गृहस्थ जीवन का त्याग कर जैनेश्वरी दीक्षा लेंगी कोठियां की शकुंतला सेठी, 19 अगस्त को सीकर में होगा दीक्षा समारोह
वर्षों की धर्म-साधना के बाद संयम पथ पर बढ़ाया कदम; 2003 में ग्रहण की थी पंचम प्रतिमा, 2010 में लिया ब्रह्मचर्य व्रत
कोठियां।
दिगंबर जैन समाज के लिए यह गौरव, त्याग और आध्यात्मिक प्रेरणा का अवसर है। कोठियां निवासी शकुंतला सेठी, पत्नी अशोक कुमार सेठी, अब गृहस्थ जीवन का त्याग कर जैनेश्वरी दीक्षा ग्रहण करने जा रही हैं। आगामी 19 अगस्त 2026 को सीकर (राजस्थान) में पंचम पट्टाचार्य वात्सल्यवारिधि आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज के सान्निध्य में उनका दीक्षा समारोह संपन्न होगा।
वर्षों तक गृहस्थ जीवन के दायित्वों का निर्वहन करने के साथ धर्म, साधना और संयम की दिशा में निरंतर आगे बढ़ती रहीं शकुंतला सेठी का यह निर्णय त्याग, वैराग्य और आत्मकल्याण की भावना का प्रेरणादायी उदाहरण माना जा रहा है। उनके दीक्षा निर्णय से परिवार और समाज में आध्यात्मिक उत्साह का वातावरण है।
बचपन से धर्म और साधना की ओर रहा झुकाव

शकुंतला सेठी का जन्म 2 फरवरी 1969 को सेवा, दूदू, जयपुर में हुआ। उनके पिता स्वर्गीय मदनलाल बड़जात्या और माता प्रेमदेवी बड़जात्या हैं। उन्होंने 12वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की।
उनका विवाह कोठियां निवासी अशोक कुमार सेठी के साथ हुआ। परिवार में पुत्र आशुतोष सेठी और पुत्री समता सहित अन्य सदस्य हैं। गृहस्थ जीवन के बीच रहते हुए भी शकुंतला सेठी का झुकाव प्रारंभ से ही धर्म, साधना और आध्यात्मिक जीवन की ओर रहा।
2003 में पंचम प्रतिमा, 2010 में ब्रह्मचर्य व्रत
शकुंतला सेठी ने अपनी आध्यात्मिक यात्रा को क्रमशः आगे बढ़ाया। वर्ष 2003 में उन्होंने पंचम प्रतिमा ग्रहण की। इसके बाद उनकी धार्मिक साधना निरंतर आगे बढ़ती रही।
वर्ष 2010 में उन्होंने ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया। वर्षों तक संयम, धर्म और साधना के मार्ग पर चलते हुए अब उन्होंने अपने जीवन को पूर्ण रूप से आत्मकल्याण और संयम की दिशा में समर्पित करने का निर्णय लिया है।
19 अगस्त 2026 को सीकर में होने वाली जैनेश्वरी दीक्षा उनके जीवन में एक नए आध्यात्मिक अध्याय का शुभारंभ करेगी।
परिवार में पहले भी रही है संतत्व की परंपरा
शकुंतला सेठी की दीक्षा का महत्व इसलिए भी विशेष है क्योंकि उनके परिवार में पहले भी संतत्व की परंपरा रही है। उनके चाचा-ससुर नमित सागर महाराज ने वर्ष 1999 में जयपुर में आचार्य वर्धमान सागर महाराज के सान्निध्य में मुनि दीक्षा ग्रहण की थी।
अब उसी परिवार से शकुंतला सेठी का भी सांसारिक जीवन का त्याग कर जैनेश्वरी दीक्षा की ओर बढ़ना समाज के लिए विशेष आध्यात्मिक प्रसंग बन गया है।
त्याग और संयम की ओर बढ़ा प्रेरणादायी कदम
गृहस्थ जीवन के दायित्वों को पूरा करने के बाद संयम के मार्ग को अपनाना निश्चित रूप से दृढ़ संकल्प और वैराग्य का परिचायक है। शकुंतला सेठी का दीक्षा निर्णय समाज में धर्म, त्याग, तप और आत्मकल्याण की भावना को प्रेरित करने वाला है।
सीकर में 19 अगस्त को होने वाला दीक्षा समारोह उनके जीवन की वर्षों से चली आ रही साधना को एक नई दिशा प्रदान करेगा और दिगंबर जैन समाज के लिए यह अवसर श्रद्धा एवं आध्यात्मिक उल्लास का केंद्र बनेगा।
राजेश पंचोलिया, इंदौर से प्राप्त जानकारी।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी। 9929747312
