भगवान नेमिनाथ मोक्ष कल्याणक महोत्सव
आज तीर्थकर भगवान नेमिनाथ का हम मोक्षकल्याणक महोत्सव मना रहे हैं। जिन्होंने सही मायने में अहिंसा शाकाहार का एक जीवंत संदेश दिया।
ग्रंथों में वर्णित एक बात आती है जब नेमिनाथ भगवान विवाह के लिए घोड़ी पर बैठकर जा रहे थे तभी उन्हें पशुओं की पीड़ा चीत्कार सनाई दी। तभी उन्होंने सारथी को पूछ लिया यह शोर कैसा तब सारथी ने बताया की आपके विवाह में आए राजा महाराजा एवं अतिथियों के लिए मांसाहारी भोजन बन रहा है यह सुनकर वे भावुक होकर करुणा भर गए।
तुरंत घोड़ी पे से उतरकर वह गिरनार पर्वत की ओर चल गए जहां उन्होंने साधना की और मोक्ष को प्राप्त किया। उनके साथ राजुल जिनके साथ उनका विवाह होना था वे भी मोक्षमार्गी की और चल पड़ी और एक पावन पर्वत से निर्वाण मोक्ष को प्राप्त किया। आज भी वहां राजुल गुफा स्थित है।
जहाँ नेमी के चरण पड़े, गिरनार वो धरती है
वो प्रेम मूर्ती राजूल, उस पथ पर चलती है
उस कोमल काया पर, हल्दी का रंग चदा
मेहंदी भी रुचीर रची, गले मंगल सुत्र पड़ा
पर मांग ना भर पायी, ये बात ही खलती है ॥ जहाँ नेमी के चरण पड़े, गिरनार वो धरती है।
सुन पशुओं का क्रुन्दन, तुमने तोड़े बंधन
जागा वैराग्य तभी, पा ली प्रभु पथ पावन
उस परम वैरागी से, चिर प्रीत उमड़ती है ॥ जहाँ नेमी के चरण पड़े, गिरनार वो धरती है।
राजूल की आंखों से, झर झर झरता पानी
अन्तर में घाव भरे, प्रभु दर्श की दीवानी
मन मन्दिर में जिसकी, तस्वीर उभरती है ॥ जहाँ नेमी के चरण पड़े, गिरनार वो धरती है।
नेमी जिस और गये, वही मेरा ठिकाना है
जीवन की यात्रा का, वो पथ अनजाना है
लख चरण चंद्र प्रभु के, राजूल कब रूकती है ॥ जहाँ नेमी के चरण पड़े, गिरनार वो धरती है।
अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

