*चक्रवर्ती विवाह वीरोदय तीर्थ स्थल पर* सुरेश चंद्र गांधी नौगामा जिला बांसवाड़ा राजस्थान की रिपोर्ट—–
बांसवाड़ा
परम पुज्या 105 श्री विज्ञानमति माताजी के आशीर्वाद से एवं परम पूज्या 105 श्री पवित्रमति माताजी के 2026 के चतुर्मास के मुख्य कलश स्थापना कर्ता परिवार श्रीमान पलाश दोसी देव शास्त्र गुरु के परम भक्त हैं आप समाधिस्थ श्री विद्यासागर जी गुरुदेव, नवाचार्य समय सागर जी गुरुदेव, सुधा सागर जी गुरुदेव, वीर सागर जी गुरुदेव के परम भक्त हैं आप गुरुओं के आहार विहार निहार में सदैव अग्रणी रहते हैं
दिनांक 19 06 26 को श्री तीर्थ क्षेत्र विरोदय नगर बांसवाड़ा में श्री पलाश दोसी (अरथूना) और श्रीमती स्मृति दोसी (बागीदौरा) का चक्रवती विवाह (पाच् दिवसीय कार्यक्रम) श्री उपेंद्र शास्त्री (कोलकाता) विधानाचार्य एवं श्री राजेश जैन संगीतकार (बागीदौरा) की स्वर लहरियो के माध्यम से विभिन्न रीति रिवाज एव विधि विधान पूर्वक बड़े उत्साह एवं शाही तरीके से संपन्न हुआ,प्रकृति का भी आशीर्वाद प्राप्त हुआ सभी सगे संबंधी, परिवारजन, मित्रों परिचितजन, रिश्तेदारो,स्टाफ साथी, सभी का प्रत्यक्ष- अप्रत्यक्ष आशीर्वाद मिला श्री पलाश भैया द्वारा भी अतिथियों की अद्भुत, अद्वितीय, सराहनीय व्यवस्था की |आपके प्रेरणादाई, अनुकरणीय चक्रवती विवाह की हम सभी अनुमोदना करते हैं एवं प्रभु से प्रार्थना करते हैं कि आपका दाम्पत्य जीवन उत्तरोत्तर प्रगति को प्राप्त हो, चक्रवर्ती विवाह के अंतर्गत प्रतिदिन आप द्वारा अभिषेक पूजन किया गया,विवाह के पूर्व में, प्रथम दिन आप द्वारा पंच परमेष्ठी विधान किया गया सांय:काल में आप द्वारा एक थाल में विभिन्न काव्यों द्वारा भक्तामर दीपक अर्चना की गई एवं द्वितीय थाल में आपके बड़े पापा श्री अरविंद जी द्वारा बोली के माध्यम से विभिन्न काव्यों सहित दीपक अर्चना की गई एवं सभी भक्तो द्वारा भक्तांबर आरती की गई विवाह के दिन भक्तामर विधान किया गया, तत्पश्चात विवाह की रसमें शुरू की गई, विवाह के पश्चात आप द्वारा एक सप्ताह ब्रह्मचर्य व्रत के नियम लिए गए जीवन पर्यंत जमीकंद, कंदमूल का त्याग किया गया,सप्त व्यसन का भी त्याग किया गया, आजीवन आप द्वारा शुद्ध भोजन,सात्विक भोजन, सोज का भोजन ग्रहण करने का नियम लिया गया, साथ ही विवाह पश्चात पंचतीर्थ यात्राओं का निर्णय लिया गया जो अनवरत जारी है*
