*पर्व राज पर्यूषण का नौवां दिन – उत्तम आकिंचन्य धर्म **
*मेरा मेरा पन छोड़ दो,आत्मा की सिवाय मेरा कुछ भी नहीं **
धामनोद से दीपक प्रधान की रिपोर्ट (निप्र)
दिगंबर जैन धर्म के चल रहे पर्व राज पर्यूषण के 9 वे दिन आज बड़वानी में विराजित चतुर्थ पट्टाचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका सुप्रज्ञ मति माताजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि आज उत्तम आकिंचन्य धर्म है और इसका मतलब है कि हमारे सभी परिग्रह को हमे छोड़ना चाहिए ,परिग्रह एक वस्तु से इतना बढ़ जाता है कि हम उस परिग्रह से बाहर नहीं आ पाते आप जो दिन रात धन धन करके धन कमाने में लगे हो ये धन,दौलत,ऐश्वर्य,नाम,सगे ,संबंधी,माता ,पिता,बच्चे पत्नी कोई भी तुम्हारा नहीं है मेरा नहीं है ये तुम्हे छोड़ देंगे और एक दिन तुम भी इन्हें छोड़ दोगे आपका अपना शरीर भी आपका नहीं है वो तो किराए का मकान है , सिर्फ़ आत्मा आपकी है।आप अपने कमाए धन का सदुपयोग करो दान करो वो आपको काम आयेगा आप अपने बच्चों के लिए कितना और क्या छोड़ जाओगे सब अपने भाग्य से कमा लेंगे अतः पूजा करो और साधु संत की सेवा करो जो पूजा करने से रोक रहे है संतो की सेवा करने से रोक रहे है वे घोर अन्तराय कर्म को बांध रहे है ,और वज्र जैसा पाप कर रहे हैं और ये अन्तराय उदय में आता है ,कब तक मेरा तेरा करते रहोगे माता जी ने आचार्य आदि सागर जी का दृष्टांत देते हुए बताया कि उनकी पत्नी को बहुत ही असाध्य रोग हो गया था तो उनकी संलेखना कराई और खुद ने उदगांव से अंकली गांव जा कर भट्टारक जी से धार्मिक शिक्षा पढ़ते थे और अपने बच्चों को अपनी बहन को देकर खुद ने दीक्षा ले ली उनको ये समझ आ गया था कि मेरा मेरा करते है और मेरा कुछ नहीं । माताजी ने एक साधु की लंगोटी का भी किस्सा सुनाया कि कैसे उसने धीरे धीरे अपना परिग्रह
बड़ा लिया इस लिए जैन साधु किसी से कुछ मांगते नहीं है।
आज प्रातः रोजनानुसार भगवान के अभिषेक शांतिधारा,नित्य नियम की रत्नत्रय,सोलह कारण जी, दस लक्षण धर्म की पूजन विधान की पूजन सम्पन्न हुई, इस अवसर पर समाज की दो बहुएं स्वाति राजेश गोधा और अदिति गौरव काला भी तप आराधना में लगी है और 10/10 उपवास की तप आराधना चल रही है,जिनको की समाज जनों ने बधाईयां दी इनका पारणा पूर्णिमा के दिन प्रातः होगा,

कल अनंत चतुर्दशी के उपलक्ष्य में रोजाना की नित्य क्रिया सम्पन्न होगी,उसके बाद शाम को नगर के मुख्य मार्ग पर भगवान की शोभा यात्रा निकलेगी, भगवान के अभिषेक शांतिधारा आरती सम्पन्न होगी और दस लक्षण धर्म की माल कि बोली लगेगी
