धामनोद में गूंजा धर्म का मंगल स्वर: आचार्य श्री सिद्धांत सागरजी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश, विधायक निधि से संत निवास हेतु ₹2.50 लाख की घोषणा

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धामनोद में गूंजा धर्म का मंगल स्वर: आचार्य श्री सिद्धांत सागरजी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश, विधायक निधि से संत निवास हेतु ₹2.50 लाख की घोषणा

 

11 पिच्छिका संघ के साथ हुआ भव्य आगमन, आहार चर्या के बाद गुजरी के लिए विहार; प्रवचन में बोले— “सुख साधनों में नहीं, साधना में है”

धामनोद।

 

नगर की पुण्यधरा उस समय आध्यात्मिक उल्लास से सराबोर हो उठी, जब परम पूज्य आचार्य श्री 108 सिद्धांत सागरजी महाराज का 11 पिच्छिका संघ सहित भव्य मंगल प्रवेश हुआ। खलघाट से विहार करते हुए आचार्य संघ धामनोद पहुंचा, जहां मुनि सेवा समिति एवं सकल दिगंबर जैन समाज ने ढोल-नगाड़ों और मंगलगान के साथ श्रद्धापूर्वक अगवानी कर नगर प्रवेश कराया।

 

 

समाज अध्यक्ष दीपक प्रधान एवं मीडिया प्रभारी यश जैन ने बताया कि धर्मसभा का शुभारंभ प्रीति जैन एवं सपना जैन द्वारा मंगलाचरण से हुआ। इसके पश्चात अपने प्रेरणादायी प्रवचन में आचार्य श्री सिद्धांत सागरजी महाराज ने कहा कि “सुख साधनों में नहीं, साधना में है।” उन्होंने कहा कि मनुष्य की इंद्रियां उसे सदैव बाहरी संसार की ओर ले जाती हैं, जबकि वास्तविक ज्ञान और आत्मकल्याण का मार्ग भीतर की यात्रा से प्रशस्त होता है। जीवन में केवल आंखें खोलकर ही नहीं, बल्कि विवेकपूर्वक आंखें बंद कर आत्मचिंतन करना भी आवश्यक है।

 

प्रवचन के पश्चात आचार्य संघ की आहार चर्या संपन्न हुई। इस अवसर पर विधायक कालूसिंह ठाकुर के प्रतिनिधि निलेश माहेश्वरी एवं वरिष्ठ पत्रकार मुकेश सोडाणी ने आचार्य श्री के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

 

 

कार्यक्रम के दौरान समाज अध्यक्ष दीपक प्रधान ने धामनोद में संत निवास निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग की मांग रखी। इस पर विधायक प्रतिनिधि निलेश माहेश्वरी ने विधायक निधि से ₹2.50 लाख की राशि उपलब्ध कराने की घोषणा की, जिसका उपस्थित समाजजनों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ स्वागत किया।

 

इस अवसर पर बावनगजा समिति के ट्रस्टी राजाभाई जैन, शैलेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे। आहार चर्या के उपरांत आचार्य श्री का संघ गुजरी के लिए विहार कर गया। पूरे कार्यक्रम की सफल व्यवस्था में महिला मंडल, मुनि सेवा समिति, कार्यकारिणी एवं सकल जैन समाज का सहयोग विशेष रूप से सराहनीय रहा।

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