सभी 24 तीर्थंकर हमारे आराध्य हैं यह धर्म प्रकाश से अज्ञान ,मोह अंधकार दूर करते हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

सभी 24 तीर्थंकर हमारे आराध्य हैं यह धर्म प्रकाश से अज्ञान ,मोह अंधकार दूर करते हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

सीकर

राजकीय अतिथि वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज दंग की नसिया बजाज रोड सीकर में 41 साधु सहित विराजित है। प्रतिदिन धार्मिक अनुष्ठान के साथ णमोकार महामंत्र का जब नव दिवसीय जाप चल रहा है जिसमें काफी संख्या में समाज जन भाग ले रहे हैं।अनेक नगरों से भक्त सीकर पधार कर आचार्य श्री को अपने नगर पधारने का निवेदन कर रहे हैं ,इसी क्रम में मदनगंज किशनगढ़ से लगभग 250 से अधिक यात्री बसों एवं निजी वाहनों से आचार्य श्री के दर्शन करने पधारे तथा उन्होंने किशनगढ़ में शीत कालीन प्रवास एवं 1008 श्री मुनिसुब्रत जिनालय में पंचकल्याणक कराने हेतु आचार्य श्री वर्धमान सागर जी चरणों में सैकड़ो श्रीफल अर्पित कर निवेदन किया।

 

 

 

किशनगढ़ समाज के श्रेष्ठि गण संजय पापड़ीवाल,महावीर , विनोद कैलाश पाटनी ने दीप प्रवज्जलन कर आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन गौरव पाटनी,विजय काशली वाल राजेश पांड्या, प्रदीप आदि ने जिनवाणी भेंट की। किशनगढ़ के भक्तो ने विभिन्न अष्ट द्रव्यों से आचार्य श्री की पूजन की ।

 

 

इस अवसर पर आचार्य श्री ने आशीर्वचन में बताया कि किशनगढ़ समाज विगत कई वर्षों से संत सम आचार्य संघ समागम के लिए प्रयत्न कर रहे हैं किंतु उनका मंतव्य मनोरथ पुण्य की कमी कारण पूरा नहीं हुआ। भगवान परम वितरागी है उनके बताएं मार्ग पर दिगंबर साधु वीतरागी होकर चलते हैं बिना संयम धारण किए वितरागीता प्राप्त नहीं होती है। डॉक्टर राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे उपदेश में बताया कि वीतराग का मार्ग जिनवाणी आगम में बताया गया है,संसारी प्राणी अज्ञान अंधकार में जी रहे हैं इससे भ्रमित होकर दूसरों को अपना मान कर राग, द्वेष करते हैं राग द्वेष से सधन मोह अज्ञान अंधकार होता है। आचार्य श्री ने एक सूत्र बताया कि आप क्या थे ? क्या है? क्या होंगे? अर्थात कैसे थे? कैसे हैं? कैसे होंगे? इन सूत्रों से धर्म के माध्यम से आत्मा में विराजित भगवान को पहचानने का पुरुषार्थ करें किशनगढ़ समाज आचार्य श्री धर्म सागर जी महाराज के समय से गुरु भक्त रहा है ,यह परंपरा वर्तमान में भी और आने वाली पीढ़ी में भी विद्यमान रहना चाहिए सभी धर्म देव शास्त्र गुरुओ पर दृढ़ श्रद्धान रखना चाहिए ।24 तीर्थंकर हमारे आराध्य हैं ,वह धर्म रूपी प्रकाश से अज्ञान ,मोह अंधकार को दूर करने का मार्ग जिनवाणी से बताते हैं।

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

 

 

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