6 साल बाद नसियां जी में फिर सजेगा चातुर्मास: 19 जुलाई को कोटा में होगा निर्यापक मुनिश्री 108 योगसागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश

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6 साल बाद नसियां जी में फिर सजेगा चातुर्मास: 19 जुलाई को कोटा में होगा निर्यापक मुनिश्री 108 योगसागर जी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश

 

आचार्य विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य और गृहस्थ अवस्था के लघु भ्राता का वर्षायोग नसियां जी दादाबाड़ी में, 51 स्वागत द्वारों और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में निकलेगा ऐतिहासिक जुलूस।

कोटा।

शिक्षा नगरी कोटा इस वर्ष एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक अवसर का साक्षी बनने जा रही है। छह वर्षों के लंबे अंतराल के बाद श्री आदिनाथ दिगम्बर जैन पुण्योदय अतिशय क्षेत्र, नसियां जी (दादाबाड़ी) में पुनः चातुर्मास का शुभ आयोजन होने जा रहा है। आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज के परम शिष्य, गृहस्थ अवस्था के लघु भ्राता तथा तप, त्याग और साधना के प्रतीक निर्यापक मुनिश्री 108 योगसागर जी महाराज वर्षायोग के लिए कोटा पधार रहे हैं। उनका भव्य मंगल प्रवेश 19 जुलाई को प्रातः 8 बजे सीएडी सर्किल से प्रारंभ होगा।

 

नसियां जी मंदिर के निदेशक हुकम जैन ‘काका’ ने बताया कि मंगल प्रवेश की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। भव्य शोभायात्रा सीएडी सर्किल से प्रारंभ होकर एस.एस. डेयरी, छोटा चौराहा, दादाबाड़ी, महावीर कॉम्प्लेक्स होते हुए नसियां जी मंदिर पहुंचेगी।

 

मार्ग में 51 भव्य स्वागत द्वार बनाए जाएंगे, जहां श्रद्धालु  मंगल गीतों और जयघोष के साथ मुनिश्री का अभिनंदन करेंगे। शोभायात्रा में पांच आकर्षक बैंड शामिल होंगे, जिनमें पंजाब के भटिंडा से विशेष बैंड भी आमंत्रित किया गया है। पारंपरिक मशक बाजा, जैन पाठशालाओं के बच्चों के बैंड, महिला मंडल, विभिन्न जैन मंदिरों के श्रद्धालु तथा सकल जैन समाज के हजारों लोग इस ऐतिहासिक आयोजन के साक्षी बनेंगे।

 

आयोजन समिति ने विशेष ड्रेस कोड भी निर्धारित किया है। महिलाओं के लिए केसरिया साड़ी तथा पुरुषों के लिए सफेद कुर्ता-पायजामा पहनने का आग्रह किया गया है।

 

वर्ष 2019 में नसियां जी में मुनिश्री 108 विनीतसागर जी महाराज का चातुर्मास आयोजित हुआ था। इसके छह वर्ष बाद पुनः यह पावन अवसर प्राप्त हो रहा है, जिससे कोटा सहित हाड़ौती क्षेत्र के जैन समाज में उत्साह और श्रद्धा का वातावरण है।

 

एक परिवार… जिसने संसार छोड़ मोक्षमार्ग को चुना

 

निर्यापक मुनिश्री 108 योगसागर जी महाराज का जीवन जैन धर्म की तप, त्याग और आध्यात्मिक साधना का अद्वितीय उदाहरण है। उनका संपूर्ण परिवार सांसारिक जीवन का त्याग कर जैन साधु-साध्वी परंपरा को समर्पित हो गया। मुनिश्री का पूर्व नाम ब्रह्मचारी अनंत जैन (अष्टगे) था। उनका जन्म 26 सितंबर 1956 को कर्नाटक के बेलगांव जिले के सदलगा में हुआ।

 

उनके पिता श्री मलप्पा जैन ने मुनि श्री मल्लीसागर जी महाराज तथा माता श्रीमन्ति जी ने आर्यिका समयमति माताजी के रूप में दीक्षा ग्रहण कर संन्यास जीवन अपनाया। इसी परिवार से आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज, पट्टाचार्य श्री समयसागर जी महाराज और मुनि श्री उत्कृष्टसागर जी महाराज जैसे महान संतों का अवतरण हुआ, जो इस परिवार की आध्यात्मिक विरासत को विशिष्ट बनाता है।

 

तप, साहित्य और साधना के अद्वितीय साधक

 

मुनिश्री ने वर्ष 1975 में ब्रह्मचर्य व्रत धारण किया, इसके बाद क्षुल्लक, ऐलक और वर्ष 1980 में आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज से मुनि दीक्षा ग्रहण की। वर्ष 2019 में उन्हें निर्यापक पद से विभूषित किया गया।

 

वे देशभर में अपनी कठोर तपस्या, ओजस्वी प्रवचन, साहित्य सृजन और आध्यात्मिक चिंतन के लिए प्रसिद्ध हैं। ‘आत्म शिल्पी आचार्य श्री विद्यासागर’ सहित अनेक धार्मिक ग्रंथों और काव्य रचनाओं के सृजक मुनिश्री करोड़ों मंत्र जाप, दीर्घकालीन उपवास और कठोर तप के लिए भी विख्यात हैं। उनके सान्निध्य में देशभर में अनेक पंचकल्याणक महोत्सव, वेदी प्रतिष्ठाएं और धर्म प्रभावना के कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुए हैं।

 

— संकलन : अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

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