भीड़ में रहकर भी अकेला है आज का इंसान, अपने ही घर में अपनों को ढूंढ रहा है : अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
मौन साधना में लिखित संदेश के जरिए दिया परिवार, रिश्तों और आपसी संवाद का संदेश; बोले—तकनीक ने दुनिया को जोड़ा, लेकिन अपनों के बीच दूरियां बढ़ा दीं
पुष्पगिरी
। आज का इंसान भीड़ में रहकर भी अकेला है। सबसे बड़ा दुख यह है कि वह अपने ही घर में अपनों को ढूंढ रहा है। पहले घर का अर्थ था एक साथ बैठना, हंसना और सुख-दुख बांटना, लेकिन आज एक ही छत के नीचे रहने वाले लोग भी अपनी-अपनी दुनिया में खोए हुए हैं। यह मार्मिक संदेश व्रत चक्रवर्ती, पट्टविभूषण अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने अपनी मौन साधना के दौरान लिखित संदेश के माध्यम से दिया।
परम पूज्य पुष्पगिरी तीर्थ प्रणेता गणाचार्य श्री पुष्पदंत सागरजी महाराज के सानिध्य में अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज एवं उपाध्याय श्री पीयूष सागरजी महाराज ससंघ पुष्पगिरी तीर्थ, सोनकच्छ में वर्षायोग हेतु विराजमान हैं। उनके सानिध्य में विभिन्न धार्मिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज की मौन साधना एवं एकांतवास की आध्यात्मिक साधना जारी है। इस दौरान वे अपने लिखित संदेशों के माध्यम से समाज को जीवन की महत्वपूर्ण सीख दे रहे हैं।
एक छत के नीचे, फिर भी अलग-अलग दुनिया
आचार्य श्री ने अपने संदेश में कहा कि आज घर में सब कुछ है, लेकिन परिवार के सदस्य एक-दूसरे से दूर होते जा रहे हैं। हर कोई अपने मोबाइल और अपनी दुनिया में व्यस्त है। एक ही छत के नीचे चार लोग रहते हैं, लेकिन चारों के रास्ते अलग-अलग हो गए हैं। परिवार के बीच साथ बैठने, खुलकर हंसने और एक-दूसरे की भावनाओं को समझने का समय लगातार कम होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया पर हमारे हजारों दोस्त हैं, हमारी पोस्ट पर लाइक्स और कमेंट्स भी आते हैं, लेकिन जब मन सचमुच उदास होता है, तब बगल वाले कमरे में बैठा अपना व्यक्ति भी दूर महसूस होता है। यह आधुनिक जीवन की एक बड़ी विडंबना है कि इंसान के संपर्क बढ़े हैं, लेकिन भावनात्मक संबंध कमजोर होते जा रहे हैं।
तकनीक ने दुनिया जोड़ी, अपनों के बीच बढ़ाई दूरी
अंतर्मना आचार्य श्री ने अपने संदेश में इस बात की ओर ध्यान दिलाया कि हमने तकनीक के माध्यम से पूरी दुनिया को जोड़ लिया, लेकिन कहीं न कहीं अपने ही घर में दूरियां पैदा कर ली हैं। अब बातें तो होती हैं, लेकिन वे दिलों तक नहीं पहुंच पातीं। परिवार के सदस्य पास बैठकर भी एक-दूसरे से अनजान बने रहते हैं। मोबाइल और सोशल मीडिया की व्यस्तता ने आत्मीय संवाद की जगह ले ली है।
रिश्तों को बचाने के लिए रोज आधा घंटा अपनों के नाम करें
आचार्य श्री ने इस समस्या का सरल समाधान बताते हुए कहा कि जरूरत बहुत बड़ी नहीं, बल्कि छोटी-सी पहल की है। दिन में केवल आधा घंटा मोबाइल से दूर रहकर अपने परिवार के साथ बैठें। अपनों की आंखों में देखकर बात करें, उनकी भावनाओं को समझें और बिना किसी स्वार्थ या काम के उनसे संवाद करें।
उन्होंने संदेश दिया कि परिवार को मजबूत बनाने के लिए महंगे साधनों और आलीशान घरों से अधिक जरूरी है आपसी प्रेम, समय और संवेदनशीलता। यदि परिवार के सदस्य एक-दूसरे के लिए समय नहीं निकालेंगे, तो ये आलीशान घर केवल दीवारें बनकर रह जाएंगे।
अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज का यह संदेश आज के आधुनिक समाज और प्रत्येक परिवार के लिए आत्मचिंतन का अवसर है। रिश्तों की वास्तविक सुंदरता सुविधाओं में नहीं, बल्कि साथ बैठने, एक-दूसरे को सुनने और सुख-दुख में सहभागी बनने में है। अपनों को अपने पास बनाए रखने के लिए जरूरी है कि हम मोबाइल की दुनिया से कुछ समय निकालकर अपने परिवार की दुनिया को फिर से जीवंत बनाएं
नरेंद्र अजमेरा एवं पीयूष कासलीवाल
प्रचार-प्रसार संयोजक से प्राप्त जानकारी संकलनअभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312



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