स्वयं के ही कीर्तिमान तोड़ते पूज्य गुरुदेव सुधासागर जी महाराज
– मनोज कुमार जैन बांकलीवाल, आगरा
दिगम्बर जैन परम्परा में समय-समय पर ऐसे महापुरुष अवतरित होते हैं जो केवल प्रवचन ही नहीं देते, बल्कि अपने तप, त्याग, साधना और लोककल्याण के संकल्प से समाज को नई दिशा प्रदान करते हैं। पूज्य निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज ऐसे ही युगप्रेरक संत हैं, जो मानो अपने ही बनाए हुए कीर्तिमानों को बार-बार पीछे छोड़ते जा रहे हैं।
इन्दौर में जो दृश्य आज देखने को मिला, वह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि श्रद्धा, समर्पण और गुरुभक्ति का विराट उत्सव था। इससे पहले भी इन्दौर जैन समाज ने पूज्य गुरुदेव को चातुर्मास हेतु आमंत्रित करने के लिए हजारों श्रद्धालुओं के साथ गुना पहुँचकर इतिहास रचा था। इसके बाद इन्दौर में उनके भव्य आगमन पर स्थानीय समाचार-पत्रों के अनुसार एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं की लगभग पाँच किलोमीटर लंबी शोभायात्रा निकली, जिसने पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया।
किन्तु आज चातुर्मास मंगल कलश स्थापना में जो हुआ, उसने सभी पूर्व रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए। यह केवल इन्दौर का नहीं, बल्कि मेरे विचार से सम्पूर्ण भारत में किसी भी दिगम्बर जैन मुनिराज के चातुर्मास कलश स्थापना का सर्वाधिक बोली वाला आयोजन बन गया।
आज की बोलियों में 1,616 कलशों के दो प्रथम पुन्यार्जकों ने अद्भुत श्रद्धा का परिचय दिया। इसके अतिरिक्त 555, 333, 222, 111 तथा अन्य अनेक कलशों की बोलियों के साथ कुल संख्या लगभग 10,000 कलशों तक पहुँच जाना अभूतपूर्व और ऐतिहासिक उपलब्धि है। यह केवल धन का प्रदर्शन नहीं, बल्कि गुरुभक्ति, धर्मनिष्ठा और समाज की आस्था का विराट प्रमाण है।
धन्य हैं वे दानी परिवार, जिन्होंने धर्म के लिए मुक्तहस्त से समर्पण किया। धन्य है इन्दौर का जैन समाज, जिसने यह सिद्ध कर दिया कि जब समाज का नेतृत्व एक तपस्वी, त्यागी और दूरदर्शी संत के हाथों में होता है, तब श्रद्धा भी नए इतिहास रचती है।
पूज्य गुरुदेव सुधासागर जी महाराज का जीवन सदैव समाजोपयोगी कार्यों के लिए समर्पित रहा है। शिक्षा, चिकित्सा, गौसेवा, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति, संस्कार निर्माण, तीर्थ विकास और अनेक लोककल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से उन्होंने धर्म को केवल मंदिरों तक सीमित नहीं रखा, बल्कि जन-जन के जीवन से जोड़ा है।
आज की यह अभूतपूर्व कलश राशि भी निश्चय ही समाज और मानवता के कल्याण के लिए अनेक नई योजनाओं का आधार बनेगी। देशभर का जैन समाज आशा करता है कि पूज्य गुरुदेव के पावन मार्गदर्शन में इन्दौर से शिक्षा, स्वास्थ्य, संस्कार, सेवा और तीर्थ संरक्षण के अनेक नए अध्याय प्रारम्भ होंगे, जिनका लाभ आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचेगा।
यह आयोजन एक संदेश भी देता है कि जब श्रद्धा तपस्वी संत के प्रति समर्पित होती है, तब इतिहास बनता है। रिकॉर्ड केवल संख्या से नहीं बनते, बल्कि समाज के विश्वास, एकता और धर्म के प्रति समर्पण से बनते हैं।
पूज्य गुरुदेव निर्यापक श्रमण मुनिपुंगव श्री 108 सुधासागर जी महाराज के श्रीचरणों में विनम्र वंदन।
मनोज जैन बाकलीवाल आगरा

