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उत्तम सत्य धर्म के दिन सुखोदय तीर्थ नसियाजी में सम्मेद शिखर विधान का आयोजन
राजस्थान /नौगामा, बांसवाड़ा

दशलक्षण महापर्व के उत्तम सत्य धर्म के दिन प्रातः आदिनाथ मंदिर एवं 1008 भगवान महावीर समवशरण मंदिर में विशेष अभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन हुआ। इसके पश्चात भगवान की प्रतिमा को पंडाल में विराजमान करने का सौभाग्य पंचोली जितेंद्र केसरीमल को प्राप्त हुआ। गीतकार राजेंद्र जैन एवं विधानाचार्य रमेश चंद्र गांधी, सांगानेर तथा संस्थान से पधारे अभिषेक शास्त्री के सानिध्य में 10 लक्षण पूजन, सरस्वती पूजन एवं देव-शास्त्र-गुरु पूजन बड़े ही भक्तिभाव के साथ किया गया।
श्रद्धालुओं ने गरबा नृत्य करते हुए भक्ति भाव से पूजन के अर्घ्य समर्पित किए। पूजन के पश्चात बालिका मंडल द्वारा तत्त्वार्थ सूत्र का वाचन किया गया। दोपहर में गाजे-बाजे के साथ 1008 भगवान आदिनाथ की प्रतिमा की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो विशाल जनसमूह के साथ सुखोदय तीर्थ नसियाजी पहुंची। यहां भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा के समक्ष नानावटी राहुल लक्ष्मीलाल द्वारा भगवान आदिनाथ की प्रतिमा विराजमान की गई। इस अवसर पर श्रद्धालुओं द्वारा भक्तिभावपूर्वक अभिषेक एवं शांतिधारा की गई। अभिषेक का प्रथम सौभाग्य पंचोली केशरीमल शांतिलाल परिवार तथा द्वितीय बोली का सौभाग्य नानावटी राहुल लक्ष्मीलाल परिवार को प्राप्त हुआ। भगवान मुनिसुव्रतनाथ की प्रतिमा विराजमान होने के बाद पहली बार इस स्थल पर सम्मेद शिखर विधान एवं अभिषेक-शांतिधारा का आयोजन किया जा रहा है। सम्मेद शिखर विधान के पुण्यार्जक बनने का सौभाग्य पंचोरी शांतिलाल को प्राप्त हुआ। विधान एवं पूजन के पश्चात नसियाजी स्थित 24 टोंक, सात गुफाएं, मुख्य मंदिर, मानस्तंभ एवं भगवान महावीर स्वामी की प्रतिमा के समक्ष बोली के माध्यम से अर्घ्य समर्पित किए गए। शाम को प्रतिक्रमण के पश्चात मंदिर में महाआरती का आयोजन हुआ। इसके बाद उत्तम सत्य धर्म के महत्व पर मार्मिक प्रवचन हुआ, जिसमें सत्य को जीवन में अपनाने तथा मन, वचन और कर्म में सत्यता बनाए रखने का संदेश दिया गया। इस अवसर पर जैन समाज अध्यक्ष विपुल पंचोली ने सभी श्रद्धालुओं एवं आयोजन में सहयोग करने वाले सदस्यों का आभार प्रकट किया।
