अंकित जैन: 30 की उम्र में संसार त्यागा, मुनि सुधासागर महाराज से ली ब्रह्मचर्य दीक्षा
नईसराय।
जैन दर्शन में त्याग, तपस्या और आत्म-साधना को सर्वोपरि स्थान दिया है। इसी कठिन पथ पर चलते हुए नईसराय कस्बे के एक संस्कारी युवा ने मात्र 30 वर्ष की आयु में सांसारिक मोह-माया को अलविदा कह दिया है। कस्बे के धर्मनिष्ठ युवक अंकित जैन ने घर-गृहस्थी और सांसारिक सुखों का परित्याग कर मोक्ष मार्ग की ओर कदम बढ़ा दिए हैं।
उन्होंने तीर्थ उद्धारक, परम पूज्य निर्यापक मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के श्रीचरणों में खुद को पूर्णतः समर्पित कर ब्रह्मचर्य व्रत अंगीकार किया है।

गत दिनों गुना में मुनि श्री सुधा सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में भव्य पंचमुखी पंचकल्याणक महोत्सव आयोजित हुआ। इस पावन अवसर पर अंकित जैन ने जैन धर्म के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा दिखाते हुए धर्मध्वजा की पहली सीढ़ी यानी ब्रह्मचारी पद को प्राप्त किया। मुनि श्री ने उन्हें दीक्षित कर अपने संघ में शामिल किया, जिसके बाद उन्हें ब्रह्मचारी अंकित भैया के रूप में नया नाम मिला। उनके इस निर्णय से नईसराय अंचल का नाम गौरवान्वित हुआ है।

कस्बे के युवा अंकित जैन बने ब्रह्मचारी।
सांसारिक सुख-सुविधाओं और मोबाइल से बनाई दूरी, बनारस से जैन दर्शन की शिक्षा लेकर गुरु चरणों में अर्पित किया जीवन


बनारस से ली शिक्षा, अब करेंगे कठिन साधना
अंकित जैन की प्रारंभिक शिक्षा नईसराय में ही संपन हुई थी। इसके बाद उन्होंने बनारस जाकर जैन दर्शन की गूढ़ शिक्षा प्राप्त की और स्वयं को धर्म साधना के लिए तैयार किया। ब्रह्मचर्य व्रत धारण करने के बाद अंकित जैन ने अब परिवार, घर और मोबाइल जैसी भौतिक वस्तुओं का हमेशा के लिए त्याग कर दिया है। वे अब महाराज श्री के संघ में रहकर पद विहार करेंगे और कठिन तपस्या करते हुए भविष्य में मुनि दीक्षा ग्रहण करने के भाव के साथ अपनी आत्म-कल्याण की मंजिल की ओर आगे बढ़ेंगे।
संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
