पूज्य मुनिश्री सुधासागर महाराज ने कहा “बहू ऐसी बने कि सास उसकी मां की प्रशंसा करे और बेटी ऐसी बने कि पीहर में सास की तारीफ करे”—जयपुर के नवविवाहित नमन जैन आशिका जैन ने परिवार सहित गुरुदेव के चरणों में लिया मंगल आशीर्वाद, गृहस्थ जीवन में नियम-संयम का लिया संकल्प

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पूज्य मुनिश्री सुधासागर महाराज ने कहा “बहू ऐसी बने कि सास उसकी मां की प्रशंसा करे और बेटी ऐसी बने कि पीहर में सास की तारीफ करे”—

जयपुर के नवविवाहित नमन जैन आशिका जैन ने परिवार सहित गुरुदेव के चरणों में लिया मंगल आशीर्वाद, गृहस्थ जीवन में नियम-संयम का लिया संकल्प

इंदौर/जयपुर।

 

 जगत पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिश्री 108 सुधासागर महाराज की संयम साधना और उनका वात्सल्यपूर्ण आशीर्वाद पंचम काल में किसी आश्चर्य से कम नहीं है। गुरुदेव की युवा पीढ़ी पर विशेष कृपा और मार्गदर्शन का भाव उनके सान्निध्य में निरंतर देखने को मिलता है। ऐसा ही भावुक और श्रद्धामय दृश्य सोमवार को इंदौर के दलाल बाग में देखने को मिला।

जयपुर निवासी नवविवाहित नमन जैन एवं आशिका जैन ने अपने माता-पिता एवं सास-ससुर दीपक जैन एवं रीना जैन (सी-स्कीम, जयपुर) तथा रामगंजमंडी निवासी अपने मामा-मामी अजय- सुनीता सावला के साथ गुरुदेव के चरणों में पहुंचकर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।

    विशेष बात 

विशेष बात यह रही कि नमन और आशिका ने विवाह से पूर्व भी गुरुदेव के चरणों में पहुंचकर आशीर्वाद लिया था। गुरुदेव की मंगल कृपा से उनका विवाह निर्विघ्न संपन्न हुआ। नवदंपती ने गृहस्थ जीवन में धर्म, नियम और संयम के साथ जीवन जीने का संकल्प भी लिया।

 

 

 

गुरु चरणों की रज मस्तक पर लगाते ही भावुक हुआ पूरा परिवार

गुरुदेव के प्रति कृतज्ञता प्रकट करते हुए परिवार ने विशेष थाल सजाकर गुरुदेव का पूजन किया और अर्घ्य समर्पित किया। इसके पश्चात पूरे परिवार ने गुरु चरणों में नमन करते हुए चरणों की रज को मस्तक पर लगाया।

जैसे ही गुरुदेव ने अपनी मयूर पिच्छिका से नवदंपती सहित पूरे परिवार को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया, वातावरण भाव-विभोर हो उठा। परिवार के सदस्यों की आंखों में श्रद्धा और भावुकता स्पष्ट दिखाई दी।

इस भाव को मानो ये पंक्तियां साकार कर रही थीं—

“गुरु तेरे चरणों में सर झुका लिया है,

जमीं पर खड़े होकर आसमां को पा लिया है।”

 

राजस्थानी परिधान में पहुंची आशिका, गुरुदेव से पूछी गृहस्थ जीवन की राह

 

संध्या बेला में नवविवाहिता आशिका जैन राजस्थान की पारंपरिक वेशभूषा में गुरुदेव के समक्ष उपस्थित हुईं और अपनी जिज्ञासा रखी।

इस दौरान कार्यक्रम के संचालक ने आशिका और उनके साथ आए समूह का स्वागत करते हुए कहा कि “यह इंदौर की धर्मधरा है और यहां आपका आना हम सभी गुरु भक्तों के लिए सौभाग्य का विषय है।” उन्होंने राजस्थान की परंपरा के अनुरूप आशिका की वेशभूषा की भी सराहना की और कहा कि उनके पारंपरिक परिधान के लिए जोरदार तालियां होनी चाहिए।

 

इसके बाद आशिका एवं उनके साथ आए समूह ने गुरुदेव के चरणों में नमोस्तु करते हुए अपनी जिज्ञासा रखी।

आशिका ने पूछा—

“महाराज जी, अभी-अभी मेरी शादी हुई है। मैं धर्म के क्षेत्र में आगे कैसे बढ़ूं? कृपया मेरी इस जिज्ञासा का समाधान करें।”

“सास बहू की मां की प्रशंसा करे और बहू सास की—यही नारी जीवन के कल्याण का सूत्र”

गुरुदेव सुधासागर महाराज ने नवविवाहिता के प्रश्न का समाधान करते हुए गृहस्थ जीवन में आने वाली जिम्मेदारियों और रिश्तों की गरिमा को समझाया।

उन्होंने कहा कि विवाह के बाद बेटी अपने माता-पिता का घर छोड़कर दूसरे घर जाती है। जिस मां-बाप ने उसे जन्म दिया, पाला-पोसा और संस्कार दिए, विवाह के बाद परिस्थितियां ऐसी बन जाती हैं कि जरूरत के समय भी वह बेटी हर पल उनके पास नहीं रह पाती। यह जीवन की एक बड़ी विडंबना है।

गुरुदेव ने कहा कि इस स्थिति की शुद्धि का सबसे सुंदर मार्ग यह है कि जिस घर में बेटी बहू बनकर जाए, वहां उसकी सास एक दिन गर्व से कहे—“धन्य है ऐसी मां, जिसने ऐसी बेटी को जन्म दिया, जो आज मेरी बहू है।”

उन्होंने कहा कि अपनी मां की प्रशंसा अपनी सास से करवाना नारी जीवन के कल्याण का एक बड़ा मार्ग है। यह आसान नहीं है, क्योंकि जब एक सास अपनी बहू की मां की प्रशंसा करती है तो वह केवल एक महिला की प्रशंसा नहीं करती, बल्कि उस बेटी के संस्कारों के साथ उसके पूरे परिवार के संस्कारों का सम्मान करती है।

“बहू के आने के बाद घर धर्ममय हो जाए, इससे बड़ी उपलब्धि क्या?”

गुरुदेव ने कहा कि ससुराल पक्ष को यह देखना चाहिए कि बहू के घर आने के बाद परिवार के वातावरण में क्या परिवर्तन आया।

यदि घर के सदस्य यह कहने लगें कि—

“जब से घर में बहू आई है, वातावरण धर्ममय हो गया है, व्यवहार बदल गया है, घर में संस्कार और सकारात्मकता बढ़ गई है।”

तो यह उस बेटी के माता-पिता के लिए सबसे बड़ा सम्मान है।

गुरुदेव ने पुरुषों और ससुराल पक्ष को भी संदेश देते हुए कहा कि जब कोई बहू आपके घर आए तो उसके साथ ऐसा व्यवहार करें कि वह अपने पीहर जाकर अपनी मां से कहे—

“मां, तुम तो कुछ भी नहीं हो, मेरी सास मां तो बहुत अच्छी हैं।”

उन्होंने कहा कि बहू अपने पीहर जाकर अपनी सास की प्रशंसा करे और ससुराल वाले बहू के पीहर एवं उसके माता-पिता के संस्कारों की प्रशंसा करें—यही परिवारों को जोड़ने वाला सबसे सुंदर और मजबूत सूत्र है।

गुरुदेव के इस संदेश ने उपस्थित गुरु भक्तों को रिश्तों की नई दृष्टि दी। नवदंपती सहित पूरा परिवार गुरुदेव के आशीर्वचन से अभिभूत नजर आया और सभी ने धर्म, संस्कार, प्रेम एवं संयम के साथ गृहस्थ जीवन को आगे बढ़ाने का भाव व्यक्त किया।

 

अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी

रिपोर्ट | 9929747312

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