धर्म ऐसा करो, जो केवल मंदिर तक सीमित न रहे, तुम्हारी चेतना में उतर जाए : मुनिश्री सुधासागर जी महाराज

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धर्म ऐसा करो, जो केवल मंदिर तक सीमित न रहे, तुम्हारी चेतना में उतर जाए : मुनिश्री सुधासागर जी महाराज

 

‘धर्म को फुर्सत का काम नहीं, जीवन की प्राथमिकता बनाइए’—मुनिश्री ने कहा, भय से नहीं बल्कि स्वभाव बदलकर बुराई छोड़ें

 

इंदौर।

पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव 108 श्री सुधासागर जी महाराज ने गुरुवार को दलाल बाग, छत्रपति नगर में आयोजित धर्मसभा में श्रद्धालुओं को धर्म, संस्कार और आत्मकल्याण का मार्ग बताते हुए प्रेरणास्पद संदेश दिए। मुनिश्री ने कहा कि सच्चा धर्म वही है, जब क्षमा में आनंद मिलने लगे और अहिंसा हमारे स्वभाव का हिस्सा बन जाए।

 

उन्होंने कहा कि धर्म को कभी भी फुर्सत के समय का काम नहीं बनाना चाहिए। बचा हुआ समय धर्म को देने की बजाय धर्म के लिए समय निकालने की भावना होनी चाहिए। इसी प्रकार दान भी बची हुई राशि में से करने की सोच नहीं होनी चाहिए, बल्कि अपनी कमाई में से धर्म और समाज के लिए पहले हिस्सा निकालने की भावना विकसित करनी चाहिए।

 

घर-घर पहुंचे धर्म और संस्कार

 

मुनिश्री ने कहा कि आज आवश्यकता है कि जो लोग अथवा बच्चे मंदिर और पाठशाला तक नहीं पहुंच पाते, उनके घर तक धर्म और संस्कार पहुंचाने का प्रयास किया जाए। धर्म केवल मंदिरों तक सीमित न रहे, बल्कि घर-घर में ठहरे और प्रत्येक घर संस्कारों का मंदिर बने।

 

उन्होंने धर्म के वास्तविक स्वरूप को समझाते हुए कहा कि धर्म को केवल पहचान नहीं, बल्कि आचरण बनाइए। धर्म को फुर्सत का काम नहीं, अपनी प्राथमिकता बनाइए।

 

मुनिश्री ने कहा कि भय के कारण बुराई से दूर रहने की अपेक्षा अपने स्वभाव में परिवर्तन लाकर बुराई को छोड़ना अधिक महत्वपूर्ण है। जब धर्म हमारी चेतना में उतर जाता है, तब जीवन का व्यवहार स्वयं बदलने लगता है।

 

भगवान की पूजा अपने आत्मकल्याण के लिए करें

 

मुनिश्री सुधासागर जी महाराज ने कहा कि भगवान की पूजा भगवान के लिए नहीं, बल्कि अपने आत्मकल्याण के लिए कीजिए। उन्होंने कहा कि संसार में जैन धर्म के भगवान ऐसे भगवान हैं, जिन्हें किसी वस्तु की आवश्यकता नहीं है।

 

उन्होंने भावपूर्ण ढंग से कहा कि “हमारे भगवान भिखारी नहीं, त्रिलोक के नाथ हैं।” इसलिए भगवान की आराधना किसी सांसारिक अपेक्षा के लिए नहीं, बल्कि अपने भीतर शांति, संयम, अहिंसा और आत्मजागृति पैदा करने के लिए होनी चाहिए।

 

मुनिश्री के इन प्रेरणास्पद संदेशों ने धर्मसभा में उपस्थित श्रद्धालुओं को आत्मचिंतन के लिए प्रेरित संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

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