गुरुभक्त राजेश पंचोलिया इंदौर अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज संघस्थ कुल 37संयमी महात्माओं में सभी उम्र के साधु विद्यमान हैं

धर्म

गुरुभक्त राजेश पंचोलिया इंदौर अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज संघस्थ कुल 37संयमी महात्माओं में सभी उम्र के साधु विद्यमान हैं

गुरुभक्त राजेश पंचोलिया इंदौर अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर महाराज संघस्थ कुल 37संयमी महात्माओं में सभी उम्र के साधु विद्यमान हैं। दीक्षा अवधि अनुसार 76 वर्षीय आचार्य श्री वर्धमान सागर जी का संयमी जीवन 57 वर्ष का हुआ है वहीं आर्यिकाओं में आचार्य श्री धर्म सागर जी से दीक्षित संघस्थ 78 वर्षीय आर्यिका श्री शुभ मति जी का संयमी जीवन 55 वर्षों का तथा आर्यिका श्री मुदित मति 87 वर्षीय होकर संयमी जीवन 11 वर्ष का हुआ।जहां न्यूनतम आयु 29 वर्षीय आर्यिका श्री पद्मयश मति एवम आर्यिका श्री दिव्ययश मति माताजी हैं वहीं मुनि श्री चिंतन सागर जी 39 वर्षीय युवा मुनि है।मुनियों में मुनि श्री प्रभव सागर जी 81 वर्षीय हैं ।
क्षुल्लक में 30 वर्षीय युवा श्री सुगुप्त सागर जी जी है
125 *दीक्षा में जयपुर एक मात्र नगर है जहाँ आचार्य श्री ने मुनि,आर्यिका, ऐलक,क्षुल्लक ओर क्षुल्लिका दीक्षा दी*।
सभी साधुओं का संक्षिप्त परिचय
1 वात्सल्य वारिधी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी जन्म सनावद 18 सितंबर 1950 दीक्षा तिथि 24 फरवरी 1969 आचार्य पद 24 जून 1990 लौकिक शिक्षा बी ए । क्रमांक 11, 12, तथा क्रमांक 25 छोड़कर शेष सभी साधु आप से दीक्षित हैं। सनावद के 19 साधुओं में आप सहित पंचोलिया परिवार के 7 साधु हुए है।
2 मुनि श्री हितेंद्रसागर जी जन्म बोली जयपुर जन्म 7 फरवरी 1977 मुनि दीक्षा ; 9 अक्टूबर 2008 एम कॉम। आपके पिता ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री भुवन सागर जी हैं
3 मुनि श्री प्रभवसागर जी जयपुर जन्म 19 फरवरी 1944 हायर सेकेंडरी 81 वर्ष में संयमी जीवन 10 वर्ष। भाई ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री सहिष्णु सागर जी थे।
4 मुनि श्री चिंतनसागर जी मुंबई जन्म 4 जून 1986 मुनि दीक्षा 14 अक्टूबर 2016 शिक्षा एम काम सी ए फाउंडेशन 39 वर्ष में संयमी जीवन 9 वर्ष।
5 मुनिश्री दर्शितसागर जी बड़वाह mp जन्म 4 जुलाई 1955 शिक्षा हाय स्कूल, 70 वर्ष में संयमी जीवन 9 वर्ष। पत्नी ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर आर्यिका श्री दर्शनामति हैं
6 मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी उदयपुर जन्म 20 नवंबर 1954 शिक्षा बीकॉम, 71 वर्षीय में 3 वर्ष संयमी जीवन पत्नी ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर आर्यिका श्री प्रणतमति हैं
7 मुनि श्री मुमुक्षुसागर जी धरियावद प्रतापगढ़ जन्म 5 मई 1955 मुनि दीक्षा 13 फरवरी 2023 शिक्षा हायर सेकेंडरी ,70 वर्षीय में 2 वर्ष संयमी जीवन
8 मुनि श्री प्रणीत सागर मुंबई जन्म 8 अक्टूबर 1953 मुनि दीक्षा 6 सितंबर 2024 शिक्षा इंजीनियर, 72 वर्षीय में 1 वर्ष का संयमी जीवन। माता ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर आर्यिका श्री मूर्ति मति थी।बहन भी आर्यिका श्री सुवैभव मति थी
9 मुनिश्री ध्येय सागर जी मेड़ता सिटी जन्म 13 सितंबर 1963 मुनि दीक्षा 20 अप्रैल 2025, एक वर्ष का संयमी जीवन।माता ने भी दीक्षा ली थी शिक्षा स्नातक
10 मुनि श्री भुवन सागर जी जयपुर जन्म 15 अगस्त 1950 मुनि दीक्षा 20 अप्रैल 2025 शिक्षा बी कॉम एक वर्ष का संयमी जीवन।पुत्र भी आचार्य श्री से दीक्षित होकर मुनि श्री हितेंद्र सागर जी हैं ।
11 मुनि श्री गुणोदय सागर जी का जन्म 21 जनवरी 1948 होकर आपने पदमपुरा में 22 फरवरी 2026 को सीधे मुनि दीक्षा ली।

आर्यिका गण

12 आर्यिका श्री शुभमति जी खुरई का जन्म सन 1948 में हुआआचार्य श्री धर्म सागर जी से आर्यिका दीक्षा 5 नवंबर 1971 को हुई। शिक्षा 9 वी है ।
13 आ श्री चैत्यमती जी जन्म केजड़ राजस्थान सन 1953 दीक्षा गुरु आचार्य श्री अजीत सागर जी से सन 1988 शिक्षा 5 वी
14 आ श्री विलोकमति जी सलूंबर जन्म 31 जनवरी 1961 आर्यिका दीक्षा 15 फरवरी 1997 शिक्षा 5 वी
15 आ श्री दिव्यांशुमति जी बांसवाड़ा जन्म 5 मई 1947 आर्यिका दीक्षा 18 नवंबर 2010 शिक्षा बी ए पॉलिटेक्निक साइंस
माता पिता भी साधु
16आ श्री पूर्णिमामति जी , निवाई जन्म 17 अक्टूबर 1978 आर्यिका दीक्षा 1 फरवरी 2013 शिक्षा हायर सेकेंडरी
17 आ श्री मुदितमति जी पारसोला उदयपुर जन्म सन 1938 आर्यिका दीक्षा 20 फरवरी 2015 शिक्षा 5 वी
18 आ श्री विचक्षणमति जी जोबनेर जन्म 29 नवंबर 1963 आर्यिका दीक्षा 29 अप्रैल 2015 शिक्षा मेट्रिक विशेष पति माता ओर सास ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षा ली।
19 आ श्री समर्पितमति जी , उदयपुर जन्म 23 मार्च 1963 आर्यिका दीक्षा 29 अप्रैल 2015 शिक्षा बी ए ।विशेष माता ने भी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी से दीक्षा ली थी।
20 आ श्री निर्मुक्तमति जी किशनगढ़ जन्म 15 अगस्त 1958 दीक्षा 29 अप्रैल 2015 शिक्षा 11 वी
21 आ श्री विनम्रमति जी महाराष्ट्र जन्म 1966 दीक्षा 27 नवंबर 2015 चौथी
पति ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर क्षुल्लक श्री प्राप्ति सागर जी बने
22 आ श्री दर्शनामति जी बड़वाह mp 22 नवंबर 1962 दीक्षा 14 अक्टूबर 2016 शिक्षा बी ए पति भी आचार्य श्री से दीक्षित होकर मुनि श्री दर्शित सागर जी हैं
23 आ श्री देशनामति जी सनावद 14 मार्च 1959 दीक्षा 14 अक्टूबर 2016 शिक्षा बी ए विशेष भारतीय स्टेट बैक के मैनेजर से त्यागपत्र देकर दीक्षा ली। आपके पिता स्वतंत्रता सेनानी रहे।
24 आ श्री महायश मति जी सनावद 3 जनवरी 1989 दीक्षा 25 अप्रैल 2018 शिक्षा m s c कंप्यूटर साइंस विशेष दादाजी ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री चारित्र सागर जी थे।
25 आ श्री देवर्धिमति जी अकलुज महाराष्ट्र में 15 अक्टूबर 1983 को जन्म दीक्षा गुरु आर्यिका श्री प्रशांत मति से दीक्षा 8 मार्च 2019 को ली शिक्षा बी कॉम
26 आ श्री प्रणत मति जी उदयपुर सन 1961 आर्यिका दीक्षा 29 अगस्त 2022 शिक्षा स्नातक विशेष पति ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी हैं
27 आ श्री निर्मोहमति जी सनावद महेश्वर mp 4 जुलाई 1962 दीक्षा 5 अक्टूबर 2022 शिक्षा हायर सेकेंडरी विशेष पिता ने आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री चारित्र सागर जी थे।
28 आ श्री पद्मयश मति जी सनावद 12 सितंबर 1996 दीक्षा 5 अक्टूबर 2022
शिक्षा b b a किया
29 आ श्री दिव्ययश मतिजी कोटा 3 मई 1996 दीक्षा 5 अक्टूबर 2022 शिक्षा पॉलिटेक्निक ।
30 आर्यिका श्री जिनेश मति गोहाटी असम जन्म 9 अक्टूबर 1945 दीक्षा 5 सितंबर 2024 शिक्षा 8 वी
31 आ श्री प्रेक्षा मति जी धरियावद 20 दिसंबर 1955 दीक्षा 6 सितंबर 2024 शिक्षा 8 वी।विशेष पति ने भी आचार्य श्री से दीक्षा लेकर मुनि श्री पद्म कीर्ति सागर थे
32 ऐलक श्री हर्षसागर ,धरियावद जन्म7 जुलाई 1949 दीक्षा 4 मार्च 2025 शिक्षा 10 ,पिता भी साधु थे।
33 क्षु श्री प्राप्ति सागर का जन्म महाराष्ट्र 1 जून 1956 में हुआ । दीक्षा आचार्य श्री से 6 सितंबर 2024 को हुई। शिक्षा 10 तक। पत्नी और भाई भी आचार्य श्री से दीक्षित होकर मुनि श्री परमानंद सागर जी एवं आर्यिका श्री विन्रम मति माताजी है
34 क्षुल्लक श्री सुभग सागर जी का जन्म 1 जून 1952 को झांतला mp में हुआ। लौकिक शिक्षा 8 वी होकर पदमपुरा में आपकी 26 फरवरी 2026 को दीक्षा हुई
35 क्षुल्लक श्री सुगुप्त सागर जी का जन्म बीड़ महाराष्ट्र में 20 नवंबर 1996 को हुआ आपकी पदमपुरा में क्षुल्लक दीक्षा 26 फरवरी 2026 को हुई
36 क्षुल्लक श्री प्रतिज्ञा सागर जी का जन्म सलूम्बर में 25 मार्च 1957 को हुआ लौकिक शिक्षा b com होकर आपकी दीक्षा जयपुर में 29 अप्रैल 2026 को हुई
आपकी पत्नी ने उसी दिन क्षुल्लिका दीक्षा लेकर श्री प्रदीप्त मति जी बनी।
37 क्षुल्लिका श्री प्रदीप्त मति जी का जन्म 1 जनवरी 1959 को हुआ। लौकिक शिक्षा प्राथमिक होकर 29 अप्रैल 2026 जयपुर में आपकी दीक्षा हुई उसी दिन पति ने भी दीक्षा ली।

जिस प्रकार राजनीति में भाई भतीजावाद परिवारवाद होता है संघ में भी परिवारवाद हुआ किंतु वह परिवारवाद अनुठा अध्यात्म की दृष्टि से हुआ यहां किसी साधु की माता ने दीक्षा ली ,किसी के भाई ने दीक्षा ली,किसी के दादाजी ने ,बुआजी किसी की पत्नी ने दीक्षा , किसी की बहन ने दीक्षा ली ऐसा परिवारवाद के अनेक साधु संघस्थहै जो अन्य को भी प्रेरणा देते है। समाधिस्थ मुनि श्री चारित्र सागर जी की दीक्षा के बाद उनकी पोती आर्यिका श्री महायश मति ओर बेटी आर्यिका श्री निर्मोह मति बनी।मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने पहले दीक्षा ली बाद में पिता भी मुनि श्री भुवन सागर जी बने, मुनि श्री प्रभव सागर जी के पूर्व उनके भाई भी मुनि श्री सहिष्णु सागर जी ने भी एक साथ दीक्षा ली ।मुनि श्री दर्शित सागर जी ओर आर्यिका श्री दर्शना मति पूर्व पति पत्नी ने एक साथ दीक्षा ली।मुनि श्री प्रबुद्ध सागर जी ओर आर्यिका श्री प्रणत मति पूर्व पति पत्नी ने भी एक साथ दीक्षा ली। मुनि श्री प्रणित सागर जी की पूर्व माता ने भी आचार्य श्री से दीक्षा ली।उनकी बहन भी आर्यिका थी। आर्यिका श्री दिव्यांशु मति के पूर्व माता पिता भी साधु थे। आर्यिका श्री समर्पित मति की माता ने भी दीक्षा ली थी। आर्यिका श्री विचक्षण मति की माता, सास और पति ने भी आचार्य श्री से दीक्षा ली थी। आर्यिका श्री विन्रम मति के पति ने भी क्षुल्लक दीक्षा लेकर श्री प्राप्ति सागर जी बने। आर्यिका श्री महायश मति जी के दादाजी भी मुनि थे ,आर्यिका श्री निर्मोह मति जी के पिता भी साधु थे आर्यिका श्री प्रेक्षा मति जी के पति ने भी दीक्षा ली थी। क्षुल्लक श्री प्राप्ति सागर जी के भाई भी मुनि श्री परमानंद सागर जी थे।पत्नी भी आर्यिका हैं।
इसी प्रकार क्षुल्लक श्री प्रतिज्ञा सागर जी एवं क्षुल्लिका श्री प्रदीप्त मति भी पति पत्नी ने एक साथ दीक्षा 29 अप्रैल 2026 को जयपुर में दीक्षा ली।
यह जानकारी वर्तमान 37साधुओं के साधु परिजनों की हैं।समाधिस्थ शिष्य साधुओं की जानकारी नहीं दी। शेष उन शिष्यों में भी भाई_ भाई पति_ पत्नी और साधु के पिता माता ओर पुत्र ने भी दीक्षा ली।
संकलन आर्यिका श्री दिव्ययश मति
संघस्थ शिष्या आचार्य श्री वर्धमान सागर जी
संपर्क राजेश पंचोलिया इंदौर 8965065065 9926065065

Acharya Shri Vardhman Sagar Maharaj Sangh: A Brief Profile of the 37 Ascetics

According to devotee Rajesh Pancholiya (Indore), the Sangh of Acharya Shri 108 Vardhman Sagar Maharaj presently consists of 37 ascetics, representing almost every age group and stage of monastic life.

Acharya Shri Vardhman Sagar Maharaj, aged 76, has completed 57 years of ascetic life. Among the Aryikas, Aryika Shri Shubhmati Mataji, aged 78 and initiated by Acharya Shri Dharm Sagar Ji, has completed 55 years of ascetic life, while Aryika Shri Muditmati Mataji, aged 87, has completed 11 years of ascetic life.

The youngest members of the Sangh are 29-year-old Aryika Shri Padmayash Mati Mataji and Aryika Shri Divyayash Mati Mataji. Among the monks, Muni Shri Chintan Sagar Ji, aged 39, is the youngest, whereas Muni Shri Prabhav Sagar Ji, aged 81, is the senior-most monk. Among the Kshullaks, Kshullak Shri Sugupt Sagar Ji, aged 30, is the youngest.

Jaipur – A Unique Centre of Initiation

Jaipur holds a unique distinction as the only city where Acharya Shri Vardhman Sagar Maharaj has bestowed all five forms of Digambar Jain initiation—Muni, Aryika, Ailak, Kshullak and Kshullika Diksha.

Brief Profiles of the 37 Ascetics

The Sangh comprises 11 Munis, 20 Aryikas, 1 Ailak, 4 Kshullaks and 1 Kshullika, hailing from different parts of India. They represent diverse educational backgrounds—from primary schooling to graduates, engineers, commerce professionals and postgraduates.

Many of them embraced renunciation after distinguished family and professional lives. Several former couples accepted Diksha together, while in many families parents, children, siblings and even grandparents later followed the same spiritual path. These examples demonstrate how spiritual inspiration spread through entire families under the guidance of Acharya Shri Vardhman Sagar Maharaj.

A Unique Spiritual Legacy

Rajesh Pancholiya observes that while politics is often associated with family dynasties, the Sangh reflects an entirely different kind of “family tradition”—one rooted in spirituality rather than inheritance.

Within the Sangh, there are inspiring instances where:

Parents and children both embraced monkhood.

Brothers accepted Diksha.

Husband and wife renounced worldly life together.

Sisters, grandparents and other close relatives also entered the ascetic order.

Entire families became dedicated to the path of renunciation under the guidance of Acharya Shri Vardhman Sagar Maharaj.

Among these inspiring examples are:

Muni Shri Hitendra Sagar Ji accepted Diksha first, followed later by his father, Muni Shri Bhuvan Sagar Ji.

Muni Shri Darshit Sagar Ji and Aryika Shri Darshanamati were formerly husband and wife and accepted Diksha together.

Muni Shri Prabuddha Sagar Ji and Aryika Shri Pranatmati also embraced renunciation together.

Aryika Shri Mahayash Mati and Aryika Shri Nirmoha Mati belong to the family of the late Muni Shri Charitra Sagar Ji.

Several Aryikas and Munis have parents, siblings, spouses or grandparents who also became ascetics.

These remarkable examples continue to inspire countless devotees towards the path of spirituality and renunciation.

Compiled by: Aryika Shri Divyayash Mati

(Disciple of Acharya Shri Vardhman Sagar Maharaj)

Information Source: Rajesh Pancholiya, Indore 8965065065 9926065065

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