“धन-दौलत नहीं, आत्मशांति का मार्ग खोजिए” : मुनि योगसागर जी महाराज
पुण्योदय नसियां जी में भव्य चातुर्मास कलश स्थापना महामहोत्सव, भक्ति गीतों से गूंजा परिसर; तीन रजतमय कलश रहे आकर्षण का केंद्र
49 वर्ष बाद राजस्थान में पहली बार मुनिश्री योगसागर जी महाराज का चातुर्मास, कोटा बना ऐतिहासिक अवसर का साक्षी
कोटा, 9 अगस्त।
श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी, दादाबाड़ी का विशाल परिसर रविवार को गुरु भक्ति, श्रद्धा, साधना और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर नजर आया। “मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल गए हैं, गुरु योगसागर आए हैं…” जैसे भावपूर्ण भक्ति गीतों से पूरा परिसर गूंज उठा। श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए तो नन्हे-मुन्नों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने भी समारोह में चार चांद लगा दिए।

परम पूज्य आचार्य भगवन्त श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य, ज्येष्ठ-श्रेष्ठ निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज ससंघ के पावन सान्निध्य में भव्य वर्षायोग चातुर्मास कलश स्थापना महामहोत्सव श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के साथ संपन्न हुआ।

“धन नहीं, आत्मशांति का मार्ग खोजिए” : मुनि योगसागर
धर्मसभा को संबोधित करते हुए निर्यापक श्रमण मुनि श्री 108 योगसागर जी महाराज ने कहा कि चातुर्मास कलश स्थापना केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि अपने भीतर साधना, संयम और आत्मशुद्धि का संकल्प लेने का अवसर है।
उन्होंने कहा कि धर्म के लिए किया जाने वाला पुण्यार्जन केवल बाहरी आयोजन तक सीमित नहीं रहना चाहिए। हमारी भावना ऐसी होनी चाहिए कि जिस परम पद को संतों ने साधना के माध्यम से प्राप्त किया, उस आत्मपद की ओर हम भी आगे बढ़ें।
मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य कितना भी धन कमा ले और कितना भी वैभव एकत्र कर ले, लेकिन यदि भीतर की आकुलता और व्याकुलता समाप्त नहीं हुई तो वास्तविक सुख प्राप्त नहीं हो सकता। सच्ची शांति संग्रह और परिग्रह बढ़ाने में नहीं, बल्कि उनसे विमुख होकर आत्मा की ओर लौटने में है।
उन्होंने कहा कि तीर्थंकरों और चक्रवर्तियों ने भी अपार वैभव के बावजूद अंततः त्याग और आत्मसाधना का मार्ग अपनाया। धर्म, गुरु और सत्संग का अवसर पूर्व पुण्यों का परिणाम है। इसलिए इस दुर्लभ अवसर का उपयोग आत्मकल्याण के लिए करना चाहिए।
मंगलाचरण से कलश स्थापना तक धर्माराधना का भव्य संगम
चातुर्मास कलश स्थापना समारोह का शुभारंभ मंगलाचरण के साथ हुआ। इसके बाद चित्र अनावरण, दीप प्रज्ज्वलन, आचार्य भगवन्त की संगीतमय पूजन-अर्चना, गुरु चरणों का पाद प्रक्षालन, शास्त्र भेंट, श्रीफल अर्पण और मंगल कलश स्थापना सहित विभिन्न धार्मिक क्रियाएं विधिपूर्वक संपन्न हुईं।
श्रद्धालुओं ने गुरु चरणों में नमन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। विभिन्न धार्मिक कलशों के पुण्यार्जन की बोलियां एवं घोषणाएं भी हुईं।

समारोह में अमृत सिद्धि, सर्वार्थ सिद्धि एवं ऋद्धि-सिद्धि के तीन रजतमय कलश विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। इसके साथ ज्ञानाराधना, दर्शनाराधना, चारित्राराधना एवं तपाराधना कलश तथा सम्यग्दर्शन, सम्यग्ज्ञान और सम्यक्चारित्र भक्ति कलश भी आत्मकल्याण की भावना के प्रतीक बने।
भक्ति गीतों पर झूमे नन्हे-मुन्ने, गुरु भक्ति में भावविभोर हुआ परिसर
महामहोत्सव के दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चों ने “मंगल अवसर आया है, गुरु कृपा की ये छाया है…”, “मेरे चौखट पर चलके आज चारों धाम आए हैं…”, “बजाओ ढोल स्वागत में मेरे गुरुदेव आए हैं…”, “मेरा हाथ पकड़ ले रे बाबा…” तथा “झूम-झूम के नाचो रे योग के द्वार पे…” जैसे भक्ति गीतों पर मनमोहक सामूहिक प्रस्तुतियां दीं।
गुरु आगमन की खुशी श्रद्धालुओं की भावनाओं में भी दिखाई दी। “श्री योगसागर महाराज, मैं दीवाना हूं तेरा…” और “मेरी झोपड़ी के भाग आज खुल गए हैं, गुरु योगसागर आए हैं…” जैसे भक्ति गीतों ने वातावरण को भावविभोर कर दिया। पूरा परिसर गुरु भक्ति, जिनवाणी और धर्माराधना के मंगलमय स्वरों से गूंजता रहा।
49 साल बाद राजस्थान में पहली बार योगसागर जी महाराज का चातुर्मास
चातुर्मास कमेटी के मुख्य संयोजक हुकम जैन ‘काका’ ने कहा कि यह समाज के अक्षुण्ण पुण्य का उदय है कि निर्यापक श्रमण मुनि श्री योगसागर जी महाराज का पिछले 49 वर्षों में पहली बार राजस्थान में चातुर्मास हो रहा है और वह भी कोटा के पुण्योदय नसियां जी में स्थापित हुआ है। यह समस्त समाज के लिए गौरव और सौभाग्य का विषय है।
उन्होंने कहा कि गुरु कृपा का वर्णन शब्दों में संभव नहीं है। महाराजश्री का अधिकतम समय आचार्य भगवन्त श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के श्रीचरणों में बीता है। आचार्य भगवन्त के ज्ञान के खजाने की चाबी यदि किसी के पास है तो वह योगसागर जी महाराज के पास है।
उन्होंने समाजजनों से आह्वान किया कि प्रतिदिन पूज्य मुनिश्री की देशना का लाभ लेकर आचार्य भगवन्त के ज्ञान के अमूल्य खजाने को अपने जीवन में उतारें।
हुकम जैन ‘काका’ ने कहा कि आचार्य भगवन्त के लघुनंदन का यह मंगल चातुर्मास कोटा के लिए ऐतिहासिक अवसर है। समाज की भावना है कि चातुर्मास का मंगल संदेश कोटा के प्रत्येक घर तक पहुंचे और अधिकाधिक लोग धर्माराधना से जुड़कर अपने जीवन को सार्थक बनाएं।
“गुरु सान्निध्य भगवान की कृपा, ज्ञान में आत्मकल्याण का मार्ग” : प्रहलाद गुंजल
कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल ने कहा कि गुरुजी के खजाने में भले ही भौतिक धन-दौलत नहीं है, लेकिन उनके ज्ञान के अमूल्य खजाने में आत्मकल्याण का मार्ग मौजूद है।
उन्होंने कहा कि संतों का सान्निध्य सहजता से प्राप्त नहीं होता। भगवान की कृपा के बिना संतों का सान्निध्य मिलना संभव नहीं है और कोटा को योगसागर जी महाराज का सान्निध्य मिलना निश्चित रूप से भगवान की विशेष कृपा है।
उन्होंने कहा कि श्रावण मास में जिस प्रकार वर्षा से धरती की कोख हरियाली से भर उठती है, उसी प्रकार हमें भी इस धर्मगंगा में श्रद्धा की डुबकी लगाकर अपने अंतर्मन में सद्विचार, संस्कार और सत्कर्मों की फसल को हरा-भरा करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि गुरु चरणों से होकर ही आत्मकल्याण का मार्ग निकलता है। इसलिए प्राप्त हुए दुर्लभ गुरु सान्निध्य को केवल दर्शन तक सीमित न रखते हुए पूज्य गुरुदेव की वाणी को जीवन में उतारना ही सच्ची गुरु-भक्ति है।
जनप्रतिनिधियों ने अर्पित किया श्रीफल, लिया मंगल आशीर्वाद
महामहोत्सव में कोटा दक्षिण विधायक संदीप शर्मा, कोटा-बूंदी लोकसभा क्षेत्र के प्रत्याशी एवं पूर्व विधायक प्रहलाद गुंजल तथा शहर कांग्रेस अध्यक्ष श्रीमती राखी गौतम ने पूज्य मुनि श्री योगसागर जी महाराज के समक्ष श्रीफल अर्पित कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
सैकड़ों पुण्यार्जक परिवारों ने की मंगल कलश स्थापना
मंदिर अध्यक्ष जम्बू जैन सर्राफ एवं महामंत्री महेन्द्र कासलीवाल ने बताया कि प्रथम कलश का पुण्यार्जन श्री पदम जैन, श्री राजेन्द्र, श्री हुकम जैन ‘काका’, श्री प्रकाश जैन एवं समस्त हरसोरा परिवार द्वारा किया गया।
द्वितीय कलश का पुण्यार्जन श्री महावीर जी, श्रीमती भारती जी, श्री सिद्धार्थ जी एवं समस्त मित्तल परिवार द्वारा श्रद्धाभावपूर्वक किया गया।
तृतीय कलश का पुण्यार्जन श्रीमती सुशीला बाई जी, श्री विवेक जी, श्री अशोक जी, श्री राजकुमार जी, श्री आनंद जी एवं समस्त ठोरा परिवार द्वारा किया गया।
इसके अतिरिक्त सैकड़ों पुण्यार्जक परिवारों ने श्रद्धा एवं भक्ति भाव के साथ विभिन्न मंगल कलशों की स्थापना कर धर्मलाभ अर्जित किया।
गुरु भक्ति और आत्मकल्याण की भावना से अनुप्राणित रहा पुण्योदय नसियां जी
महामहोत्सव में बड़ी संख्या में समाजबंधु, श्रद्धालु, धर्मप्रेमी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान पुण्योदय नसियां जी परिसर गुरु भक्ति, जिनवाणी, धर्माराधना और आत्मकल्याण की मंगल भावना से अनुप्राणित रहा।
चातुर्मास का संदेश यही रहा—कलश केवल सिर पर ही नहीं, बल्कि जीवन के भीतर भी स्थापित हो; तभी चातुर्मास की साधना और गुरु सान्निध्य की सच्ची सार्थकता होगी।
रिपोर्ट : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
मो. 9929747312



