गुरुकुल की शिक्षा, अनुशासन,संस्कारों से जीवन का निर्माण होता हैं व्रत से जीवन में उन्नति होती हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

गुरुकुल की शिक्षा, अनुशासन,संस्कारों से जीवन का निर्माण होता हैं व्रत से जीवन में उन्नति होती हैं आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

सीकर

दिगंबर समाज के दश लक्षण पर्व में अंतिम 10 वे दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर आचार्य श्री वर्धमान सागर जी की दंग की नशिया में धर्म देशना हुई आज के दिन आचार्य श्री सहित साधुओं ने 100 से अधिक श्रावक श्राविकाओं ने उपवास किए तथा आचार्य श्री समक्ष 100 से अधिक श्रद्धालुओ ने वर्ष में अनेक दिन अभिषेक का नियम लेकर पुण्य का अवसर प्राप्त किया। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी सानिध्य में प्रातःकाल श्री पार्श्वनाथ मंदिर दंग की नसिया,धर्मसागर सभागृह संघ चैत्यालय में श्री जी के पंचामृत हुए 1008 श्री वासुपूज्य भगवान का निर्वाण लाडू नगर के सभी मंदिरों में भक्ति पूर्वक चढ़ाया गया। आचार्य धर्मासागर सभागृह में प्रातः कालीन उपदेश में आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर उपदेश में बताया की आत्मा में रमन करना नजदीक रहना ब्रह्मचर्य व्रत है।ब्रह्मचर्य में मैथुन कार्य का त्याग होता है ब्रह्मचर्य में आत्मा में उपयोग लगाना होता है ब्रह्मचर्य के पालन से अनेक निर्वाण को प्राप्त हुए हैं। ब्रह्मचर्य में सभी पांचो इंद्रियों पर नियंत्रण होता करना होता है,आजकल स्वच्छंद प्रवृत्ति संस्कार संस्कृति के अभाव में ब्रह्मचर्य का पालन नहीं होता है। जैन धर्म के 24 तीर्थंकर में पांच तीर्थंकर बाल ब्रह्मचारी हुए हैं प्रथमाचार्य श्री शांति सागर जी महाराज की परंपरा में सभी आचार्य बाल ब्रह्मचारी रहे हैं। डॉ राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि ब्रह्मचर्य के पालन में शास्त्रों में सुदर्शन सेठ,सीता, अनंत मति, विजय सेठ विजया सेठानी , जिनदत्त , जिनदत्ता आदि अनेक उदाहरण है। एक कथा के माध्यम से बताया कि कुल भूषण देश भूषण ने गुरुकुल में अध्ययन प्राप्त कर जब युवावस्था में अपने नगर आए तब एक सुंदरी को देखकर दोनों भाई विवाह करने के लिए आपस में झगड़ने लगे तब मंत्री ने बताया कि यह आपकी सगी बहन है जो स्वागत के लिए खड़ी है तब दोनों भाइयों ने ब्रह्मचर्य व्रत धारण कर दीक्षा ले ली। व्रत से जीवन उन्नत होता हैं वर्तमान में संस्कारों के लिए गुरुकुल शिक्षा का महत्व बताया ।दीक्षा गुरु श्री धर्म सागर जी की प्रेरणा से सीकर में भी गुरुकुल प्रारंभ हुआ । गुरुकुल के अनुशासन, संस्कारों से जीवन का निर्माण होता हैं। आचार्य श्री ने महत्वपूर्ण सूत्र में बताया कि सभी को धर्म के लिए समय दान देकर धार्मिक कार्य स्वाध्याय आदि करना चाहिए सभी को जीवन पतन के बजाय उन्नति की ओर ले जाने का पुरुषार्थ कर मानव जीवन को सार्थक करना चाहिए। दोपहर को नगर के सभी जिनालयों में जुलूस के माध्यम से आचार्य श्री संघ सान्निध्य में श्रीजी के अभिषेक हुए ।

कल होगा 35 से अधिक तपस्वियों का सामूहिक पारणा सकल जैन समाज सीकर के तत्वाधान मे,11 उपवास करने वाले 35 नर नारियों का प्रातः काल सामूहिक पारणा होगा। 35 उपवास करने वालों में सीकर के अतिरिक्त बाल ब्रह्मचारिणी कीर्ति दीदी ,इंदौर के डा राजेश पंचोलिया, पाण्डिचेरी के महावीर सेठी , पारसोला के मेहुल , श्रीमती रानी जैन कसरावद, अर्पित चूड़ीवाल असम आदि नगरों से भक्तों ने गुरु चरणों आशीर्वाद से उपवास किए। इंदौर के राजेश पंचोलिया विगत 2023 से 10 उपवास कर रहे हैं

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