सोनकच्छ से उठी ‘उपवास क्रांति’ की ऐतिहासिक हुंकार: हजारों लोगों ने लिया ‘हर मास एक उपवास’ का संकल्प

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सोनकच्छ से उठी ‘उपवास क्रांति’ की ऐतिहासिक हुंकार: हजारों लोगों ने लिया ‘हर मास एक उपवास’ का संकल्प

आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज, योगऋषि स्वामी रामदेव और पंडित प्रदीप मिश्रा की प्रेरणा से उमड़ा अभूतपूर्व जनसैलाब, संयम–स्वास्थ्य–साधना का बना राष्ट्रीय अभियान

सोनकच्छ/

मध्यप्रदेश के सोनकच्छ ने मंगलवार को आध्यात्म, संयम और जनजागरण के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया। स्थानीय कृषि उपज मंडी परिसर में अन्तर्मना आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज एवं योगऋषि स्वामी रामदेव की पावन प्रेरणा से आयोजित “हर मास एक उपवास” महाअभियान में हजारों श्रद्धालुओं ने एक साथ उपवास का संकल्प लेकर इसे जनआंदोलन का स्वरूप प्रदान किया।

 

 

भव्य कार्यक्रम का शुभारंभ मंगलाचरण और गुरुवंदना के साथ हुआ। दीप प्रज्ज्वलन पंडित प्रदीप मिश्रा, सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक राजेश सोनकर, प्रदीप पांडे, उज्ज्वल पाटनी, महेंद्र पाटोदी, प्रकाश अजमेरा, दिलीप हुमड़, एस.के. तिजारावाला सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों ने किया। सभी अतिथियों ने आचार्यश्री के चरणों में श्रीफल अर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।

उपाध्याय मुनि श्री पियूष सागरजी महाराज ने प्रेरक उद्बोधन देते हुए सभी अतिथियों और उपस्थित जनसमुदाय से “हर मास एक उपवास” का सामूहिक संकल्प कराया।

 

अपने ओजस्वी प्रवचन में आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि उपवास केवल भोजन का त्याग नहीं, बल्कि मन, विचार और आत्मा का परिष्कार है। उन्होंने कहा कि संयमित जीवन ही स्वस्थ जीवन का आधार है। सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और आत्मानुशासन मनुष्य को भीतर से शक्तिशाली बनाते हैं। उन्होंने प्रत्येक व्यक्ति से हर महीने कम से कम एक उपवास करने का आग्रह करते हुए इसे परिवार और समाज के स्वास्थ्य से जोड़ा।

प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा ने कहा कि जिस प्रकार योग घर-घर पहुँचा, उसी प्रकार “हर मास एक उपवास” का यह संकल्प भी जन-जन तक पहुँचेगा। उन्होंने जैन मुनियों के तप, त्याग और अनुशासन की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि जीवन में त्याग सीखना हो तो जैन संतों से सीखना चाहिए। उन्होंने घोषणा की कि अब शिव महापुराण कथा के माध्यम से भी इस अभियान का व्यापक प्रचार किया जाएगा।

मोटिवेशनल स्पीकर उज्ज्वल पाटनी ने सकारात्मक सोच, संयमित जीवनशैली और मोबाइल की बढ़ती लत से बचने का संदेश देते हुए कहा कि शरीर के साथ-साथ मन और नकारात्मकता का भी उपवास आवश्यक है।

 

इस अवसर पर गुरुदेव ने पंडित प्रदीप मिश्रा सहित सभी विशिष्ट अतिथियों का मोतियों की माला, प्रशस्ति-पत्र एवं साहित्य भेंट कर सम्मान किया। सांसद सुधीर गुप्ता, विधायक राजेश सोनकर और अन्य अतिथियों ने भी अभियान को समाजहित में अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

 

 

 

मध्यप्रदेश एवं राजस्थान के पतंजलि, भारत स्वाभिमान और युवा भारत संगठनों के पदाधिकारियों ने भी “हर मास एक उपवास—रचेंगे इतिहास” का संकल्प लेकर अभियान को जन-जन तक पहुँचाने का आह्वान किया।

अभियान के प्रवर्तक मुनि सहज सागरजी महाराज के अनुसार, आचार्य प्रसन्न सागरजी महाराज एवं योगऋषि स्वामी रामदेव की प्रेरणा से चल रहे इस अभियान से अब तक 15 करोड़ से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। अभियान के अंतर्गत उत्तम, मध्यम और सरल—तीन प्रकार के उपवास प्रोटोकॉल निर्धारित किए गए हैं, जिनका उद्देश्य स्वस्थ, संयमित और आध्यात्मिक जीवनशैली को जन-जन तक पहुँचाना है।

रोमिल पाटनी सोनकच्छ पीयूष कासलीवाल नरेन्द्र अजमेरा औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

 

 

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