चाय कौन पीता है? क्यों पीता है? स्वास्तिभूषण माताजी टर्निग पॉइंट पुस्तक आलेख

धर्म

चाय कौन पीता है? क्यों पीता है? स्वास्तिभूषण माताजी टर्निग पॉइंट पुस्तक आलेख

चाय एक गरम पेय पदार्थ है। यह भारत का उत्पाद नहीं बल्कि अंग्रेजों के साथ विदेश से आई वस्तु है। भारत वासी तो गाय और भैंस का दूध पीने वाले थे। अँग्रेज चौराहे पर खड़े होकर चाय फ्री में बांटते थे।

 

 

भारत में कुछ भी मुफ्त बाँट दो कोई मना नहीं करेगा। जहर भी होगा तो कहेंगे ले लो पता नहीं कब काम आ जाये। तो अंग्रेज चाय बाटते तो तो लोगों ने पीना शुरू कर दिया कुछ दिनों बाद अंग्रेजों ने चाय बाटना बंद कर दी। लोगों ने चाय माँगी तो वे चाय बेचने लगे और चाय शुरू हो गई लोगों के जीवन में कर दिया। कुछ दिनों के बाद अँग्रेजो ने चाय बॉटनी बंद कर दी। लोगों के जीवन में जो पीढी दर पीढी आज तक चली आ रही है। बिना जाने बिना स्वास्थ्य पर ध्यान दिये पिये जा रहे हैं। दूध जैसे स्वास्थ्य वर्धक पदार्थ को छोड़ रखा है।

अँग्रेज चाय क्यों पीते हैं?

अँग्रेज जिस देश के निवासी हैं वह क्षेत्र अत्यधिक ठंडा है। वहाँ बारह महीने में आठ महीने बर्फ पडती है। जिससे वहाँ रक्त चाप (BP) नीचे हो जाता है, चाय पीने पर शरीर में गर्मी आती है और BP ठीक होता है, वे चाय इसीलिये पीते है। किन्तु भारतवासी नकलची हैं. वो चाय पीते हैं, इसीलिये हम भी चाय पीते हैं। थोडा चिंतन करो थोडा विचार करो कि हमारे भारत में 12 महीने में आठ महीने गर्मी रहती है, दो महीने कम ठंड रहती है और मात्र दो महीने थोडी ज्यादा ठंड रहती है। हमारे यहाँ के मौसम के हिसाब से हमारे शरीर को चाय की आवश्यकता नहीं है। और शरीर की आवश्यकता बिना चाय पियोगे तो धीरे-धीर फिर चाय भी पीना और BP कम करने की गोली भी खाना। चाय ना पिओ तो BP की दवाई भी नहीं खानी पड़ेगी। लोग जून के महीने में भी गरम-गरम चाय पीते हैं जिससे पेट में एसिड बनती हैं, फिर दवाईयां खाते हैं। स्वस्थ्य रहना है तो चाय छोड़ना चाहिए।

 

 

चाय में निकोटीन नामक एक पदार्थ होता है जो खून में मिल जाता है औन चाय का समय होते ही उसमें परिवर्तन होता है। ना चाहते हुये भी कई बार चाय पीनी पड़ती है। वरना सिर दर्द प्रारंभ हो जाता है। जब कभी लोग तीर्थ यात्रा पर जाते हैं तब बहुत परेशानी होती है। समय पर चाय नहीं मिलने पर सिरदर्द होता है और तीर्थो के दर्शन करने में भी मन नहीं लगता है। आपने तीर्थ यात्रा के लिये कितनी मेहनत की, पैसा खर्च किया और एक चाय के कप ने आपकी तीर्थ यात्रा पर पानी फेर दिया चाय एक व्यसन बन गया। भगवान महावीर ने खोटी आदतों को व्यसन कहा है।

 

व्रत उपवास करना है तो चाय छोड़ो
पहाड़ पर भी झरने होते हैं, अर्थात कठोर से कठोर व्यक्ति भी धर्म की भावना रखता है। धर्म की शुरूआत त्याग और तपस्या से होती है। जैन धर्म का त्याग सारी दुनिया में प्रसिद्ध है। व्रत उपवास पूर्ण निवृत्ति के साथ किया जाता है। जैसे दूध को गरम करने के लिये भगोनी को गरम करना आवश्यक है वैसे ही आत्मा को तपाने के लिये शरीर को तपाना आवश्यक है। आत्मा की पवित्रता और मन की शांति के लिए त्याग आवश्यक है।

 

 

अक्सर महिलायें व्रत उपवास की भावना बहुत रखती हैं पर चाय के कारण पीछे हट जाती हैं। चाय नहीं पियेंगे तो सिर दुखेगा अतः चाय ने उन्हे व्रत उपवास नही करने दिया। कुछ महिलायें हिम्मत करके उपवास व्रत करना प्रारंभ कर देती हैं किन्तु दो दिन पहले से टेन्शन शुरू हो जाती कि कल व्रत करूँगी तो सिर दुखेगा जिस दिन व्रत उपवास होता है सुबह से ही दर्द होने लगता है। पूजा में भी अच्छी तरह से मन नहीं लगता। दिन भर दर्द को दिमाग में रखकर दिन काट लेती हैं, और रात को सोकर काट लेती हैं। इंतजार है सुबह का कि सुबह हो और चाय पियें। चाय पीकर बड़ा आनंद सा आता है। जो चाय की आदत वाले हैं उनका उपवास चिडचिड़े स्वभाव के साथ होता है।

जबकि उपवास का अर्थ है परिणामों में शांति, आत्मा को उस दिन कषाय, पाप और टेंशन से दूर रखना। इस चाय ने धर्म ध्यान पूर्वक व्रत उपवास भी ना करने दिया। अब आप चिन्तन करो कि चाय ना पीते होते तो व्रत उपवास वाले दिन कैसा लगता। बड़ा आनंद मिलता। मैंने कई महिलाओं को इस विषय में समझाया तो उन्होंने चाय का त्याग किया, और आज वे एक ही बात कहती हैं कि माताजी यदि आपने चाय का त्याग न कराया होता तो हमें उपवास व्रत में इतना आनंद ना आता। अतः यदि धर्म मार्ग में आगे बढ़ना है तो चाय का व्यसन सबसे पहले त्याग करना होगा।

चाय कैसे छोड़े ?

बहुत आसान है। चाय छोडना कोई बड़ी बात नहीं, बस मन को संकल्पित करना होगा। ऐसा कौनसा काम है जो इंसान नहीं कर सकता। इंसान के अंदर भगवान बनने की शक्ति है, चाय छोडना कौन सी बड़ी बात है। चाय छोडने लिये मन पक्का कर लें और सिर दर्द से बिल्कुल ना डरें। पहले दिन दर्द होगा दुसरे दिन, थोडा और दर्द होगा। आप दूध की ओकाली बनाकर पी ले अर्थात में सोंठ काली मिर्च डालकर उबाले और पीले । तीसरे दिन दर्द उससे कम चौथे दिन उससे कम और एक सप्ताह में आपको ये भी नहीं लगेगा कि चाय कभी पी भी थी। इस तरह आपकी चाय छूट जायेगी और आप आनंदमयी उपवास करना प्रारंभ कर देंगे। दुनियां के किसी कोने में जाओ। चाय के कारण परेशान नहीं होना पड़ेगा।
स्वस्तिभूषण माताजी टर्निग पॉइंट पुस्तक आलेख
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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