स्वाभिमान और स्वाभिमानी वही श्रेष्ठ है..जिसकी वाणी और व्यवहार में, मधुरता तथा स्वभाव में विनम्रता हो..! अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज
मिराखेडी दाहोद गुजरात
अंतर्मना आचार्य श्री प्रसन्न सागरजी महाराज ने गुजरात के मिराखेडी में उपस्थित गुरु भक्तों को संबोधित करते हुए कहा कि। जैसे — वह धातु, जो अग्नि में तपाए बिना ही मुड़ जाती है, और वह लकड़ी, जो बिना पानी में डाले ही झुक जाती है — उसी प्रकार विनय, विवेक, समझदारी, होशियारी और बुद्धिमत्ता से कार्य करने वाले लोग प्रायः असफल नहीं होते। विनम्रता का अर्थ आत्मविश्वास का अभाव नहीं होता, और स्वाभिमानी होने का अर्थ केवल अत्यधिक कॉन्फिडेंट होना भी नहीं है।
वास्तविकता यह है कि व्यक्ति अपनी सीमाओं और कमजोरियों को पहचानते हुए, अपनी जड़ों और सिद्धांतों पर दृढ़ बना रहे। *यदि आपके भीतर आत्मविश्वास से युक्त विनम्रता है, तो आप किसी भी कठिनाई का सहजता से सामना कर सकते हैं । कुछ लोगों के कार्य, कर्तव्य और दूरदर्शी निर्णयों का महत्व समाज को तब समझ आता है, जब उनके परिणाम सामने आते हैं। अंगार पर राख जम जाए, तो उसे बुझा हुआ नहीं समझना चाहिए।
यह छः बातें मनुष्य की सफलता में सबसे बड़ी बाधा बन सकती है —_
(1) अत्यधिक अहंकार।
(2) अति वाचालता।
(3) आवश्यकता से अधिक होशियारी दिखाना।
(4) दूसरों को मूर्ख समझना।
(5) केवल अपने स्वार्थ के बारे में सोचना।
(6) मित्र-द्रोही बनकर जीवन जीना।
इन दोषों से बचकर ही मनुष्य जीवन का वास्तविक आनंद प्राप्त कर सकता है…!!!आज अंतर्मना-अहिंसा-संस्कार पदयात्रा दिशा-दाहोद की ओर बढते गुरु चरण परम पूज्य गुरुदेव भारत गोरव विश्व के सर्वश्रेष्ठ तपस्वी उत्तम सिंह निष्क्रिडित व्रत्तकर्ता अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्नसागरजी महाराज जी चतुर्विघ संघ का भव्य मंगल पद विहार दिनाँक 16 जून 2026, मंगलवार सुबह 5.30 बजे
से मॉडल स्कूल, मीराखेडी Mirakhedi, जिला -दाहोद गुजरात से आदर्श निवासी शाला, छात्रावास (हॉस्टल), कॉलेज रोड, 9.1 किलोमीटर के लिए होगा।
नरेंद्र अजमेरा पियुष कासलीवाल औरंगाबाद से प्राप्त जानकारी संकलन अभिषेक जैन लुहाड़िया रामगंजमंडी 9929747312
