♦संत तरुण सागरजी ने अपने कड़वे प्रवचनों के जरिए जन-जन के जीवन में मिठास घोलने का काम किया: आचार्य प्रसन्न सागरजी
पुष्पगिरी तीर्थ सोनकच्छ
जलेबी खाते एक बालक के कानों में किसी ने कहा-भक्त भी भगवान बन सकता है। यह बात बालक पवन के मन में ऐसी बैठी कि वह जलेबी खाते-खाते घर पहुंचा और मां से बोला-मुझे महाराज के पास ले चलो, मुझे भी भगवान बनना है। मां बालक को लेकर गुरु के पास पहुंची और बोली-महाराज, हमारे मोड़ा को रख लो, इसे भगवान बनना है। पुष्पदंतसागरजी को भी एक योग्य शिष्य की तलाश थी। उन्होंने बालक पवन को अपने पास रख लिया। यही बालक आगे चलकर क्रांतिकारी राष्ट्रसंत मुनि तरुण सागरजी महाराज के रूप में विख्यात हुआ।
यह प्रसंग मंगलवार को पुष्पगिरि तीर्थ पर चातुर्मास प्रवास के दौरान अंतर्मना आचार्य प्रसत्र सागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए बताया गया। उन्होंने कहा कि गुरु पुष्पदंत सागरजी ने एक बीज को वृक्ष बनाया। उसे दिल में जगह दी, सीने से लगाया और एक भक्त को भगवान बनने की राह दिखाई। आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि क्रांतिकारी संत और जन-जन के राष्ट्रसंत मुनि तरुण सागरजी महाराज के अष्टम समाधि दिवस पर वे उन्हें भाव वंदना अर्पित करते हैं। उन्होंने कहा कि विश्व को जैनत्व की पहचान दिलाने वाले संत तरुण सागरजी महाराज ने अपने कड़वे प्रवचनों के माध्यम से
जन-जन के जीवन में मिठास घोलने का काम किया। इसी अवसर पर आचार्य प्रज्ञा सागरजी के जन्मोत्सव पर संघ सहित उन्हें भी नमोस्तु अर्पित किया गया।
प्रवक्ता रोमिल जैन ने बताया कि कार्यक्रम में तरुण सागरजी महाराज के इकलौते शिष्य मुल्लक पर्वसागरजी महाराज ने कहा कि जन-जन के संत तरुण सागरजी महाराज ने जैन साधुओं के प्रति अन्य धर्मों के लोगों में भी आस्था और श्रद्धा जगाई। लोग तरुण सागरजी के नाम से ही जैनियों को पहचानने लगे थे। तरुण प्रभावना फाउंडेशन की ओर से देश के कई स्थानों पर धार्मिक नमोकार मंत्र का पाठ किया गया।
प्रचार प्रसार संयोजक नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
