जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि ऊँचा पद नहीं, ऊँचा संकल्प होता है।

धर्म

जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि ऊँचा पद नहीं, ऊँचा संकल्प होता है।

 

आज इंदौर के पावन चातुर्मास में एक ऐसा प्रेरणादायी क्षण उपस्थित हुआ जिसने असंख्य श्रद्धालुओं के हृदय को भाव-विभोर कर दिया। ग्राम कॉलोनी, जिला गुना के संस्कारित परिवार में जन्मे श्री मनीष जैन (पिता – श्री पवन जैन, माता – श्रीमती अनीता देवी), जो वर्तमान में इंदौर के गोयल नगर में निवास करते हैं, प्रतिष्ठित फार्मास्युटिकल कंपनी में मैनेजर के पद पर कार्यरत हैं। लगभग 7 वर्षों के अनुभव और लगभग 15 लाख रुपये वार्षिक पैकेज जैसी आकर्षक उपलब्धियों के बीच उन्होंने आज ऐसा निर्णय लिया, जो किसी भी सांसारिक सफलता से कहीं अधिक ऊँचा है।

 

विश्ववंदनीय निर्यापक मुनि पुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज के श्रीचरणों में उपस्थित होकर उन्होंने आजीवन ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया और स्वयं को गुरु-संघ की मर्यादाओं से जोड़ लिया। यह केवल एक व्रत नहीं, बल्कि आत्मविजय की घोषणा है; यह बताता है कि आधुनिक जीवन की व्यस्तताओं, सुविधाओं और आकर्षणों के बीच भी संयम का दीप पूरी तेजस्विता से जल सकता है।

 

मनीष भैया का यह संस्कार कोई संयोग नहीं है। उनकी बड़ी बहन दिव्या जैन भी आचार्य परंपरा से व्रत ग्रहण कर चुकी हैं। बहन सोनम जैन एवं जीजाजी शशांक जैन (इंदौर) तथा भाई आशीष जैन एवं भाभी निशी जैन (पुणे) सहित पूरे परिवार के धार्मिक संस्कार आज इस गौरवपूर्ण क्षण में झलक उठे।

 

30 वर्ष की आयु में ऐसा आजीवन संकल्प लेना यह संदेश देता है कि असली जीत दुनिया को जीतने में नहीं, बल्कि स्वयं पर विजय पाने में है।

 

मनीष भैया के इस अद्भुत पुण्य की हृदय से अनुमोदना। भगवान महावीर एवं गुरुदेव की असीम कृपा उन पर निरंतर बनी रहे। उनका यह ब्रह्मचर्य व्रत अटल, अखंड और तेजस्वी रहे तथा उनका जीवन अनगिनत युवाओं के लिए प्रेरणा का दीप बनकर सदैव प्रकाशित होता रहे।

 

ऐसे संकल्प ही समाज की वास्तविक पूँजी हैं, क्योंकि करियर सफल इंसान बनाता है, लेकिन संयम सफल आत्मा का निर्माण करता है।

 

#श्रीश ललितपुर

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