चुहा जैसा अपना बिल नही झोडता वैसे ही हमें अपना देश नहीं छोड़ना सुधासागर महाराज

धर्म

चुहा जैसा अपना बिल नही झोडता वैसे ही हमें अपना देश नहीं छोड़ना सुधासागर महाराज
अभिनंदनोदय तीर्थक्षैत्र ललितपुर
निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव जैन धर्म की ध्वजा108 श्री सुधासागर जी महाराज ने प्रवचन मे कहा


चुहा जैसे अपना बिल नही झोडता वैसे ही हमें अपना देश नहीं छोड़ना,है उन्होंने कहा.लालच-भारत देश की कमजोरी है कि वह लालची होते हैं। भारत का दिमाग बहुत है। हम विदेश में अपना दिमाग दे रहे है।उन्हें सम्पन्नता की और ले जा रहे हैं। वह जो कुछ थोडे लालच में देश छोड देते हैं।

उन्होनें उदाहरण देते हुए कहा की भारत के राजा बनने के चक्कर मे कलकत्ता के नवाब ने अपने सैनिको को आदेश नही देकर अपने कोगुलाम बना दिया।.

 

 

ख्याति के विषय मे बोलते हुए उन्होंने कहा की यह वह है जो जो एक दिन मे अमीर बना देती है एक रात में गरीब बना देती एक जगह स्थिर नही रहती हैं। उन्होंने कहा -जो व्यक्ति जिंदा होता है तब तक उसका पुण्य से सब कुछ होता है जैसे वह गया पुण्य खत्म, चक्रवर्ती,तीर्थंकर आदि जब तक रहते हैं तब तक पुण्य रहता है वो गया तब तक पुण्य समाप्त होता है।

 

उन्होंने बताया जब चक्रवर्ती ने जैसे ही दीक्षा ली नव निधियां, 32 हजार मुकुट बद्ध राजा सब विपरीत हो गयें,

अपनी औकात देखो
उन्होंने कहा दुनिया में अपनी औकात देखो सब कुछ पुण्य से चलता है, पिता नरक बेटा मोक्ष जा रहा है।.

-प्रकृति ने कुछ ऐसे नियम बनाया कि कोई व्यक्ति कमजोर होगा तो बलजोर उसका सहयोग करेगा। पहले बहुत मां के संतान होती थी उसका बहुत बड़ा कारण ये ही में देवों में संख्या निश्चित है भोग भूमि मे निश्चित हैं कर्म भूमि में मनुष्यों की संख्या की घटा बडी होती रहती हैं।
अभिषेक जैन लुहाडिया रामगंजमंडी

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