मौन साधना और जीवन के सूत्र: अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

धर्म

मौन साधना और जीवन के सूत्र: अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

पुष्पगिरी

मध्य प्रदेश के  प्रसिद्ध जैन तीर्थ क्षेत्र पुष्पगिरी (सोनकच्छ) में इन दिनों धार्मिक अनुष्ठानों की बहार छाई हुई है। । इसी श्रृंखला में अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज की गत 20 सितंबर से विशेष मौन साधना एकांतवास में चल रही है।

 

 

इस दौरान एकांतवास से आचार्यश्री ने अपने संदेश में जीवन को जीने के अनमोल सूत्र साझा किए हैं, जो हर व्यक्ति को प्रेरित करने वाले हैं।

“संसार में कोई कार्य असंभव नहीं”

अपने लिखित संदेश में आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने फरमाया कि संसार में कोई भी कार्य असंभव नहीं है। किसी के होने या न होने से कोई विशेष फर्क नहीं पड़ता; हर कार्य को कोई भी कर सकता है और पूर्व में लोगों ने इसे करके भी दिखाया है। बस, जीवन के सफर को खूबसूरत, मनभावन, मीठी यादों से भरा और प्रेरणास्पद बनाने का प्रयास होना चाहिए।

जीवन के प्रमुख संदेश और सूत्र:

सुख और आनंद को दें प्राथमिकता: यह अकाट्य सत्य है कि सबको सब कुछ नहीं मिलता। हर व्यक्ति के जीवन में अच्छे और बुरे अनुभव जुड़े होते हैं। इसलिए यह निरंतर प्रयास होना चाहिए कि जीवन में सुख, आनंद, हंसी और खुशी का पलड़ा, दुख, परेशानी, अशांति और आंसुओं से हमेशा भारी रहे। कभी भी आंसुओं और दुखों को अपने मन पर हावी न होने दें।

सबको खुश रखना असंभव: यह भी उतना ही सच है कि आप दुनिया के हर व्यक्ति को खुश नहीं कर सकते। पड़ोसी को खुश रखना शायद आसान हो, लेकिन अपनों को संतुष्ट करना सबसे कठिन कार्य है। कई बार दुनिया आपके कार्यों से प्रसन्न हो सकती है, परंतु अपने कभी पूरी तरह संतुष्ट नहीं होते।

नकारात्मकता को न दें स्थान: अपनों की छोटी-ओछी बातों, निंदा और आलोचना को अपने अंतःकरण और मन की भूमि पर न जमने दें। अपने हर कार्य को अपनी मस्ती, आनंद, उत्साह और जुनून के साथ करते रहें। मन के आंगन में गुस्सा, द्वेष और ईर्ष्या को प्रवेश न करने दें।

कर्तव्य पथ पर निरंतर अग्रसर रहें: अपने कार्य और कर्तव्य के प्रति हमेशा जागरूक रहें। अपने लक्ष्य और विकास की दिशा में वर्धमान (निरंतर आगे बढ़ने वाले) बने रहें। यही जीवन जीने का सबसे सही और सम्यक तरीका है।

आज के दौर की कड़वी सच्चाई

आचार्यश्री ने आज के समय की विसंगतियों पर कटाक्ष करते हुए बहुत ही सारगर्भित पंक्तियाँ लिखी हैं—

ना जीने देंगे ना मरने देंगे,

ना कुछ करेंगे ना करने देंगे,

ना खाएंगे ना खाने देंगे,

ना चलेंगे ना चलने देंगे,

ना आएंगे ना आने देंगे,

ना रहेंगे ना रहने देंगे…!!!

इन तमाम बाधाओं और नकारात्मकता से ऊपर उठकर अपने लक्ष्य की ओर निष्ठापूर्वक आगे बढ़ने की प्रेरणा अंतर्मना आचार्यश्री ने दी है।

पुष्पगिरी तीर्थ क प्रचार-प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा एवं पियूष कासलीवाल (औरंगाबाद) से प्राप्त  जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

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