वार्ड 30 में त्रिकोणीय मुकाबला: कुलवंत गुर्जर ने बिगाड़ा दोनों दलों का जीत का गणित
25 वर्षों तक भाजपा से जुड़े रहे कुलवंत गुर्जर अब निर्दलीय मैदान में, पूर्व पार्षद लोकेश पावेचा और नरेंद्र राठौड़ से सीधा मुकाबला
रामगंजमंडी।
रामगंजमंडी नगर पालिका चुनाव में मतदान से पहले प्रचार का शोर थम गया है। 9 सितंबर को होने वाले मतदान से पहले सोमवार को प्रत्याशियों ने ढोल-नगाड़ों और समर्थकों के साथ अंतिम जनसंपर्क कर मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाई। इसके साथ ही अब चुनावी मैदान में प्रत्याशियों की किस्मत मतदाताओं के हाथ में है।
इन सबके बीच वार्ड संख्या 30 का चुनाव इस बार खासा चर्चा में है। यहां मुकाबला महज दो दलों के बीच नहीं रह गया है, बल्कि निर्दलीय प्रत्याशी कुलवंत गुर्जर के मैदान में उतरने से चुनाव ने त्रिकोणीय रूप ले लिया है।

25 साल भाजपा के साथ, टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय उतरे
कुलवंत गुर्जर लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी से जुड़े रहे हैं और करीब 25 वर्षों तक पार्टी कार्यकर्ता के रूप में सक्रिय भूमिका निभाने की बात कही जाती है। वार्ड 30 के ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित होने के बावजूद भाजपा से टिकट नहीं मिलने के बाद उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया।

उनके इस फैसले ने वार्ड 30 के चुनावी समीकरणों को काफी हद तक बदल दिया है। चुनावी चर्चाओं में अब यह सवाल प्रमुखता से उठ रहा है कि निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कुलवंत गुर्जर कितने मत अपने पक्ष में खींच पाते हैं और इसका सीधा असर भाजपा-कांग्रेस के परंपरागत वोटों के गणित पर कितना पड़ता है।

मैदान में तीन चेहरे, मुकाबला हुआ दिलचस्प
वार्ड संख्या 30 में भारतीय जनता पार्टी की ओर से पूर्व पार्षद लोकेश पावेचा, कांग्रेस की ओर से पूर्व पार्षद नरेंद्र राठौड़ और निर्दलीय प्रत्याशी कुलवंत गुर्जर चुनाव मैदान में हैं।
तीनों प्रत्याशियों का अपना राजनीतिक और सामाजिक आधार है। ऐसे में मतदाताओं का रुख किस ओर जाता है, यह मतदान के बाद ही स्पष्ट होगा।
सामाजिक क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं कुलवंत
कुलवंत गुर्जर का सामाजिक और सार्वजनिक जीवन में भी सक्रिय जुड़ाव रहा है। वे ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष के पद पर कार्य कर चुके हैं। वहीं कॉलोनी में स्थित मंदिर से जुड़ी आनंद धाम विकास समिति में भी उनकी प्रमुख भूमिका बताई जाती है। वार्डवासियों के बीच सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने और जरूरत के समय लोगों के साथ खड़े रहने का मुद्दा भी उनके समर्थकों द्वारा प्रमुखता से उठाया जा रहा है।
किसके पक्ष में जाएगा वार्ड 30 का फैसला?
वार्ड 30 में एक ओर राजनीतिक अनुभव रखने वाले पूर्व पार्षद हैं, तो दूसरी ओर लंबे समय से राजनीति और सामाजिक क्षेत्र में सक्रिय कुलवंत गुर्जर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में अपनी चुनौती पेश कर रहे हैं। कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशी भी अपने-अपने समर्थक आधार के साथ पूरी ताकत झोंक चुके हैं।
यही वजह है कि वार्ड 30 का चुनाव पूरे रामगंजमंडी में चर्चा का विषय बना हुआ है। कुलवंत गुर्जर के निर्दलीय मैदान में उतरने से दोनों प्रमुख दलों के जीत के गणित पर असर पड़ने की चर्चाएं हैं।
हालांकि चुनावी माहौल में चल रही चर्चाएं और जमीनी समीकरण अंतिम परिणाम की गारंटी नहीं होते। असली फैसला 9 सितंबर को मतदाता करेंगे और परिणाम ही बताएगा कि वार्ड 30 में जीत का ताज किसके सिर सजेगा।
फिलहाल इतना जरूर है कि वार्ड 30 में मुकाबला त्रिकोणीय है और यहां हर वोट बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





