“बाहरी चमक नहीं, अंतर्मन का ज्ञान ही जीवन का सच्चा उजाला : भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी
“करोड़ों सूर्यों का प्रकाश भी भगवान के ज्ञान-तेज के सामने फीका—स्वस्तिभूषण माताजी का प्रेरक संदेश”
केशवरायपाटन।
“संसार का सबसे बड़ा चमत्कार यदि कोई है, तो वह ज्ञान का चमत्कार है।” आत्मज्ञान और विनम्रता का यही अमूल्य संदेश भारत गौरव गणिनी आर्यिका 105 स्वस्तिभूषण माताजी ने अतिशय क्षेत्र में आयोजित विशाल धर्मसभा में श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए दिया। उन्होंने कहा कि बाहरी वैभव और चमक-दमक क्षणिक है, जबकि अंतर्मन में प्रज्ज्वलित ज्ञान का दीपक ही जीवन को सच्ची दिशा और शाश्वत प्रकाश प्रदान करता है।
माताजी ने कहा कि जैसे घोर अंधकार में बिजली की एक चमक पूरे मार्ग को स्पष्ट कर देती है, उसी प्रकार आत्मज्ञान का प्रकाश जीवन के अज्ञान रूपी अंधकार को समाप्त कर देता है। ज्ञान के बिना सत्य का साक्षात्कार संभव नहीं है। यदि भीतर ज्ञान का प्रकाश जागृत हो जाए, तो बाहरी परिस्थितियां कैसी भी हों, साधक शांतचित्त होकर आत्मध्यान में लीन रह सकता है।
उन्होंने कहा कि अहंकार मनुष्य का सबसे बड़ा शत्रु है। अहंकार व्यक्ति को अपनी कमियां देखने नहीं देता और उसे दूसरों से दूर कर देता है। इसके विपरीत विनम्रता ज्ञान, सम्मान और मधुर संबंधों का आधार बनती है। जो व्यक्ति सफलता के शिखर पर पहुंचकर भी सहज और सरल बना रहता है, वही वास्तव में महान कहलाता है।
आर्यिका माताजी ने भक्तामर स्तोत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि भगवान के केवलज्ञान का तेज इतना दिव्य है कि करोड़ों सूर्य और चंद्रमा का प्रकाश भी उसके सामने फीका पड़ जाता है। इसलिए केवल बाहरी आडंबर, सजावट और दिखावे से कोई ज्ञानवान नहीं बन सकता। वास्तविक उजाला तब आता है, जब अंतर्मन में विवेक, आत्मज्ञान और सदाचार का दीप प्रज्वलित होता है।
उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से स्वाध्याय, ध्यान और आत्मचिंतन को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान करते हुए कहा कि यही साधना आत्मकल्याण और समाज कल्याण का सर्वोत्तम मार्ग है।
धर्मसभा के अंत में आर्यिका माताजी के पावन सानिध्य में 8 अगस्त को कोटा से अतिशय क्षेत्र पहुंचने वाली भव्य पदयात्रा के पोस्टर का विधिवत विमोचन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और सभी ने पदयात्रा में अधिकाधिक सहभागिता का संकल्प लिया।
— संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312





