नकारात्मक सोच छोड़ें, सकारात्मक सोच अपनाएं; मन रहेगा शांत, चेहरा रहेगा प्रसन्न : अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

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नकारात्मक सोच छोड़ें, सकारात्मक सोच अपनाएं; मन रहेगा शांत, चेहरा रहेगा प्रसन्न : अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

पुष्पगिरी में आचार्यश्री का प्रेरणादायी संदेश— हर नकारात्मक परिस्थिति में छिपा है सफलता और आत्मविकास का अवसर

पुष्पगिरी (मध्य प्रदेश)। अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज ने अपने प्रेरणादायी प्रवचन में कहा कि मनुष्य का जीवन उसकी सोच से बनता और बिगड़ता है। नकारात्मक सोच मन को दुःखी, परेशान और हैरान बनाए रखती है, जबकि सकारात्मक सोच मन को शांति प्रदान करती है और चेहरे पर स्वाभाविक प्रसन्नता लाती है।

आचार्यश्री ने कहा कि यदि व्यक्ति अपनी सोच को सकारात्मक बना ले, तो नकारात्मक शब्द भी जीवन में नई ऊर्जा और प्रेरणा का स्रोत बन सकते हैं। उन्होंने सरल उदाहरण देते हुए कहा— “मस्त राम मस्ती में, प्रभावना हो बस्ती में” तथा “अपना काम बनता, मंदिर में जाए जनता।” उन्होंने यह भी कहा कि यदि सीधी उंगली से घी न निकले, तो घी को गर्म कर लेना चाहिए, अर्थात परिस्थितियों के अनुसार सकारात्मक दृष्टिकोण और सही उपाय अपनाने चाहिए।

प्रवचन के दौरान आचार्यश्री ने बताया कि जीवन के हर नकारात्मक शब्द में सकारात्मक संदेश छिपा होता है। उन्होंने कहा कि जलन स्वयं को बेहतर बनाने की प्रेरणा देती है, नाराज़गी संवाद का अवसर बनती है, हार अभ्यास का हिस्सा है, दुविधा सही निर्णय की राह दिखाती है, अशांति आत्मचिंतन का अवसर देती है, डर आगे बढ़ने का साहस पैदा करता है और आलोचना स्वयं को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा देती है।

उन्होंने आगे कहा कि निराशा नई दिशा खोजने का समय है, गलती अनुभव का पाठ पढ़ाती है, अकेलापन स्वयं से जुड़ने का अवसर है, दबाव भीतर की शक्ति को जगाता है, संघर्ष जुनून पैदा करता है, कमजोरी मन को मजबूत बनाती है, अंधेरा प्रकाश का महत्व सिखाता है, संशय गहराई से सोचने की शुरुआत है, उदासी मन को संभालने का समय है और थकान रुककर स्वयं को समझने का अवसर देती है।

आचार्यश्री ने कहा कि हर नकारात्मक परिस्थिति में संभावनाओं का एक नया संसार छिपा होता है। आवश्यकता केवल उसे सही दृष्टि से देखने की है। उन्होंने कहा कि जीवन का वास्तविक खेल मन की सोच का है। “मन अच्छा तो सब कुछ अच्छा और मन खराब तो सब कुछ खराब।” इसलिए सकारात्मक सोच ही सुखी, सफल और शांत जीवन की सबसे बड़ी कुंजी है।

प्रचार-प्रसार संयोजक रोमिल पाटणी (सोनकच्छ) एवं नरेंद्र अजमेरा, पियूष कासलीवाल (औरंगाबाद) से प्राप्त जानकारी का संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी 9929747312

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