संस्कारों से ही बनता है महान परिवार, बच्चों को जीवन मूल्य देना माता-पिता का प्रथम धर्म : आचार्य पुलक सागर महाराज
चित्तौड़गढ़।
विद्यासागर मांगलिक धाम में सकल दिगंबर जैन समाज के तत्वावधान में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में मंगलवार को आचार्य श्री 108 पुलक सागर महाराज ने संस्कार, परिवार, भारतीय संस्कृति और जैन परंपरा पर आधारित प्रेरणादायी प्रवचन दिया। उन्होंने कहा कि महान परिवार धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि श्रेष्ठ संस्कारों से बनते हैं। यदि बच्चों को बचपन से नैतिक शिक्षा, अनुशासन और जीवन मूल्य दिए जाएं, तो वही आगे चलकर समाज और राष्ट्र के आदर्श नागरिक बनते हैं।
आचार्य श्री ने कहा कि इतिहास केवल पढ़ने का विषय नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली प्रेरणा है। समाज अक्सर घटनाओं की चर्चा करता है, लेकिन उनके पीछे छिपे संदेश और आदर्शों को आत्मसात करने का प्रयास कम करता है।
प्रवचन के दौरान उन्होंने अयोध्या के धार्मिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जैन परंपरा में अयोध्या अनेक तीर्थंकरों की जन्मस्थली रही है तथा भविष्य के तीर्थंकरों के जन्म से जुड़ी मान्यताएं भी इससे जुड़ी हैं। उन्होंने श्रद्धालुओं से अयोध्या और श्री सम्मेद शिखरजी की श्रद्धापूर्वक वंदना करने का आह्वान किया।
आचार्य पुलक सागर महाराज ने कहा कि माता-पिता की जिम्मेदारी केवल संतान को जन्म देना नहीं, बल्कि उन्हें संस्कार, अनुशासन, नैतिक शिक्षा और जीवन के उच्च आदर्श प्रदान करना भी है। उन्होंने बच्चों में बढ़ती बहस, अनुशासनहीनता और पारिवारिक मूल्यों में आ रही कमी को संस्कारों के अभाव का परिणाम बताते हुए परिवारों से बच्चों के चरित्र निर्माण पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
संकलन: अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

