धन-संपत्ति दोबारा मिल सकती है, लेकिन समय और ज्ञान को वापस पाना कठिन : स्वस्तिभूषण माताजी
केशवरायपाटन के अतिशय क्षेत्र में धर्मसभा का आयोजन, ज्ञान को बताया जीवन की सबसे बड़ी संपदा
केशवरायपाटन।
श्रीमुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र में शनिवार को आयोजित धर्मसभा में भारत गौरव गणिनी आर्यिका रत्न 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने ज्ञान के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रद्धालुओं को जीवन की वास्तविक संपदा पहचानने का संदेश दिया।
माताजी ने कहा कि जीवन में धन-संपत्ति से कहीं अधिक महत्वपूर्ण ज्ञान है। ज्ञान ही जीवन का वास्तविक आधार है। यदि एक ओर सोने का पहाड़ हो और दूसरी ओर ज्ञान, तो व्यक्ति को सोने के बजाय ज्ञान को चुनना चाहिए, क्योंकि धन-संपत्ति का उपयोग भी सही विवेक और ज्ञान के माध्यम से ही संभव है।

उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति के पास अपार धन-संपत्ति और सुख-सुविधाओं के साधन होने के बावजूद यदि बुद्धि एवं ज्ञान का अभाव है, तो वह उपलब्ध साधनों का सही उपयोग नहीं कर सकता। हाथ-पांव, कोठी-बंगला और तमाम भौतिक सुविधाएं होने के बाद भी सुख का वास्तविक अनुभव बुद्धि, विवेक और ज्ञान से ही संभव है।
धन चला जाए तो फिर कमाया जा सकता है, समय नहीं लौटता
स्वस्तिभूषण माताजी ने कहा कि धन चला जाए तो उसे दोबारा कमाया जा सकता है। परिवार का साथ छूट जाए तो परिस्थितियों के अनुसार संबंध फिर बनाए जा सकते हैं, लेकिन बीता हुआ समय और खोया हुआ ज्ञान वापस पाना अत्यंत कठिन है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को जीवन में निरंतर अपने ज्ञान को बढ़ाने के साथ-साथ विवेक, समझ और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करनी चाहिए।
उन्होंने बताया कि मनुष्य के पास मति ज्ञान और श्रुत ज्ञान जैसे ज्ञान के साधन हैं। इंद्रियां और मन भी ज्ञान ग्रहण करने के महत्वपूर्ण माध्यम हैं। मनुष्य में अपनी ज्ञान क्षमता को बढ़ाने की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। आवश्यकता केवल उन्हें पहचानने और निरंतर विकसित करने की है।
माताजी ने कहा कि ज्ञान जीवन के अंधकार को दूर करने वाला प्रकाश है। ज्ञान और विवेक के माध्यम से ही मनुष्य अपने जीवन को सही दिशा दे सकता है तथा अपने कर्मों और व्यवहार को बेहतर बना सकता है।
पदयात्रियों ने पहुंचकर किए अभिषेक और शांतिधारा
धर्मसभा के दौरान खटकड़ एवं महावीर नगर से पदयात्रा करते हुए श्रद्धालुओं के समूह श्रीमुनिसुव्रतनाथ दिगंबर जैन अतिशय क्षेत्र पहुंचे। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीमुनिसुव्रतनाथ स्वामी के दर्शन कर विधिवत अभिषेक एवं शांतिधारा की तथा धर्मलाभ अर्जित किया।
संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी





