*जयपुर में वरुण पथ मानसरोवर दिगंबर जैन मंदिर में पर्युषण पर्व के तहत हो रहे हैं अनेक धार्मिक आयोजन आयोजित*
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त्याग के माध्यम से पुण्य के साधनों का संचय करें*
*आचार्य विवेक सागर जी*
फागी संवाददाता
राजाबाबू गोधा
जयपुर 7 सितंबर 2022,श्री दिगंबर जैन मंदिर वरुण पथ मानसरोवर में चल रहे चातुर्मास के अंतर्गत परम पूज्य आचार्य गुरुवर विवेक सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद एवं पावन सानिध्य में दशलक्षण महापर्व के अंतर्गत चल रहे भव्य 10 दिवसीय विधान के अंतर्गत उपस्थित बंधुओ को मंगल आशीर्वाद देते हुए पहले अतिथि देवता तुल्य हुआ करते थे अब हमारा आदर भाव का संस्कार कम होता जा रहा है जब से हमने अतिथियों को बला मान लिया है तब से हमारे घर की सुख शांति चली गई है सुखी बनने के लिए कृतज्ञता का होना आवश्यक है आत्मा में दान करने के भाव रखने से मन को सुकून व जीवन को सुख की प्राप्ति होती है त्याग और दान दोनों में थोड़ा सा अंतर है दान का अर्थ है जिसमें स्वयं का वह दूसरों का उपकार हो वह दान है आचार्य गुरुवर ने बताया कि नवधा भक्ति वही व्यक्ति कर सकता है जो त्याग की भावना रखता हो और उसका हृदय विशाल होना चाहिए त्याग करने पर स्वयं का भला होता है और जीवन में आज एक त्याग का संकल्प लें देव शास्त्र गुरु के सामने हम उच्च आसन पर नहीं बैठेंगे दान दो प्रकार के होते हैं एक श्रद्धा दूसरा मजबूरी हमारे जीवन में अनादि काल से त्याग मैदान की परंपरा चली आ रही है त्याग मैदान हमारी संस्कृति है और हम सभी पर उसको बचाने की जिम्मेदारी है क्योंकि हमारी संस्कृति बस संस्कार ही जीवित नहीं होंगे तो हमारे अस्तित्व का क्या होगा जैन दर्शन कर्म सिद्धांत दर्शन है, कार्यक्रम में अध्यक्ष एमपी जैन ने बताया परम पूज्य आचार्य गुरुवर विवेक सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद से प्रतिष्ठाचार्य ऋतिक शास्त्री के निर्देशन में चल रहे दस दिवसीय विधान के अंतर्गत 108 अर्ध समर्पित किए गए आज विशेष रुप से परम पूज्य आचार्य गुरुवर विवेक सागर जी महाराज की पूजा पूर्ण भक्ति भाव से की गई परम पूज्य मुनि श्री 108 अर्चित सागर जी महाराज ने कहां की भक्ति से पूजा करने पर आत्मा का रोम-रोम खिल उठता है और जीवन में त्याग की भावना को सदैव बनाए रखें इससे मनुष्य के पाप कर्मों में कमी आती है एवं अगले भव को भी सुधारने का प्रयास किया जा सकता है प्रचार संयोजक विनेश सोगानी ने बताया कि धर्म सभा का मंगलाचरण के माध्यम से विधिवत शुभारम्भ ऐलक 105 श्री वीप्रमाणसागर जी महाराज ने किया एवं भगवान महावीर स्वामी व तपस्वी सम्राट आचार्य रत्न सुमति सागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर परम पूज्य आचार्य गुरुवर विवेक सागर जी महाराज का पाद प्रक्षालन कर शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य आज के सोधर्म इन्द्र विनेश जी श्रीमती प्रीती जी, अनुष्ठा, आरव सोगानी परिवार को प्राप्त हुआ एवम इस पावन अवसर पर श्रीमती मेना जी पाटनी, पुष्पेंद्र जी पचेवर वाले, संजय जी उषा जी छाबड़ा सहित सभी सम्माननीय अतिथियों का तिलक एवं माल्यार्पण कर कैलाश सेठी, हेमेंद्र सेठी,महावीर पाटनी,बीरेश जैन टीटी, राजेंद्र सोनी, सुनील गोधा,विमल बाकलीवाल श्रीमती आशा सेठी ने स्वागत किया। फागी संवाददाता राजाबाबू गोधा ने अवगत कराया कि कार्यक्रम बाद आचार्य श्री ने सभी भक्तजनों को मंगलमय आशीर्वाद दिया।
*राजाबाबू गोधा जैन महासभा मीडिया प्रवक्ता राजस्थान*
