सादर जय जिनेंद्र
कल 31 अगस्त2022 से 9 september 2022 तक जैनों का महाकुम्भ अर्थात् दसलक्षण महापर्व प्रारम्भ होने जा रहे है।
वैसे तो ये धर्म केवल दस दिवसीय ही नहीं होते बल्कि *धर्म तो नित्य शरणभूत होते है।
विश्व के सभी धर्म के धार्मिक आयोजनों पर अवकाश की व्यवस्था होती ही है पर हमारे दसलक्षण पर्व पर इतने अवकाश प्राप्त नहीं हो पाते और आज गृहस्थ के लिए अपने सांसारिक कार्य सर्वप्रथम है फिर भी इस भावना से यह संदेश आपके बीच में भेज रहा हूँ कि *आपके व्यस्ततम जीवन से कुछ पल धर्म के नाम अवश्य निकालें क्योंकि जीवन मे आज जो आपको सुख वैभव प्राप्त है वो सब पुण्ययोग से है और धर्म के क्षेत्र में यह पुण्ययोग तिनके के समान है क्योंकि धर्म तो आपको अनन्त सुख दिला सकता है।*
इसलिए कम से कम धर्म के मर्म को समझते हुए और जीवन मे धर्म की महत्ता को समझते हुए आप सभी से यह अनुरोध करता हूँ कि आप अपने इस लौकिक जीवन से कुछ क्षण धर्म के नाम करके इस वर्ष के दसलक्षण पर्व को यादगार बनाएं।
प्रातः अभिषेक शांतिधारा अवश्य करें
रात्रि में चारों प्रकार के आहार का त्याग अवश्य करें।
संध्याकाल में आलोचना पाठ अवश्य पढ़ें एवं दस दिन तक पूर्ण ब्रह्मचर्य सहित जिनवाणी का रसपान करें।नोट:-आपके सभी बच्चों को जो 8 वर्ष से ऊपर के है उन्हें अभिषेक करने अवश्य भेजे जिन बच्चों के exam है उन्हें प्रातःकाल जल्दी भेजकर भगवान के पाँव छूकर ही school भेजिए*
आप स्कूल से 15 मिनट लेट भेजने की अनुमति ले ही सकते है।(कुछ वर्ष पहले तो 10 दिन school ही नहीं जाते थे)
क्योंकि अभी दिए गए संस्कार ही* उनका भविष्य निर्धारित करते है।
अगर अभी वह मंदिर जाना नहीं सीखा तो बुढ़ापे में आपको कैसे ले जाएगा।आशा है आप इस पर चिंतन जरूर करेगे
प्रशांत जैन आचार्य
रामगंजमंडी
