धर्मरूपी त्रिवेणी संघों का होगा ऐतिहासिक मंगल मिलन रविवार को कोटा पर टिकी रहेंगी सभी की निगाहें
कोटा।
शैक्षणिक एवं औद्योगिक नगरी के रूप में विख्यात कोटा इन दिनों धार्मिक चेतना का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। विगत चार माह से संपूर्ण हाड़ौती अंचल में जिनधर्म की प्रभावना की अविरल गंगा प्रवाहित हो रही है। इसी क्रम में रविवार, 28 जून 2026 को कोटा नगर एक ऐतिहासिक एवं दुर्लभ धार्मिक क्षण का साक्षी बनने जा रहा है, जिस पर सम्पूर्ण जैन समाज की निगाहें टिकी हुई हैं।
यह शुभ अवसर होगा परम पूज्य समाधिस्थ आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज एवं नवाचार्य श्री 108 समयसागर जी महाराज के परम प्रभावक आज्ञानुवर्ती शिष्यों मुनि श्री 108 निष्पक्षसागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 निष्पृहसागर जी महाराज ससंघ, जो वर्तमान में श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, तलवंडी (कोटा) में विराजमान हैं, तथा मुनि श्री 108 निरोगसागर जी महाराज ससंघ, जो विज्ञाननगर, कोटा में विराजमान हैं, के भव्य मंगल मिलन का।


इसी के साथ भारत गौरव तीर्थ संवर्धिका, स्वस्तिधाम प्रणेत्री, परम विदुषी लेखिका गणिनी श्रमणी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माताजी ससंघ भी इन दिनों कोटा में विराजमान हैं। इस प्रकार ज्ञान, तप और संयम की त्रिवेणी स्वरूप तीनों पावन संघों का यह दुर्लभ संगम धर्मप्रेमियों के लिए अविस्मरणीय अवसर होगा।


यह ऐतिहासिक मंगल मिलन रविवार, 28 जून 2026 को प्रातः लगभग 7:30 बजे श्री महावीर दिगम्बर जैन मंदिर, तलवंडी के बाहर कपिल मेडिकल के समीप होगा। यह अलौकिक मिलन जिनधर्म की प्रभावना, विनय एवं समरसता का अनुपम संदेश देगा तथा निश्चित ही इतिहास के स्वर्णिम पन्नों में अपना स्थान बनाएगा।

उल्लेखनीय है कि मुनि श्री 108 निष्पक्षसागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 निष्पृहसागर जी महाराज ने विगत चार माह तक रामगंजमंडी की पावन धरा पर अभूतपूर्व धर्म प्रभावना की। उनके सान्निध्य में ऐसे अनेक धार्मिक एवं सामाजिक कार्य सम्पन्न हुए, जिन्हें नगरवासी युगों-युगों तक स्मरण करेंगे। रामगंजमंडी में जो कार्य कभी असंभव प्रतीत होते थे, वे उनके प्रेरणास्पद मार्गदर्शन में संभव होकर इतिहास का हिस्सा बन गए।
वहीं मुनि श्री 108 निरोगसागर जी महाराज भी हाड़ौती की पावन धरा पर जिनधर्म की ध्वजा को निरंतर ऊँचा कर रहे हैं और अपने संयममय जीवन से समाज को प्रेरणा प्रदान कर रहे हैं।
दूसरी ओर गणिनी आर्यिका 105 श्री स्वस्तिभूषण माताजी ने विश्वविख्यात स्वस्तिधाम तीर्थ जैसी अनुपम कृति का सृजन कर जैन समाज को अमूल्य धरोहर प्रदान की है। उनकी प्रेरणा से केशवरायपाटन तीर्थ का कायाकल्प भी निरंतर प्रगति पर है। इन दिनों कोटा प्रवास के दौरान माताजी संत निवास लोकार्पण सहित अनेक धार्मिक अनुष्ठानों एवं धर्म प्रभावना के विविध कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को आध्यात्मिक दिशा प्रदान कर रही हैं।
– अभिषेक जैन लुहाड़िया, रामगंजमंडी
मो.: 99297 47312
