जीवन एक कला है.. हँसते मुस्कुराते जीना, उससे भी बड़ी कला है..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

उज्जैन मध्यप्रदेश।
अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागरजी महाराज ने भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि आज आदमी की हँसी खो गई है। नाभि से उठने वाली हँसी दुर्लभ हो गई है। अगर हम मनुष्य जाति को हँसना, मुस्कुराना सिखा सकें तो वह पूरी मनुष्य जाति के लिए एक वरदान सिद्ध होगा। जो दिल खोल कर हँसता है, वह निरोगी और दीर्घायु होता है।
जीवन में यूं तो अनेक संघर्ष हैं, और कोई ना कोई खींचतान लगी ही रहती है। मगर वे क्षण बेशकीमती होते हैं, जो जीवन को गुदगुदा हट दे जाते हैं। लोग आपको कैसा भी अपमानित क्यों न करें-? पर यदि आप में हास्य और मधुर घोल देने की कला है, तो आप दु:ख के क्षणों को भी आनन्द में तब्दील कर सकते हैं। क्योंकि हँसी मनुष्य को ईश्वरीय वरदान है। 

पृथ्वी पर केवल मनुष्य ही एक ऐसा प्राणी है, जिसे हँसना मुस्कुराना आता है। नारकीयों का तो हँसने का सवाल ही नहीं है,, और देवताओं को हँसने की जरूरत ही नहीं है।

अब मैं पूछता हूँ -?
क्या तुमने कभी किसी भैंस को हँसते हुए देखा है-? क्या तुमने कभी किसी गधे को मुस्कुराते हुए देखा है-?
प्लीज देखना भी मत । कोई पशु कभी नहीं हँसता। केवल मनुष्य ही हँसता और मुस्कुराता है। हँसना खुशियों का खजाना है। वह आदमी दुनिया का सबसे बड़ा दरिद्री और निर्धन है, जो खुलकर नहीं हँस सकता। संसार में रुदन तो सबके पास है। रोना तो सबके जीवन में है। अगर तुम किसी को कुछ दे सकते हो, तो केवल एक मुस्कुराहट दे सकते हो। इसी का नाम जिंदगी है। किसी को रुला कर, पीड़ा पहुँचा कर मंदिर जाना, कभी धर्म नहीं हो सकता है। पर याद रखना — तुम्हारी हँसी कैकई के कान भरकर, और अयोध्या में आग लगाने वाली मंथरा जैसी नहीं होनी चाहिए। तुम्हारी हँसी में किसी का उपहास नहीं होना चाहिए।


मुस्कुराते रहिए, हँसते-हँसाते रहिए.. हँसी परम धन है,, मुस्कुराहट सबसे बड़ा वशीकरण मंत्र है…!!!
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
