*क्षणभर का मजा, जीवनभर की सजा—क्षणिक सुख से बचें : आचार्य श्री सुनील सागरजी*
*साधु-साध्वियों का केशलोंच संपन्न, संयम और वैराग्य का दिया संदेश*
इंदौर।
नेमीनगर जैन कॉलोनी में चातुर्मासरत आचार्य श्री 108 सुनील सागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में जीवन की क्षणभंगुर इच्छाओं और उनके दूरगामी परिणामों के प्रति सचेत करते हुए कहा कि “एक मिनट की रील का सुख सदियों का बंधन ला सकता है।” उन्होंने कहा कि जीवन में शॉर्टकट का रास्ता अक्सर दलदल की ओर ले जाता है। जिस प्रकार नाव में छोटा-सा छेद भी उसे डुबो सकता है, उसी प्रकार संसार की प्रत्येक आसक्ति जीव को मोक्षमार्ग से दूर कर सकती है।
आचार्य श्री ने कहा कि “क्षणभर का मजा, जीवनभर की सजा” बन सकता है। मनुष्य कई बार एक क्षण के आवेश, क्रोध अथवा आकर्षण में ऐसा निर्णय ले लेता है, जिसका परिणाम उसे लंबे समय तक भुगतना पड़ता है। क्षणिक क्रोध में किया गया अपराध पूरे जीवन को कठिनाइयों से भर सकता है। इसलिए किसी भी परिस्थिति में विवेक खोकर निर्णय नहीं लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संसार में मिलने वाला सुख स्थायी नहीं है। मनुष्य को क्षणिक सुख के पीछे भागने के बजाय अपने जीवन के वास्तविक लक्ष्य अर्थात् आत्मकल्याण और मोक्षमार्ग की ओर बढ़ना चाहिए। आसक्ति जितनी बढ़ती जाती है, आत्मा का कल्याणमार्ग उतना ही दूर होता जाता है।
इस अवसर पर मुनि श्री संविज्ञ सागरजी महाराज, मुनि श्री सम्प्रभ सागरजी महाराज, मुनि श्री संपूज्य सागरजी महाराज, मुनि श्री सुविवेक सागरजी महाराज, आर्यिका सुस्वरमति माताजी, आर्यिका संबलमती माताजी एवं आर्यिका सुलेखमति माताजी का केशलोंच संपन्न हुआ। साधु-साध्वियों के इस संयममय अनुष्ठान के अवसर पर श्रद्धालुओं ने भक्तिभावपूर्वक उपस्थित होकर धर्मलाभ लिया।
आचार्य श्री के प्रवचन ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को यह संदेश दिया कि क्षणिक आकर्षण और सुख के लिए ऐसा कोई कदम न उठाएं, जो जीवनभर का बंधन बन जाए। विवेक, संयम और धर्म का मार्ग ही जीवन को सार्थक दिशा प्रदान करता है।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312


