जैन धर्म का पर्यूषण का पांचवां दिवस उत्तम सत्य धर्म*

धर्म

*जैन धर्म का पर्यूषण का पांचवां दिवस उत्तम सत्य धर्म*

धामनोद/

 

/ दिगंबर जैन समाज का पर्व पर्यूषण पूरे विश्व भर में बड़े ही भक्ति और धूम धाम से मनाया जा रहा है जहां तप,त्याग, दान ,संयम,ब्रह्मचर्य आदि वृत्तों का पालन किया जा रहा है और उपवास, एकाशन और एक से अधिक उपवास की तपस्या भी जोरो शोरो से परम पूज्य गुरुदेव चतुर्थ पट्टाचार्य आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज की शिष्या आर्यिका सुप्रज्ञ मति माताजी, अनघ मति माताजी,क्षुल्लिका संभाव मति माताजी के सानिध्य में चल रही है आज प्रातः भगवान के अभिषेक और शांतिधारा पूज्य माताजी के मुखारविन्द से संपन्न हुई तत्पश्चात पूज्य माताजी की मधुर वाणी और मंत्रोच्चार के बीच नित्य नियम ,तीर्थंकर भगवंत ,सोलह कारण, पंच मेरु,दस लक्षण विधान,उत्तम सत्य धर्म की पूजन सम्पन्न हुई,माताजी ने धर्म सभा को संबोधित करते हुए कहा कि “वचन रसायन वचन धन वचन की औषधि होय वचन ही से बंधन कटे वचन से ही मुक्ति होय ।

 

 

मनुष्य को हमेशा हित , मीत,प्रीत,वचन बोलना चाहिए याने जिससे किसी का हित हो और मीठे प्यार भरे ,वात्सल्य भरे शब्द बोलना चाहिए और ऐसा सच भी नहीं बोलना चाहिए कि जिससे किसी का अहित हो जाए ,।

आपकी भाषा,आपका व्यवहार, आपका बोलने का तरीका समझ आता है कि आपके परिवार आपके संस्कार बता देता है कि कैसा है और किसी के प्राण जाते हो तब भी ऐसा सच भी ना बोलना चाहिए ,हितकारी वचन बोलना चाहिए एक मुनिराज का दृष्टांत बताया कि एक मुनिराज सामयिक कर रहे थे उस समय एक गाय भागते हुए निकली और वैसे जैसे ही खड़े हुए एक शिकारी भागता हुआ आया और उसने मुनिराज से पूछा कि इधर से कोई गाय भागते हुए गई क्या मुनिराज ने शिकारी को देखते हुए बोला कि में जब से खड़ा हुआ हु तब से कोई गाय इधर से नहीं निकली ,मुनि राज ने अपने सत्य धर्म का पालन किया और गाय को भी कटने से बचा लिया मुनिराज ने झूठ भी नहीं बोला क्योंकि उन्होंने बोला कि में जबसे खड़ा हुआ हु तब से कोई गाय नहीं निकली जबकि गाय तब निकली थी जब मुनिराज शिला पर बैठे हुए थे और मुनिराज सत्य धर्म का पालन करते है ,और जिनवाणी जो कहती है वो सत्य कहती है धर्म के लिए गाय और बछड़े जैसा वात्सल्य होना चाहिए,साधु के साथ ही साधर्मी जन का भी वात्सल्य होना चाहिए केवल ऊपर की शांति धर्म नहीं है भीतर की शांति चाहिए इसलिए हमेशा सत्य धर्म का पालन करना चाहिए ,

जिनवाणी कहती है कि आधोलोक,ऊर्ध्व लाेक,मध्य लोक में अनेकों मूर्तियां और अनेकों चैत्यालय है उसे आपको स्वीकार करना पड़ेगा, इस वर्ष तपस्या करने वालो में विशेष रूप से डॉक्टर नीलेश वोहरा,अदिति गौरव जैन,स्वाति राजेश गोधा द्वारा तीन,पांच और दस उपवास की तपस्या चल रही है समाज जन उनके लिए भजन विनती द्वारा अनुमोदना कर रहे है और उनकी सुख साता की कामना कर रहे है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *