“नींद छोटी मौत, मौत बड़ी नींद” — अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज का जीवन बदलने वाला संदेश, पुष्पगिरी तीर्थ पहुंचे अपर कलेक्टर व राष्ट्रीय कवि ने लिया आशीर्वाद
गणाचार्य पुष्पदंत सागर महाराज एवं अंतर्मना आचार्य प्रसन्न सागर महाराज ससंघ के दर्शन कर किया वंदन, समयसार स्वाध्याय में गुरु ने पुण्य संचय और वैराग्य का दिया संदेश।
सोनकच्छ।
पुष्पगिरी तीर्थ पर शनिवार को राष्ट्रीय सबरस कवि शशिकांत यादव (देवास) तथा रविवार प्रातः अपर कलेक्टर संजीव कुमार जैन ने पावन तीर्थ पहुंचकर विराजमान गणाचार्य 108 पुष्पदंत सागर महाराज एवं अंतर्मना आचार्य 108 प्रसन्न सागर महाराज ससंघ के दर्शन कर मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया।
इस अवसर पर गणाचार्य श्री ने तिलक लगाकर अतिथियों का स्वागत किया, जबकि अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज ने आध्यात्मिक पुस्तक भेंट कर मंगलाशीष प्रदान किया। अपर कलेक्टर श्री जैन ने भगवान के कलशाभिषेक के दर्शन किए तथा मुनि संघ की आहारचर्या का लाभ भी प्राप्त किया।
जिनागम समयसार ग्रंथ के स्वाध्याय के दौरान अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागर महाराज ने अपने शिष्यों एवं श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि “जब तक संसार में हो, संसार पूछेगा कि तुम्हारे पास क्या है; लेकिन जब मृत्यु आएगी, तब परमात्मा पूछेगा कि तुम्हारे साथ क्या है।”
उन्होंने कहा कि धन, संपत्ति, घर, वाहन और वैभव अर्जित करना गलत नहीं है, लेकिन प्रत्येक दिन यह चिंतन अवश्य करें कि एक दिन यह सब यहीं छोड़कर जाना है। मनुष्य के साथ यदि कुछ जाता है, तो वह उसके पुण्य कर्म हैं। इसलिए सांसारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ पुण्य का संचय भी आवश्यक है।
अपने प्रेरक उद्बोधन में आचार्य श्री ने कहा, “नींद छोटी मौत है और मौत बड़ी नींद है।” उन्होंने कहा कि यदि सही और गलत का ज्ञान होने के बाद भी व्यक्ति पाप कर्म करता है, तो वह स्वयं अपना अहित करता है। जीवन का वास्तविक कल्याण तभी संभव है जब मनुष्य पराई वस्तु को अपना मानना छोड़कर धर्म, सेवा, सदाचार और शुभ कार्यों में अपना जीवन लगाए। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने गुरुजनों के दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया।
प्राप्त जानकारी: प्रवक्ता रोमिल जैन (सोनकच्छ), नरेंद्र अजमेरा, पीयूष कासलीवाल (औरंगाबाद)
संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी।
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