इंटेक एवं महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने उपवन संरक्षक से की मुलाकात शेरगढ़ अभ्यारण्य में अब होंगे पुरातत्व दर्शन*

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इंटेक एवं महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने उपवन संरक्षक से की मुलाकात शेरगढ़ अभ्यारण्य में अब होंगे पुरातत्व दर्शन*

 

कोटा, 8 सितंबर।

बारां जिले का शेरगढ़ क्षेत्र पिछले कुछ वर्षों से अभ्यारण्य क्षेत्र के रूप में संरक्षित किया जा रहा है। वन विभाग द्वारा क्षेत्र की सीमा में बाउंड्री वॉल का निर्माण कर अवैध कृषि गतिविधियों को नियंत्रित किया जा रहा है, ताकि वन्यजीवों को सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध हो सके।

 

इसी शेरगढ़ क्षेत्र में पुरातत्वविदों द्वारा पूर्व में किए गए सर्वेक्षण के दौरान जैन तीर्थ एवं प्राचीन जैन संस्कृति से जुड़े पुरातात्विक अवशेष प्राप्त हुए हैं। इनके संरक्षण एवं उचित पहचान के लिए इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (INTACH) के साथ श्री भारतवर्षीय दिगम्बर जैन तीर्थ संरक्षिणी महासभा भी आगे आई है। प्रतिनिधियों ने वन विभाग को शेरगढ़ क्षेत्र के इन पुरातात्विक स्थलों के महत्व से अवगत करवाया।

पूर्व में वन विभाग द्वारा चिन्हित स्थानों पर सूचना बोर्ड लगाने के आदेश भी दिए जा चुके हैं, जिन्हें शीघ्र ही अमल में लाया जाएगा।

 

पुरातात्विक स्थलों तक सुगम पहुंच का सुझाव

 

शेरगढ़ में स्थित उन सभी स्थानों, जहां प्राचीन पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं, तक पर्यटकों एवं शोधार्थियों की आसान पहुंच सुनिश्चित करने के उद्देश्य से इंटेक एवं महासभा के प्रतिनिधिमंडल ने उपवन संरक्षक श्री प्रमोद धाकड़ से भेंट की। प्रतिनिधिमंडल ने शेरगढ़ क्षेत्र में पुरातत्व दर्शन को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने तथा इसके लिए आवश्यक वैकल्पिक मार्ग विकसित करने सहित विभिन्न सुझाव विभाग के समक्ष रखे।

 

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए इंटेक कोटा चैप्टर के कन्वीनर निखिलेश सेठी ने बताया कि शेरगढ़ का पूर्व में नाम कोषवर्धन था यहां आज भी लगभग 1500 वर्ष प्राचीन ऐतिहासिक किला मौजूद है। क्षेत्र की पहाड़ियों में कुछ स्थानों पर जैन प्रतिमाएं उकेरी हुई हैं। वहीं पहाड़ी के नीचे स्थित पुरानी जैन बगीची में प्राचीन दिगम्बर साधकों की निशीधिका स्वरूप छतरियां भी विद्यमान हैं।

 

महासभा के केंद्रीय प्रतिनिधि जे.के. जैन एवं हाड़ौती संभाग के महामंत्री राकेश जैन ‘चपलमन’ ने बताया कि इसी क्षेत्र से लगभग 1100 वर्ष पूर्व सांगोद के श्रेष्ठी श्री किशनदास जी मड़िया को स्वप्न दर्शन के माध्यम से जिन प्रतिमा के संकेत प्राप्त हुए थे। यही प्रतिमा आज चांदखेड़ी वाले बाबा के नाम से विश्व प्रसिद्ध है।

 

प्राचीन जैन तीर्थ होने के मिलते हैं संकेत

 

इतिहासविद् डॉ. आर.के. जैन के अनुसार शेरगढ़ में आज भी विभिन्न स्थानों पर प्राचीन जिनालय एवं प्राचीन जिनबिम्ब मिलते हैं। इन अवशेषों से यह आभास होता है कि शेरगढ़ क्षेत्र पूर्व में किसी महत्वपूर्ण प्राचीन जैन तीर्थ का केंद्र रहा होगा।

 

इंटेक सदस्य पी.सी. जैन एवं पीयूष जैन (मवासा) ने कहा कि अभ्यारण्य क्षेत्र में मौजूद सभी पुरातात्विक महत्व के बिंदुओं को संरक्षित करने के साथ-साथ उन तक पहुंच के लिए वैकल्पिक मार्ग विकसित किए जाने चाहिए। इससे अभ्यारण्य में आने वाले पर्यटक वन भ्रमण के साथ-साथ क्षेत्र की समृद्ध पुरातात्विक एवं जैन विरासत का भी दर्शन कर सकेंगे।

 

इंजीनियर अशोक सुरलाया सहित उपस्थित प्रतिनिधिमंडल की मांगों एवं सुझावों को सुनने के बाद उपवन संरक्षक श्री प्रमोद धाकड़ ने आश्वस्त किया कि वन विभाग की ओर से प्रतिनिधिमंडल के निवेदन पत्र पर शीघ्र ही आवश्यक प्रतिक्रिया एवं कार्रवाई की जाएगी।

 

 

राकेश जैन ‘चपलमन’ से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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