पापी को सुधारना है तो उसके दुर्गुण मत देखिए, उसे सत्संगति का अवसर दीजिए : मुनि पुंगव सुधासागर महाराज

धर्म

पापी को सुधारना है तो उसके दुर्गुण मत देखिए, उसे सत्संगति का अवसर दीजिए : मुनि पुंगव सुधासागर महाराज

इंदौर।

“पापी और अपराधी रात को जागते हैं। यदि किसी पापी के जीवन में सुधार लाना है तो उसके दुर्गुणों को मत देखिए, उसके पुराने कर्मों की कलई मत खोलिए। उसे अच्छे लोगों की संगति और संतों का सान्निध्य मिलने दीजिए, उसका जीवन स्वयं बदलने लगेगा।”

 

यह प्रेरणादायी संदेश निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर महाराज ने इंदौर के दलाल बाग मैदान में आयोजित अखिल भारतीय श्रावक संस्कार शिविर की विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए दिया।

 

मुनि श्री ने कहा कि किसी व्यक्ति ने पूर्व में क्या-क्या गलतियां कीं, कितने पाप किए, उसके मन में कैसी दुर्भावनाएं हैं—इन बातों को बार-बार सामने लाकर उसे सुधारने का प्रयास नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब व्यक्ति सत्संगति में आएगा, संतों का सान्निध्य प्राप्त करेगा और अच्छे वातावरण में रहेगा तो उसके भीतर का परिवर्तन धीरे-धीरे स्वयं होने लगेगा।

 

उन्होंने कहा कि कई बार व्यक्ति भीतर से अपने ही कर्मों को लेकर टूट रहा होता है। वह सोचता है कि “मेरा मन बहुत पापी है, मेरा मन बहुत गंदा है।” ऐसे व्यक्ति को और अधिक अपराधबोध देने के बजाय उसे संभालने और सही दिशा दिखाने की जरूरत है। सत्संगति वह शक्ति है, जो भटके हुए जीवन को भी सही मार्ग पर ला सकती है।

 

अच्छे दिनों में सभी साथ, बुरे समय में असली साथ का पता चलता है

 

मुनि श्री सुधासागर महाराज ने कहा कि “अच्छे दिन में सब साथी होते हैं, लेकिन बुरे दिन में कोई साथ नहीं देता।” उन्होंने एक घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि राजस्थान से एक व्यक्ति उनके पास आया और गुटखा-तंबाकू को लेकर चर्चा करने लगा। मुनि श्री ने उसे समझाया, लेकिन उसने बात को गंभीरता से नहीं लिया।

 

कुछ समय बाद उसके पिता आए और बोले कि महाराज जी, उस लड़के को बचा लीजिए। डॉक्टरों ने भी जवाब दे दिया था। तब मुनि श्री ने कहा कि जब समय विकट था, तब बात मान लेते तो स्थिति अलग होती, लेकिन समय निकल जाने के बाद कुछ करना संभव नहीं रहता।

 

उन्होंने कहा कि गुटखा और तंबाकू के खिलाफ जनजागरण अभियान चलाना जरूरी है। यदि आपके प्रयास से एक व्यक्ति की भी जिंदगी बच जाती है तो आपका पुरुषार्थ सार्थक हो जाएगा।

 

पुरुषार्थ और तपस्या से जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करें

 

मुनि श्री ने कहा कि श्रमण संस्कृति में पुरुषार्थ को प्रधानता दी गई है। साधना, तपस्या और सतत प्रयास के माध्यम से जीवन के लक्ष्य को प्राप्त करने का मार्ग बताया गया है। उन्होंने कहा कि यदि हमारी संस्कृति, संस्कार और भगवान के प्रति आस्था सच्ची है तो कोई भी शक्ति हमें जीवन के सही मार्ग से विचलित नहीं कर सकती।

 

उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति रास्ते से भटक भी गया है तो उसके सुधार की चिंता करनी चाहिए। “आगे बढ़ने वालों के साथ-साथ पीछे छूट रहे लोगों की भी चिंता करो।”

 

सुख-सुविधाओं के साथ जरूरतमंदों की भी चिंता करें

 

मुनि श्री ने समाज के समर्थ वर्ग से आह्वान किया कि जीवन में मिली सुख-सुविधाओं को केवल अपने और अपने परिवार तक सीमित न रखें। उन्होंने कहा कि समाज में गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों के लिए भी कुछ करना चाहिए।

 

उन्होंने कहा कि अपने और अपनों का पालन-पोषण तो संसार का प्रत्येक व्यक्ति करता है, लेकिन असहाय की सहायता करना, गरीब की मदद करना और जरूरतमंद के जीवन में सहारा बनना ही सच्चे धर्म और दया की पहचान है।

 

16 हजार दीपों से जगमगाएगा धूप दशमी का अवसर

 

इस अवसर पर सामाजिक संसद के कार्याध्यक्ष नवीन गोधा ने कहा कि परम पूज्य निर्यापक श्रमण मुनि पुंगव श्री सुधासागर महाराज ससंघ के सान्निध्य में धूप दशमी का दिन ऐतिहासिक बनने जा रहा है।

 

उन्होंने बताया कि श्रावक संस्कार शिविर में सभी श्रद्धालु एक साथ 16 हजार दीपों से महाआरती करेंगे। महाआरती के प्रमुख पात्रों का चयन प्रधान प्रतिष्ठाचार्य प्रदीप भैया जी द्वारा श्रद्धालुओं के मध्य किया जाएगा।

 

संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312



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