ज्ञान सोने जैसा, जहां से मिले समेट लें, बच्चों को डिग्री के साथ-साथ धर्म की शिक्षा भी दें सुधासागर महाराज
मुंगावली
नगर में विराजमान निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108सुधा सागर जी महाराज ने शुक्रवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए ज्ञान और संस्कारों की महत्ता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि ज्ञान सोने के समान मूल्यवान है, इसे ग्रहण करते समय कभी यह नहीं देखना चाहिए कि देने वाला कौन है। यदि कोई शत्रु, छोटा या दीन व्यक्ति भी अच्छी बात सिखा रहा है, तो उसे तुरंत स्वीकार कर लेना चाहिए।
मुनि श्री ने रामायण का प्रसंग सुनाते हुए कहा कि स्वयं भगवान राम ने लक्ष्मण को शिक्षा लेने के लिए रावण के पास भेजा था। यह इस बात का प्रमाण है कि ज्ञान की अपनी कोई जाति या सीमा नहीं होती। उन्होंने वर्तमान शिक्षा पद्धति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज माता-पिता अपने बच्चों को बड़ी-बड़ी डिग्रियां दिलाने के लिए महानगरों में भेज रहे हैं, लेकिन केवल लौकिक (दुनियावी) शिक्षा पर्याप्त नहीं है।
तीन चरणों में ज्ञान की उपयोगिता
प्रवचन के दौरान मुनि श्री ने जीवन के गणित को समझाते हुए कहा किः बचपन में अर्जित किया गया ज्ञान जवानी की ऊर्जा को सही दिशा देता है। जवानी में प्राप्त अनुभव और ज्ञान बुढ़ापे का सबसे बड़ा सहारा बनता है। बुढ़ापे का आध्यात्मिक ज्ञान इस लोक के साथ-साथ परलोक (भव-भवांतर) को भी सुधारता है।





धार्मिक शिक्षा ही भटकाव से बचाएगी
मुनि श्री ने अभिभावकों को सीख देते हुए कहा कि आप बच्चों को बाहर
पढ़ने भेजें, लेकिन साथ में धार्मिक संस्कारों का पाथेय भी दें। जब युवा धार्मिक शिक्षा के साथ घर से बाहर जाएगा, तो वह न केवल आपका नाम रोशन करेगा, बल्कि धर्म का अंकुश उसे गलत मार्ग पर जाने से भी रोकेगा। उन्होंने सांगानेर संस्था द्वारा देश भर में लगाए जा रहे शिविरों की सराहना करते हुए कहा कि इनका उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान देना नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला सिखाना है।
सेवा में जुटा वीर सेवा दलः त्यागी-व्रतियों के भोजन की संभाली कमान
मुनि श्री के ससंघ प्रवास के दौरान नगर के संत निवास पर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में लोग मंगल आशीर्वाद लेने पहुंच रहे हैं। यहां व्यवस्थाओं को चाक-चौबंद रखने में नगर की प्रमुख संस्था दिगम्बर वीर सेवा दल सक्रिय भूमिका निभा रही है। संस्था के पदाधिकारी और कार्यकारिणी सदस्य दिन-रात अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विशेष रूप से त्यागी-व्रतियों के लिए “‘ ‘सोले के भोजन”” (शुद्ध सात्विक भोजन) की व्यवस्था दल द्वारा संभाली जा रही है। सेवा दल के सदस्यों का कहना है कि मुनि संघ की सेवा करना उनके लिए सौभाग्य की बात है और वे सुनिश्चित कर रहे हैं कि कि बाहर से आने वाले किसी भी श्रद्धालु या व्रती को असुविधा न हो।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
