भगवान के निर्वाण महोत्सव से प्रेरणा लेकर जीवन का धर्ममय निर्माण करेंआचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज

धर्म

भगवान के निर्वाण महोत्सव से प्रेरणा लेकर जीवन का धर्ममय निर्माण करेंआचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज
पारसोला आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज 35 साधु सहित पारसोला में विराजित है आज आयोजित धर्म सभा में आचार्य श्री ने उपदेश में बताया कि
दीपावली पर्व महापर्व है, दीपावली कार्तिक माह की अमावस्या को ही साधु वर्षा काल में चातुर्मास कलश का निष्ठापन करते हैं । महावीर भगवान अंतिम तीर्थंकर थे जिनकी दिव्य देशना का लाभ 84 हजार वर्ष तक प्राप्त होगा दीपावली पर महावीर स्वामी ने निर्वाण प्राप्त किया इसलिए देवताओं ने आकर निर्वाण महोत्सव पर हर्ष प्रकट किया दीपोत्सव मनाया तथा मिष्ठान मोदक चढ़ाई यहां पर भी पारसोला में भी प्रतीकात्मक रूप से निर्वाण महोत्सव में निर्वाण लाडू चढ़ाया गया । 66 दिनों तक भगवान कीदिव्य देशना नहीं खिरी तब इंद्र भूति गौतम ने समवशरण में आकर मानस्तंभ के दर्शन किए और उन्हें सम्यक ज्ञान हो गया और उन्होंने दीक्षा धारण की वह गौतम गणधर बने तब दिव्य देशना का लाभ मिला।गौतम स्वामी को भी दीपावली की शाम को केवल ज्ञान की प्राप्ति हुई । यह मंगल देशना पंचम पट्टाघीश श्री वर्धमान सागर जी ने धर्मसभा में प्रकट की। ब्रह्मचारी गज्जू भैया राजेश पंचोलिया अनुसार आचार्य श्री ने उपदेश में आगे बताया कि दीपावली का पर्व यह संदेश देता है कि जिस प्रकार अंधकार को प्रकाश दूर करता है उसी प्रकार आप मोह और मिथ्यात्व , अज्ञान का अंधकार धर्म ज्ञान रूपी प्रकाश से दूर करें। धनतेरस वस्तुतः धन्य तेरस है क्योंकि इस दिन भगवान महावीर स्वामी ने अंतिम देशना देकर योग निरोध किया था। आचार्य शांति सागर जी महाराज का आचार्य पद का शताब्दी महोत्सव आपने मनाया ‌इसी वर्ष 1924 में अनेक साधुओं के मुनि पद, आर्यिका पद के शताब्दी 100 वर्ष पूर्ण हुए हैं। पारसोला समाज देव शास्त्र गुरु भक्त समाज ,है हमेशा धार्मिक कार्य करते रहे ऐसा मंगल आशीर्वाद है। जयंतीलाल कोठारी अध्यक्ष एवं ऋषभ पचोरी अध्यक्ष वर्षायोग समिति अनुसार पारसोला समाज द्वारा आचार्य संघ के सानिध्य में सर्वतोभद्र विधान का आयोजन किया जा रहा है इस विधान में तीन लोक के कृत्रिम और अकृत्रिम चेत्यालयो की पूजन की जाएगी इससे भारी पुण्य का संचय होगा। इसके पूर्व आचार्य श्री वर्धमान सागर जी के सानिध्य में सभी साधुओं ने चातुर्मास पूर्ण होने पर निष्ठापन की धार्मिक क्रियाएं पूर्ण की। चतुर्दशी को भारत के सभी साधु उपवास करते हैं।नगर के सभी जिनालयों में सभी ने भगवान का निर्वाण लाडू दर्शन, अभिषेक पूजन कर अर्पित किया।राजेश पंचोलिया इंदौर से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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