आहार दान देने से जीव श्री आदिनाथ ओर श्री शांति नाथ भगवान बने चार दान में आहार दान श्रेष्ठ है शरीर से राग द्वेष मोह ममत्व का त्याग करना चाहिए । आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

धर्म

आहार दान देने से जीव श्री आदिनाथ ओर श्री शांति नाथ भगवान बने चार दान में आहार दान श्रेष्ठ है शरीर से राग द्वेष मोह ममत्व का त्याग करना चाहिए । आचार्य श्री वर्धमान सागर जी

सीकर

10 दिन से धर्म की पाठशाला में 10 धर्म की बात आप सुन रहे हैं त्याग को जीवन में अपनाना चाहिए जिस प्रकार चावल का छिलका हटाने पर ही चावल भोजन के काम में लिया जाता है उसी प्रकार आत्मा पर लगे राग द्वेष रूपी छिलका हटाना जरूरी है शरीर से ममत्व त्याग करें। समुद्र का पानी बादल बनता है ,बादल वर्षा करते हैं वृक्ष फलों का त्याग करते हैं इस प्रकार आपको इनसे प्रेरणा लेना चाहिए। क्रोध ,मान माया ,लोभ कषाय का त्याग करने के उपदेश सुन रहे है । दान और त्याग में अंतर है दान चार प्रकार से दिया जाता है। आहार दान, अभय दान औषधि दान और अभय दान दिया जाता हैं।इनके फल लाभ भी आपने अभी श्रवण किये । आपके नगर में देव शास्त्र गुरुओं का बड़ा चिकित्सालय आया हैं संत उपदेश समागम रूपी उपचार का पालन करने से राग द्वेष मोह ममत्व का इलाज से कर्मों की निर्जरा पुण्य रूपी लाभ मिलता हैं यह मंगल देशना राजकीय अतिथि आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने दश लक्षण महा पर्व पर उत्तम त्यागधर्म की विवेचना आचार्य धर्म सागर सभागृह दंग की नसिया सीकर में प्रगट की। डॉ राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री ने आगे बताया कि त्याग से शान्ति, धन वैभव, यश बढ़ता है अनेक उदाहरण बाहुबली , भरत के उदाहरण से बताया कि इन्होंने भी भौतिक वैभव का त्याग कर संयम धारण कर मोक्ष सुख प्राप्त किया। आचार्य श्री के प्रवचन के पूर्व युवा आर्यिका श्री महायश मति ने त्याग धर्म प्रवचन में बताया कि सीकर जैन समाज के सैकड़ों पुरुष महिला में एकासना ओर 14 वर्ष की उम्र के बच्चे भी उपवास कर रहे हैं यह आगे भी शुद्ध भोजन की परंपरा जारी रखना चाहिए। हाथ से गिरना त्याग नहीं मन से दिया दान त्याग है ।आजकल रसोई घर की अशुद्धता ठीक नहीं है आहार दान सबसे बड़ा दान है पूर्व पर्याय में आहार दान देने से वह जीव आदिनाथ ओर शांतिनाथ भगवान बने। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी ने 18 वर्ष की उम्र में गृह त्याग कर 19 वर्ष की आयु में दीक्षा ली। 10 दिन के लिए जैन नहीं धर्म अनुसार जैन बने। प्रतिदिन बोली के माध्यम से नियत धार्मिक क्रिया के पुण्यार्जक दीप प्रवज्जलन, आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन कर जिनवाणी भेंट करते है शाम को श्री जी ओर आचार्य श्री की आरती के बाद धार्मिक प्रतियोगिता होती है।

राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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