“मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज : एक युगद्रष्टा संत, जिन्होंने अध्यात्म को आधुनिक युग की भाषा दी”
गिरीडीह (मधुबन)
-आज के वैज्ञानिक और तीव्र परिवर्तनशील युग में,जब अध्यात्म को प्रायः कर्मकांड तक सीमित समझ लिया जाता है, ऐसे समय में गुणायतन प्रणेता राष्ट्रसंत मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज ने धर्म को जीवन जीने की एक वैज्ञानिक, तार्किक और व्यावहारिक पद्धति के रूप में स्थापित किया है। उनका व्यक्तित्व त्याग, तप, ज्ञान, करुणा, तर्क और आध्यात्मिक अनुभूति का अद्भुत समन्वय है। वे केवल जैन समाज के संत नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए प्रेरणा के स्रोत हैं।

मुनि श्री का संपूर्ण जीवन संत शिरोमणि आचार्य गुरुदेव श्री विद्यासागर जी महाराज की तपश्चर्या, अनुशासन, ज्ञान, संस्कृति संरक्षण और राष्ट्रधर्म की प्रेरणा से अनुप्राणित है। गुरुदेव विद्यासागर जी महाराज ने जिस आध्यात्मिक चेतना, संस्कृति संरक्षण और चरित्र निर्माण का महान अभियान प्रारंभ किया, मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज उसी गुरु परंपरा को आधुनिक संदर्भों के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। गुरु के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा, समर्पण और आज्ञापालन उनके प्रत्येक विचार, प्रत्येक संकल्प और प्रत्येक कार्य में स्पष्ट दिखाई देता है।
मुनि श्री की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह जैन आगमों के गूढ़ सिद्धांतों को आधुनिक विज्ञान, मनोविज्ञान और जीवन प्रबंधन से जोड़कर अत्यंत सरल, सहज और तर्कपूर्ण भाषा में प्रस्तुत करते हैं। भावना योग, कर्म सिद्धांत, समता, आत्मानुशासन, संस्कार, चरित्र निर्माण तथा आत्मा की वैज्ञानिक यात्रा जैसे विषयों पर उनकी व्याख्या लाखों लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही है। वे धर्म को केवल आस्था का विषय नहीं, बल्कि आत्मपरिवर्तन का विज्ञान मानते हैं।
युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता का सबसे बड़ा कारण यह है कि वह उन्हें केवल धार्मिक बनने की प्रेरणा नहीं देते, बल्कि लक्ष्य निर्धारण, अनुशासन, समय का सदुपयोग, सकारात्मक सोच, नैतिक जीवन, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्र निर्माण का संदेश भी देते हैं। उनके प्रवचन संवादात्मक, वैज्ञानिक और जीवनोपयोगी होते हैं, इसलिए देश-विदेश के हजारों युवा उनसे सहज रूप से जुड़ रहे हैं।
इसी दूरदर्शी चिंतन का साकार स्वरूप है तीर्थराज श्री सम्मेद शिखर में निर्माणाधीन “गुणायतन”। यह केवल एक भव्य धार्मिक परिसर नहीं, बल्कि आत्मा की 14 गुणस्थानों की यात्रा, कर्म सिद्धांत, जीव के आध्यात्मिक विकास, समवसरण, सुमेरु वंदन, अकृत्रिम जिनालय तथा आधुनिक तकनीक के माध्यम से जैन दर्शन को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाला अद्वितीय आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र है। यहाँ धर्म को केवल पढ़ाया नहीं जाएगा, बल्कि अनुभव कराया जाएगा।
इस संबंध में जानकारी देते हुए गुणायतन मध्यभारत के राष्ट्रीय प्रवक्ता अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’ ने बताया कि “गुणायतन” केवल एक निर्माण परियोजना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भारतीय आध्यात्मिक विरासत का ऐसा जीवंत केंद्र है, जहाँ श्रद्धा और विज्ञान, दर्शन और तकनीक, परंपरा और नवाचार का अद्भुत संगम दिखाई देगा। यह मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज की दूरदृष्टि, चिंतन और युगानुकूल धर्मदृष्टि का साकार स्वरूप है।
मुनि श्री बार-बार कहते हैं कि “धर्म का उद्देश्य केवल पूजा करना नहीं, बल्कि स्वयं को बदलना है।” जब व्यक्ति अपने विचार, व्यवहार और संस्कारों को बदलता है, तभी परिवार, समाज और राष्ट्र में सकारात्मक परिवर्तन आता है। यही संदेश उनके प्रत्येक प्रवचन और प्रत्येक अभियान का मूल है।
आज लाखों श्रद्धालुओं के लिए मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज केवल एक संत नहीं, बल्कि आत्मविश्वास, सकारात्मक सोच, नैतिक जीवन, चरित्र निर्माण और आत्मकल्याण के पथप्रदर्शक हैं। गुणायतन के माध्यम से वह जैन दर्शन को विश्व पटल पर एक वैज्ञानिक, मानवीय और सार्वभौमिक जीवनदर्शन के रूप में स्थापित करने का ऐतिहासिक कार्य कर रहे हैं।
निस्संदेह आने वाला समय मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज को उस युगद्रष्टा संत के रूप में स्मरण करेगा, जिन्होंने अपने पूज्य गुरुदेव आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के आदर्शों को आगे बढ़ाते हुए अध्यात्म को आधुनिक युग की भाषा दी,धर्म को अनुभव का विषय बनाया और भारतीय आध्यात्मिक विरासत को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में एक नई चेतना का सूत्रपात किया।
“गुणायतन केवल एक भवन नहीं, बल्कि युगद्रष्टा आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज के संस्कारों और मुनि श्री प्रमाण सागर जी महाराज की दूरदर्शी सोच का साकार स्वरूप है। आने वाले समय में यह स्थान अध्यात्म, संस्कृति, विज्ञान और आत्मानुभूति का वैश्विक केंद्र बनेगा। यह विश्वास दृढ़ होता है कि जब संकल्प शुद्ध हो, दृष्टि व्यापक हो और गुरु का आशीर्वाद साथ हो, तब धर्म केवल इतिहास नहीं रचता, बल्कि भविष्य का निर्माण भी करता है।”
— अविनाश जैन ‘विद्यावाणी’
राष्ट्रीय प्रवक्ता, गुणायतन मध्यभारत 9929747312

