवार ने विश्वभर के जैन समाज सहित इंदौर, देवास, सोनकच्छ, आष्टा, जावर, मेहतवाड़ा, पिपल्या एवं आसपास के क्षेत्रों के समस्त धर्मप्रेमी बंधुओं से इस पावन अवसर पर सपरिवार उपस्थित होने का आग्रह किया है।
आयोजकों ने श्रद्धालुओं से निवेदन किया है कि वे स्वयं पधारकर दोनों दिव्य प्रतिमाओं की मंगल अगवानी में सहभागी बनें तथा अपने परिजनों, मित्रों एवं परिचितों को भी इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन में सम्मिलित होने के लिए प्रेरित करें और धर्मलाभ एवं पुण्यार्जन प्राप्त करें।
स्थान: पुष्पगिरी तीर्थ, सोनकच्छ, जिला देवास, मध्यप्रदेश।
संपर्क: 9372041008
निवेदक: श्री पुष्पदंतसागर दिगंबर जैन श्रमण संस्कृति न्यास ट्रस्ट मंडल परिवार एवं सोनकच्छ जैन समाज परिवार।
जानकारी: प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा, पियूष कासलीवाल (औरंगाबाद) एवं रोमिल पाटनी (सोनकच्छ)।
