भक्ती की गर्मी से पौष की सर्दी भी घट जाती है” -निर्यापक श्रमण संभवसागर महाराज 

धर्म

“भक्ती की गर्मी से पौष की सर्दी भी घट जाती है” -निर्यापक श्रमण संभवसागर महाराज 

 विदिशा- 

“वर्रो वाले बाबा में आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है” उपरोक्त उदगार निर्यापक श्रमण संभवसागर महाराज ने शुक्रवार को प्रातः धर्मसभा में व्यक्त किये। प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रतिदिन प्रातः8:30 बजे से समग्र पाठशाला समिति एवं विदिशा नगर के महिलामंडलों के द्वारा आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर महामुनिराज की संगीतमय पूजन के साथ धर्मसभा प्रारंभ होती है, रविवार को भक्ती की इस गंगा में गुरु नाम गुरू आचार्य ज्ञानसागर महाराज के ऊपर लिखा विधान जिसे मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज ने लिखा है को 7:30 बजे से किया जा रहा है जिसमें सभी महिलामंडलों तथा पुरुषों को शामिल होंना है ।

निर्यापक श्रमण मुनि श्री संभवसागर महाराज ने कहा कि “पौष मास की ठंड है चिंता मत करो भक्ती की गर्मी से पौष की सर्दी भी छू मंतर हो जायेगी उन्होंने कहा कि आपके नगर के शीतलधाम में आपके इष्टदेव बर्रो वाले बाबा का नया मंदिर लगभग तैयार है और आप सभी को जैसे कुंडलपुर में जब बड़े बाबा को उच्चासन पर विराजमान किया गया था तो कुण्डलपुर महोत्सव मनाया गया था उसी तर्ज पर विदिशा वालो आप लोग भी कमर कसके तैयार हो जाओ आप सभी को बर्रो बाले बाबा को पुराने स्थान से नये मंदिर जी में विराजमान करना है तो “शीतलधाम महोत्सव” मनाने के लिये विदिशा ही नही बल्कि समूचे भारत के श्रद्धालुओं को आमंत्रित करो जिससे हम सभी मिलकर पूज्य आचार्य गुरुदेव के सानिध्य में यह महा महोत्सव मना सकें। 

आचार्य गुरुदेव समयसागर जी महाराज तिलवारा घाट जबलपुर में विराजमान है उनसे निवेदन करने समाज के तथा शीतलधाम के प्रतिनिधि जबलपुर जा रहे है मुनि श्री ने सभी को आशीर्वाद देते हुये कहा कि जैसे पूर्व में बर्रों वाले बाबा जब विदिशा आये थे तो उनकी मंगल अगवानी आचार्य गुरुदेव विद्यासागरजी महा मुनिराज ने की थी तो आपके नगर के इष्टदेव “बर्रो वाले बाबा” नये मंदिर जी में विराजमान हो रहे है, आचार्य श्री समयसागर महाराज उनकी अगवानी करें ऐसा निवेदन आप लोगों को जाकर करना है। उन्होंने कहा कि अभी एक डेढ़ माह का समय है, ऐसी भक्ती करो कि भक्ती की गर्मी से पौष की सर्दी भी घट जाए और गुरुदेव जबलपुर से सीधे विदिशा चले आयें। 

मुनि श्री ने “समण सुत्तं” ग्रंथ की वाचना प्रारंभ करते हुये कहा कि यह एक ऐसा ग्रंथ है जिसमें जैन धर्म और दर्शन के सभी महत्वपूर्ण विषय सम्मिलित है, जिसे आचार्य विनोबा भावे ने जैन धर्म का सार मानते हुये अन्य धर्म के धार्मिक ग्रंथों के साथ सन्1974 में सम्मिलित किया था जिसमें 756 गाथाएँ है जिसका पद्मानुवाद आचार्य गुरुदेव विद्यासागर जी महामुनिराज ने “जैन गीता” के रुप में करके बहूत ही सरल और सुग्राह्य कर दिया है। 

मुनि श्री ने कहा कि शीतलधाम में भगवान आदिनाथ स्वामी (बर्रो बाले बाबा) की प्रतिमा जो हजारों वर्ष पुरानी है उन्होंने उस प्रतिमा में खुद इतनी अधिक एनर्जी महसूस की है उन्होंने कहा कि उसमें आचार्य गुरुदेव की ऊर्जा विराजमान है,और वह आप सभी के इष्टदेव है, उनको जब नये मंदिर जी में विराजमान किया जाए तो पूरा विदिशा ही नहीं बल्कि समूचा बुन्देलखण्ड इसमें शामिल हो ऐसी तैयारियां आप सभी लोगों को अभी से करना होगी तभी आप इसे वृहद रुप प्रदान कर पाओगे।

 इस अवसर पर मुनि श्री निस्सीम सागर महाराज ने प्रश्नों के माध्यम से प्रश्नमंच कार्यक्रम को संचालित किया एवं सही उत्तर देने वालो को समाज बंधुओं ने पुरस्कृत किया इस अवसर पर मुनि श्री संस्कार सागर महाराज भी मंचासीन थे कार्यक्रम का संचालन मुकेश जैन बड़ाघर ने किया।प्रवक्ता अविनाश जैन विद्यावाणी ने बताया प्रतिदिन प्रातः8:30 बजे से आचार्य गुरुदेव की संगीतमय पूजन विदिशा नगर के विभिन्न महिला मंडलों द्वारा की जा रही है सकल दि. जैन समाज आग्रह करती है कि सभी महानुभाव समय पर पधारें एवं भक्ती की इस गंगा में अपने आपको डुबोकर पुण्य लाभ अर्जित करें।

           संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *