मृत्यु को ललकारता हुआ योगी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज दक्षिण ने निर्यापक आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से ली नियम संलेखना 

धर्म

मृत्यु को ललकारता हुआ योगी आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज दक्षिण ने निर्यापक आचार्य श्री विद्यासागर महाराज से ली नियम संलेखना 

कुंथुलगिरी 

आज एक ऐसा दृश्य देखने को मिला जब गुरु ने शिष्य के समक्ष नियम संलेखना व्रत लिया जी हा परम पूज्य आचार्य श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज दक्षिण ने विगत कुछ समय पूर्व अपना आचार्य पद अपने द्वारा दीक्षित परम शिष्य पूज्य मुनि श्री 108 विद्यासागर जी महाराज को प्रदान किया था। 

 

आज सचमुच एक अलौकिक पाल देखने को मिले जब आचार्य गुरुदेव ने अपने शिष्य आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज के चरणों में निवेदन करते हुए नियम संलेखना व्रत ग्रहण करने हेतु निवेदन किया।

 

 

इन पलो को साझा करते हुए आचार्य श्री 108 विद्यासागर महाराज ने कहा कि सुबह आहार के बाद ऐसे आचार्य जो मृत्यु को भी ललकार रहे हैं ऐसे गुरुदेव आचार्य वर्धमान सागर महाराज आहार करके आकर बैठे ही थे और उन्होंने आहार में जैसा भगवती आराधना एवं मरण कंटिका ग्रंथ में लिखा है ऐसा सिर्फ़ चावल का दलिया बिल्कुल पतला, छाछ और पानी के अलावा कुछ नहीं ले रहे हैं और आज आहार के बाद हम उनके पास बैठे ही थे थोड़ी सी अमृत धारा ज्यादा लगी हुई थी उस कारण उन्हें जलन हो रही थी साथ में बैठे महाराज ने पूछ लिया महाराज जलन हो रही है क्या इसको पोच दे सब गुरुदेव ने कहा अब जलन का क्या है अब तो इस पूरे शरीर को जलना है महाराज श्री ने कहा जिसको उससे रच मात्र भी मोह नहीं रहा है जो आए हर प्रसंग स्वीकार करने के लिए तत्पर है ऐसे साधक ने प्रसंग के माध्यम से बता दिया की मैं 17 जून 2026 से छाछ और पानी के अलावा कुछ नहीं लूंगा।

 

 

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    महाराज श्री ने कहा की मृत्यु से डरकर पलायन करने वाले इस विश्व में मृत्यु को भी डराने वाला योगी छाछ और पानी को छोड़कर सभी प्रकार के अन्न जल आदि के मोह को छोड़कर अपने देह से भिन्न उसे आत्म तत्व प्रकटाने के लिए उसको सिद्धत्व तक पहुंचाने के लिए कटिबद्ध है। 

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महाराज श्री ने बताया कि आचार्य श्री की संलेखना की तैयारी कुंथलगिरी आने से पूर्व भी चल रही थी लेकिन विगत दिनों से उन्होंने साधना को द्रुतगति से आगे बढ़ाई है। आचार्य श्री ने नियम संलेखना तो धारण कर ली है और यम संलेखना को सम्मुख रखते हुए वह यम और नियम से भी पार यम आशय मृत्यु को भी डराते हुए वे अपने भेद विज्ञान की आधारशिला पर विराजमान है।

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उन्होंने कहा उनकी साधना उनकी समाधि अत्यंत निर्विघ्न संपन्न हो उनकी ही नहीं उनके आदर्शों पर चलकर हम लोग भी इसी प्रकार अत्यंत उत्कृष्ट संलेखना को पा सके 

            अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी की रिपोर्ट 9929747312

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