आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज के सानिध्य में तारंगा तीर्थ पर भक्ति भाव के साथ हो रही सिद्धों की आराधना 

धर्म

आचार्य श्री आर्जव सागर महाराज के सानिध्य में तारंगा तीर्थ पर भक्ति भाव के साथ हो रही सिद्धों की आराधना 

    तारंगा 

साढ़े तीन करोड़ मुनियों की निर्वाण भूमि तारंगा तीर्थ पर भक्ति आस्था श्रद्धा का समन्वय देखने को मिल रहा है एक और जहां आचार्य श्री 108 आर्जव सागर जी महाराज ने इस तीर्थ भूमि को नमन करते हुए वंदना की वही आचार्य श्री के सानिध्य में भव्यता के साथ सिद्ध चक्र महामंडल विधान किया जा रहा है। जिसमें मुंबई सूरत अहमदाबाद आदि अनेक महानगरों एवं अन्य स्थानों से भक्त पधार कर धर्म आराधना कर कर्म निर्जरा कर रहे हैं।

 

 

शनिवार की दिव्य अनुपम बेला में सिद्ध चक्र महामंडल विधान करते हुए सिद्धों की आराधना की एवम 128 अर्ध समर्पित किए गए सभी भक्ति में झूमते हुए हिलोरे लेते भक्ति में सराबोर होकर डुबकी लगा रहे हैं।

आचार्य श्री द्वारा सिद्धों के गुणों का महत्व भी समझाया जा रहा है।

 

क्या है सिद्धचक्र महामंडल विधान 

 

सिद्ध चक्र महामंडल विधान में सिद्धों का गुणानुवाद किया जाता है, सिद्ध दशा प्रगट करने का विधान बताया जाता है, और अनेक प्रकार के मंत्र और बीजाक्षरों की स्थापना की जाती है।..

 

 

सिद्धचक्र विधान करने से आध्यात्मिक शांति मिलती है, आत्मबल बढ़ता है, और जीवन में सकारात्मकता आती है. सिद्धचक्र विधान करने से मनोरथ पूरे होते हैं और जीवन के चक्रों से मुक्ति मिलती है. सिद्धचक्र विधान करने से आत्मज्ञान और मोक्ष की दिशा में मार्गदर्शन मिलता है, एवं अष्टाह्निका में भाव सहित आठ दिन श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान करके 49 वें भव में सिद्धत्व की प्राप्ति होती है।

🔷सिद्धचक्र विधान से जुड़ी खास बातें:

सिद्धचक्र विधान में सिद्धों का गुणानुवाद किया जाता है. 

सिद्धचक्र विधान में सिद्ध दशा प्रगट करने का विधान बताया जाता है. सिद्धचक्र विधान में अनेक प्रकार के मंत्र और बीजाक्षरों की स्थापना की जाती है. 

सिद्धचक्र विधान में सिद्ध भगवान की पूजा की जाती है. 

🔷सिद्धचक्र विधान में समस्त सिद्ध समूह की आराधना की जाती है. 

सिद्धचक्र विधान में जीवन के चक्रों से मुक्ति मिलती है. 

सिद्धचक्र विधान में आत्मज्ञान और मोक्ष की दिशा में मार्गदर्शन मिलता है. सिद्धचक्र विधान में आध्यात्मिक शांति मिलती है. 

सिद्धचक्र विधान में आत्मबल बढ़ता है.

 

।। मैना सुन्दरी ने श्री सिद्धचक्र विधान रचाकर राजा श्रीपाल का कुष्ठ रोग का निवारण किया ये शाश्वत सत्य है।

इसी प्रकार हम भी भाव सहित इस विधान के माध्यम से सभी प्रकार के रोग, शोक, दुःख, दारिद्र से मुक्ति पा सकते है

        अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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