गुरु सान्निध्य में क्षुल्लक 105 सुलब्धि सागर जी महाराज का उत्कृष्ट समाधिमरण

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गुरु सान्निध्य में क्षुल्लक 105 सुलब्धि सागर जी महाराज का उत्कृष्ट समाधिमरण

आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के संघ में निर्मल परिणामों के साथ पूर्ण हुई सल्लेखना साधना

इंदौर। जैन धर्म की महान आध्यात्मिक परंपरा और आत्मकल्याण की भावना का एक भावपूर्ण प्रसंग मंगलवार, 11 अगस्त 2026 को इंदौर में देखने को मिला। आचार्य 108 श्री सुनील सागर जी महाराज के संघस्थ क्षुल्लक 105 श्री सुलब्धि सागर जी महाराज का मंगलवार शाम 6:45 बजे संपूर्ण आचार्य संघ की पावन उपस्थिति में निर्मल परिणामों के साथ उत्कृष्ट समाधिमरण हुआ।

नेमी नगर जैन कॉलोनी, इंदौर में आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज ससंघ का वर्षावास चल रहा है। इसी पावन अवसर पर इंदौर निवासी श्री नरेंद्र जैन (पथरिया) ने पूज्य गुरुदेव के चरणों में जीवन के अंतिम पड़ाव पर सल्लेखना एवं समाधिमरण की भावना व्यक्त की। परिजनों ने भी उनकी इस धार्मिक भावना में सहमति प्रदान की।

गुरु सान्निध्य में ग्रहण किए क्षुल्लक व्रत

मंगलवार को चतुर्दशी के पावन अवसर पर दोपहर 4 बजे, श्री नरेंद्र जैन की शारीरिक स्थिति को देखते हुए पूज्य गुरुदेव ने उन्हें क्षुल्लक व्रत प्रदान किए तथा 11 प्रतिमा के संस्कार कराए।

लंबे समय से अस्वस्थता से जूझ रहे श्री नरेंद्र जैन को गुरु सान्निध्य और मार्गदर्शन मिलने के बाद उनके परिणामों में शांति, सहजता और धर्म के प्रति विशेष अनुराग दिखाई देने लगा। जीवन के अंतिम समय में विशाल संत संघ का सान्निध्य और आचार्य भगवंत का प्रत्यक्ष मार्गदर्शन मिलना उनके लिए अत्यंत पुण्य और सौभाग्य का विषय रहा।

‘सुलब्धि सागर’ नाम बना धर्मलाभ और आत्मकल्याण का प्रतीक

उनके निर्मल भावों और धार्मिक भावना को देखते हुए आचार्य भगवंत ने उन्हें क्षुल्लक 105 ‘सुलब्धि सागर’ नाम प्रदान किया।

‘लब्धि’ का अर्थ है—प्राप्ति। अर्थात जीवन में दुर्लभ अवसर और धर्मलाभ प्राप्त करने वाला। गुरु चरणों में प्राप्त यह नाम उनके लिए धर्म, संयम, वैराग्य और आत्मकल्याण की भावना का प्रतीक बन गया।

पूज्य आचार्य भगवंत के मार्गदर्शन में क्षुल्लक श्री सुलब्धि सागर जी महाराज ने जीवन के अंतिम पड़ाव को धर्म, संयम, वैराग्य और समता भाव के साथ स्वीकार करते हुए सल्लेखना का संकल्प ग्रहण किया।

जैन दर्शन में सल्लेखना को जीवन के अंतिम समय में कषायों की शांति, देह के प्रति आसक्ति के क्षय और आत्मकल्याण की भावना से जुड़ी साधना के रूप में देखा जाता है। गुरु सान्निध्य में उनका समाधिमरण इसी आध्यात्मिक भावना का प्रेरणादायी प्रसंग बना।

12 अगस्त को निकलेगी अंतिम डोला यात्रा

क्षुल्लक श्री सुलब्धि सागर जी महाराज की अंतिम डोला यात्रा बुधवार, 12 अगस्त 2026 को प्रातः 7 बजे नेमी नगर (जैन कॉलोनी) स्थित नेमीनाथ देशना मंडप से प्रारंभ होगी।

यात्रा आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी उद्यान, नेमी नगर के लिए प्रस्थान करेगी। यहां विधि-विधान एवं धार्मिक परंपराओं के अनुसार अंतिम क्रियाएं संपन्न की जाएंगी, जिसके पश्चात उनकी देह पंचतत्व में विलीन होगी।

गुरु सान्निध्य में प्राप्त यह समाधिमरण जैन समाज के लिए धर्म, संयम, वैराग्य और आत्मकल्याण की प्रेरणा देने वाला भावपूर्ण प्रसंग बन गया।

संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी

मो.: 9929747312

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