‘कौन बनेगा प्रज्ञा शिरोमणि’ प्रतियोगिता में रामगंजमंडी की रेखा जैन शाह का चयन, नगर में खुशी की लहर
**देशभर के 3 हजार प्रतिभागियों में से चुने गए 20 प्रतिभाशाली प्रतियोगी, 4-5 अक्टूबर को अजमेर में होगा फाइनल मुकाबला*
*आचार्य विद्यासागर महाराज के जीवन एवं जैन धर्म पर आधारित होगी ज्ञान की परीक्षा,
*रामगंजमंडी*
जैन धर्म के ज्ञान, प्रतिभा और स्मरणशक्ति की अनूठी परीक्षा ‘कौन बनेगा प्रज्ञा शिरोमणि’ प्रतियोगिता में रामगंजमंडी की श्रीमती रेखा जैन शाह ने अपना स्थान बनाकर नगर को गौरवान्वित किया है। देशभर के हजारों प्रतिभागियों के बीच आयोजित ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा में चयनित 20 प्रतिभागियों में रेखा जैन शाह का नाम शामिल होने की सूचना मिलते ही रामगंजमंडी के जैन समाज सहित नगरवासियों में हर्ष और उत्साह का माहौल है। अब सभी की निगाहें अजमेर में होने वाले फाइनल मुकाबले पर टिकी हैं।
रेखा जैन शाह के चयन से परिवार और समाज में उत्साह
रेखा जैन शाह के चयन की सूचना उनके पति श्री प्रदीप शाह को मिली तो परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। आयोजन समिति की ओर से भी उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं। ज्ञान, प्रतिभा और स्मरणशक्ति पर आधारित इस विशिष्ट प्रतियोगिता में रेखा जैन शाह का चयन रामगंजमंडी के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।

नगरवासी उम्मीद जता रहे हैं कि रेखा जैन शाह फाइनल मुकाबले में हॉट सीट पर बैठकर अपनी प्रतिभा का परिचय देंगी और प्रतियोगिता का खिताब जीतकर रामगंजमंडी का नाम रोशन करेंगी। साथ ही, जैन धर्म की प्रभावना को आगे बढ़ाने में अपनी भूमिका निभाएंगी।
4 और 5 अक्टूबर को अजमेर में होगा फाइनल
‘कौन बनेगा प्रज्ञा शिरोमणि’ प्रतियोगिता का फाइनल मुकाबला 4 एवं 5 अक्टूबर 2026 को शाम 7 बजे से अजमेर स्थित मेरवाड़ा एस्टेट (कोठी), भागचंद जी की कोठी में आयोजित होगा। यह प्रतियोगिता जैन धर्म एवं आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के जीवन से जुड़े प्रसंगों पर आधारित है।
प्रतियोगिता के संयोजक आदीश जैन के अनुसार, फाइनल से पहले ऑनलाइन प्रवेश परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें देशभर से लगभग 3 हजार श्रद्धालुओं ने भाग लिया। इनमें से 20 प्रतिभागियों का चयन फाइनल मुकाबले के लिए किया गया है। चयनित प्रतिभागियों में 10 अजमेर से तथा 10 देश के विभिन्न शहरों और कस्बों से हैं।
यह आयोजन मुनिश्री 108 निष्पक्ष सागर महाराज एवं मुनिश्री 108 निस्पृह सागर महाराज की प्रेरणा से किया जा रहा है। इससे पहले देश-प्रदेश के छह शहरों में इस तरह के आयोजन हो चुके हैं। राजस्थान में भवानीमंडी के बाद अब अजमेर में यह कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।
विजेताओं को मिलेंगे सोने के लॉकेट
जैन धर्म पर आधारित इस रोचक प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में ज्ञान और स्मरणशक्ति के आधार पर प्रतिभागियों को सवालों के जवाब देने होंगे। प्रतियोगिता में शीर्ष स्थान प्राप्त करने वाले चार विजेताओं को सोने के लॉकेट प्रदान किए जाएंगे, जबकि अन्य सभी प्रतियोगियों को भी उपहार देकर सम्मानित किया जाएगा।
आचार्य विद्यासागर महाराज की दीक्षा स्थली से जुड़ा है अजमेर का गौरव
अजमेर का जैन समाज के इतिहास में विशेष स्थान है। यहीं 30 जून 1968 को महावीर सर्किल के निकट आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज ने आचार्य ज्ञानसागर महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहण की थी। उस समय उनकी आयु लगभग 22 वर्ष थी। जिस स्थान पर यह ऐतिहासिक दीक्षा संपन्न हुई, उसे आज जैन समाज श्रद्धा एवं स्मृति के महत्वपूर्ण स्थल के रूप में मानता है। यहां आचार्यश्री की स्मृति में 71 फीट ऊंचा कीर्ति स्तंभ भी स्थापित है।
आचार्य श्री विद्यासागर महाराज के जीवन, त्याग, तपस्या और आध्यात्मिक साधना से जुड़ी स्मृतियों के कारण अजमेर इस आयोजन के लिए विशेष महत्व रखता है। प्रतियोगिता के माध्यम से नई पीढ़ी को जैन धर्म और आचार्यश्री के जीवन-दर्शन से परिचित कराने का अवसर भी मिलेगा।
रामगंजमंडी की निगाहें फाइनल पर
रेखा जैन शाह के चयन के बाद रामगंजमंडी में उनके लिए शुभकामनाओं का सिलसिला जारी है। समाजजन कामना कर रहे हैं कि वे फाइनल मुकाबले में सफलता प्राप्त कर प्रतियोगिता का खिताब अपने नाम करें और नगर के साथ जैन समाज का गौरव बढ़ाएं।
अब 4 और 5 अक्टूबर को अजमेर में होने वाले इस ज्ञान महाकुंभ में यह देखना दिलचस्प होगा कि देशभर से चयनित 20 प्रतिभागियों में से कौन अपनी प्रतिभा और जैन धर्म के ज्ञान के दम पर ‘प्रज्ञा शिरोमणि’ का सम्मान हासिल करता है।
**एक रिपोर्ट: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी*






