तेल की बूंद को झूठ का पानी कभी डूबो नहीं सकता..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज

धर्म

तेल की बूंद को झूठ का पानी कभी डूबो नहीं सकता..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
रंभापुरा
गायत्री विद्या मंदिर हाईस्कूल रंभापुरा
में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने कहा कि। सत्य को न तलवार काट सकती है, न ज़हर मार सकता है और न ही अग्नि जला सकती है। सत्य को धन के बल पर दबाया भी नहीं जा सकता। मौन स्वयं सत्य है, जबकि झूठ सत्य का वस्त्र पहनकर डांस करता है। परन्तु आखिर कब तक-?

 

एक व्यक्ति जान बचाकर भागता हुआ एक संत के चरणों में आकर बैठ गया। बोला गुरूदेव – मेरे पीछे तीन बदमाश नंगी तलवारें लेकर मुझे मारने आ रहे हैं। आप जीवन दान दो। सन्त ने कहा – वो सामने रूई का ढ़ेर लगा है, उसमें छिप जाओ, वह जाकर छिप गया। उतने में वो बदमाश आ गये। सन्त से पूछा – महात्मा जी, यहाँ कोई व्यक्ति आया क्या-? सन्त ने कहा – हाँ आया था। बदमाश ने पूछा कहाँ है वो-? सन्त ने कहा – वो रूई के ढ़ेर में छिपा है। बदमाश बोले – सन्त श्री आप भी मजाक करते हैं। रूई के ढ़ेर में वो क्यों छिपेगा-? सन्त ने कहा – वहीं छिपा है। वे बदमाश, सन्त को भला बुरा कहते हुये चले गये। जैसे ही बदमाश गये – वह व्यक्ति बाहर आया और सन्त से बोला – आप बड़े ढोंगी सन्त महात्मा हो। आपने हमको छिपा भी दिया और बदमाशों को बता भी दिया। आप तो मेरी जान से खिलवाड़ कर रहे थे । तब सन्त ने कहा – अरे भाई! हमने तुम्हें रूई से नहीं ढका था, मैंने तुम्हें सत्य से ढका था। सत्य पर कोई तलवार – वार नहीं कर सकती। तुम छिपे थे, ये सत्य है। हमने छिपाया, ये भी सत्य है। हमने कहा – वहाँ छिपा है, ये भी सत्य है क्योंकि हमने तुम्हें रूई से नहीं, सत्य से ढका था और वह सत्य इतना मजबूत था कि उन बदमाशों को भरोसा ही नहीं हुआ। वो उसे रूई का ढ़ेर समझ रहे थे और मैं सत्य देख रहा था।

 

_सत्य का कवच सबसे मजबूत होता है। जो सत्य को जीवन में धारण करता है, वही वास्तविक संतत्व के मार्ग पर चलता है।_
सत्य को किसी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती; उसका अस्तित्व ही उसका सबसे बड़ा प्रमाण है…!!!Colorful poster advertising a print gallery with Buddha statues, saints, circular photo frames, a burger image, contact numbers, and an address at the bottom.Smiling man with folded arms in a plaid shirt on the left; sunrise over mountains and a Hindi motivational quote on the right: 'जिनने धैर्य सीख लिया, उसने जीत का रास्ता पा लिया.'

 

आज यह अंतर्मना-अहिंसा-संस्कार पदयात्रा दिशा- सोनकच्छ, पुष्पगिरी तीर्थ मध्यप्रदेश की ओर बढते गुरु चरण परम पूज्य गुरुदेव भारत गोरव विश्व के सर्वश्रेष्ठ तपस्वी उत्तम सिंह निष्क्रिडित व्रत्तकर्ता अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्नसागरजी महाराज जी चतुर्विघ संघ का भव्य मंगल पद विहार दिनाँक 21 जून 2026, रविवार सुबह को 5.30 बजेजूनापाणी प्राथमिक शाला सी आर सी, नवागाम, जिला -दाहोद, गुजरात से गायत्री विघा मंदिर, हाईस्कूल, रंभापुर, जिला झाबुआ, मध्यप्रदेश 14.1 किलोमीटर के लिए होगा।

नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312

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